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आतंकियों के नाम पर हुआ कश्मीर में क्रिकेट टूर्नामेंट

टीमों के नाम भी आतंकियों के नाम पर, और न सेना ने रोका, न पुलिस ने.

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Source-Freehdwallpaper

कश्मीर के त्राल में 2 महीने से क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा था. शहीद खालिद मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट. 16 टीमें इसमें हिस्सा ले रही थीं. ये सारी वो टीमें थीं जो आस-पास के कस्बों से आई थीं. फाइनल का दिन था. मैदान ईदगाह क्रिकेट ग्राउंड का. मुकाबला खालिद लायंस और यूनाइटेड XI के बीच था. खालिद लायंस ने पहले बैटिंग की. पंद्रह ओवर में 116 रन बनाए. यूनाइटेड XI बाद में बैटिंग करने आई. 34 रन से हार गई.

पर इसमें ऐसा क्या था जो बताया जाए? द इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मुताबिक़ ये पूरा टूर्नामेंट आतंकियों को डेडीकेटेड था. सोलह में तीन टीमों के नाम आतंकवादियों के नाम पर थे. बुरहान लायंस, आबिद खान कलंदर्स और खालिद लायंस. ये टूर्नामेंट जिस खालिद के नाम पर खेला जा रहा था. वो भी हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर मुजफ्फर वनी का भाई था. पिछले साल पुलवामा के जंगलों में उसे तब मार दिया गया था. जब वो अपने आतंकी भाई से मिलने गया था. उस जंगल में बहुत सारे आतंकवादी रहते थे. सेना का कहना था. उसे एनकाउंटर में मारा गया था. वो भी आतंकियों से मिला था. आबिद खान कलंदर्स भी एक टीम का नाम था. हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकी आबिद खान के नाम पर इसका नाम रखा गया था. आबिद 2014 में मर गया था. उसके पापा एक स्कूल में हेडमास्टर थे, 2010 में हिजबुल में जाने के लिए उसने हेडमास्टर पापा और घर को छोड़ दिया था. ये टूर्नामेंट ऑर्गनाइज करने वाले कहते हैं, हमने ये सब अपने दोस्त खालिद को याद करने के लिए किया था. पहली बार हमने हिजबुल के कमांडरों के नाम पर टीमों के नाम रखे थे. बुरहान के पापा को फाइनल पर चीफ गेस्ट बनाया था. हंदवाड़ा की घटना के कारण तो थोड़ा पीछे हुआ फाइनल नहीं तो और पहले होता. ये बात भी सामने आई है कि जब 22 फरवरी को टूर्नामेंट शुरू हुआ था तो कश्मीर की आजादी के गाने बजे थे. पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि न सेना ने और न ही पुलिस ने इस पूरे आयोजन को रुकवाने या रोक-टोक की कोई भी कोशिश की.

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