एक बात है. इंडिया में आप टीवी की स्क्रीन पर महीने में 5 बार दिखने लगिए और फिर देखिये. आप भले ही कुछ भी करते हों, लेकिन हर तीसरी फ़ोन कॉल किसी न किसी ब्रांड के विज्ञापन करने के लिए होगी. ऐसा बाकी मुल्कों में भी होता ही है. लेकिन इंडिया में तहलका तब मच जाता है जब आप क्रिकेट खेलते हों. क्रिकेट के साजो-सामान से लेकर शैम्पू और दंतमंजन के ब्रांड्स के लिए आपको साइन किया जायेगा. यही वजह है कि भारत रत्न पाया आदमी आपको पंखे और वाटर प्योरीफायर के गुण गिनाता मिलेगा. और इसमें कोई ग़लत बात भी नहीं है. पैसा है भाई!

सचिन ने दशकों इंडियन ऐड्स पर राज किया है. पैसे के मामले में. पेप्सी का वो ऐड हो जिसमें सचिन और शेन वार्न एक साथ दिखते थे या वो जिसमें 40-50 बच्चे सचिन का मुखौटा लगाये पेप्सी पी रहे होते हैं और उन्हीं के बीच से असली सचिन निकल आता है. और एक दिन अचानक इंडिया टी-20 वर्ल्ड कप जीत गया. 2007 में. सही सुना. अचानक ही जीता था. और रातों-रात सचिन खिसक कर नीचे आ गए.

ऐड वर्ल्ड में एक नयी एंट्री आ चुकी थी. नाम था महेंद्र सिंह धोनी. छोटे शहर का बड़ा आदमी. आते ही सीधे सचिन को खिसका दिया. आईपीएल में सबसे महंगा खिलाड़ी. 2007 से लेकर अभी तक धोनी सबसे ऊपर काबिज हैं. लेकिन अभी अभी विराट कोहली ने उन्हें एक मामले में पीछे कर दिया है. ये शायद विज्ञापन की दुनिया के नए बाहुबली की शुरुआत हो सकती है. नए बाहुबली यानी विराट कोहली.

क्रिकेटरों के पास इतने साजो सामान होते हैं कि उनके हेलमेट से लेकर जूतों तक पर ब्रांड्स अपना बिल्ला चिपकाना चाहते हैं. इस मामले में क्रिकेटर का बल्ला सबसे बड़ी जगह होती है. भले ही धोनी भइय्या सबसे ज़्यादा पैसे कमाते हों लेकिन कोहली अपने बैट पे MRF का बिल्ला चिपकाने के लिए कंपनी से 6 करोड़ रुपिये लेते हैं.

धोनी को SPARTAN का बिल्ला चमकाने के लिए उनसे 2 करोड़ कम 4 करोड़ रुपिये मिलते हैं. हालांकि सचिन के MRF के स्टीकर के लिए कोई भी तय रकम पब्लिक डोमेन में नहीं बताई गयी है लेकिन एक आंकलन के हिसाब से उन्हें कम से कम 5 करोड़ रुपिये मिलते थे. आज से 3 साल पहले. जो आज की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है. कहा जाता है कि MRF से डील ख़त्म होने पर ADIDAS ने उन्हें 8 से 10 करोड़ रुपिये दिए थे.

दूसरे खिलाडियों में युवराज सिंह को PUMA ने 4 करोड़ रुपिये में साइन किया है. युवराज को ये रकम बल्ले पर स्टीकर, कपड़े और जूतों के लिए मिलती है. शिखर धवन भी MRF के बल्ले से खेलते हैं जिसके लिए उन्हें 3 करोड़ रुपिये मिलते हैं. क्रिस गेल को SPARTAN 3 करोड़, और डिविलियर्स को 3.5 करोड़ Kookaburra देती है. वैसे कोहली को इसके अलावा भी किसी एक ब्रांड के कपड़े और जूते पहनने के लिए पैसे मिलते हैं. इसके लिए वो 2 करोड़ रुपिये चार्ज करते हैं. ऑफ-फ़ील्ड विज्ञापनों के लिए हर ब्रांड से कोहली जहाँ 5 करोड़ लेते हैं वहीँ धोनी का दाम है 8 करोड़ रुपिये. इंडियन क्रिकेटरों को विदेशी क्रिकेटरों से कहीं ज़्यादा पैसे मिलते हैं. क्यूंकि इंडिया में क्रिकेट का अलग ही भौकाल है और बाकी देशों के मुकाबले यहां क्रिकेटर्स आम जनता को अपनी ओर सबसे ज़्यादा खींचते हैं.