मैं अभी दो अस्पताल होकर आया हूं. वहां की हालत देखी तो मैंने सोचा कि देख लेते हैं कि शहर में क्या चल रहा है. यह सब देख कर मैं हैरान रह गया. यहां पुलिस की गाड़ी खड़ी है, लेकिन फिर भी यह सब यहां चल रहा है. पुलिस भी इस पूरे कारनामे में मिली हुई है. ये लोग पढ़े लिखे हैं, लेकिन फिर भी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे. यही लोग कोरोना फैलने पर कहेंगे कि सरकार कुछ कर नहीं रही है.बाद में डीएम शैलेष कुमार यादव ने माफी भी मांगी थी. उन्होंने कहा था कि अगर उनके व्यवहार से किसी की भावना आहत हुई है, तो वो इसके लिए माफी मांगते हैं. उन्होंने कहा था कि उनकी मंशा केवल इतनी थी कि नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए. डॉक्टर भी हैं शैलष कुमार यादव शैलेष कुमार यादव साल 2003 बैच के IAS अधिकारी हैं. उन्होंने दूसरे प्रयास में UPSC की परीक्षा पास की थी. इससे पहले उनका चयन पुलिस सेवा में हुआ था. उनका जन्म 23 जून 1979 को यूपी के आंबेडकर नगर में हुआ. शैलेष यादव पेशे से डॉक्टर हैं. सिविल सेवा में आने से पहले उन्होंने MBBS और MS किया है.
शादी में थप्पड़बाजी करने वाले DM याद हैं? जानिए अब उनके साथ क्या हुआ
विवाद हुआ तो हड़बड़ी में छुट्टी पर भेज दिए गए थे DM.
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अगरतला के डीएम शैलेश यादव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
त्रिपुरा का वेस्ट त्रिपुरा डिस्ट्रिक्ट. यहां के डीएम रहे शैलेष कुमार यादव (Shailesh Kumar Yadav) का एक वीडियो पिछले दिनों वायरल हुआ था. 26 अप्रैल को वो नाइट कर्फ्यू में अगरतला शहर के हालात देखने निकले थे. इस दौरान रात 10 बजे के बाद तक शादियां चल रही थीं. डीएम ने इन शादियों में छापा मारा. वायरल वीडियो में डीएम साहब पंडित को थप्पड़ मारते, दूल्हे को धकियाते और मेहमानों पर भड़कते नज़र आ रहे थे. कुछ पुलिसवाले भी इस वीडियो में दिख रहे थे, मेहमानों पर लाठीचार्ज करते हुए. वैसे तो डीएम की मंशा थी कि लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू के नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए. लेकिन सख्ती के चक्कर में वो बहुत ज्यादा रूड हो गए, दूल्हा-दुल्हन और मेहमानों के साथ बहुत गलत तरीके से पेश आए. वीडियो सोशल मीडिया पर आया और बवाल हो गया. शैलेष कुमार यादव के व्यवहार की आलोचना होने लगी. त्रिपुरा सरकार ने आनन फानन में इन्क्वायरी बैठा दी. शैलेष कुमार यादव को वेस्ट त्रिपुरा के डीएम पद से हटा दिया और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया. हालांकि, वो दूसरे पदों पर बने रहे. इस मामले में एक PIL और रिट पिटीशन त्रिपुरा हाईकोर्ट में दाखिल की गई. 26 अप्रैल को जिन शादियों में डीएम ने छापेमारी की थी, उनमें से एक की दुल्हन के पिता ने ये पिटीशन डाली थी. चीफ जस्टिस अकील कुरैशी और जस्टिस एसजी चट्टोपाध्याय की बेंच ने मामले को सुना. 5 मई को बेंच ने कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष हो, इसके लिए ज़रूरी है कि शैलेष कुमार यादव को अगरतला से बाहर भेजा जाए. इसके बाद उनका ट्रांसफर बेलोनिया कर दिया गया. इसके साथ ही बेंच ने उस कमेटी में भी बदलाव किया जो इस केस की जांच कर रही थी. रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज सुभाष सिकदर को इस कमेटी में शामिल किया गया है.
क्या हुआ था 26 अप्रैल को?
DM शैलेष यादव कोरोना प्रोटोकॉल फॉलो करवाने के लिए शहर में गश्त पर निकले थे. अलग-अलग मैरिज हॉल्स में नाइट कर्फ्यू के बावजूद रात 10 बजे के बाद तक शादी चल रही थी. कोरोना गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए बड़ी संख्या में लोग इन शादियों में शामिल हुए थे. बैंड, केटरिंग सबकी व्यवस्था थी. न सोशल डिस्टेंसिंग दिख रही थी, न ही कोई मास्क में नज़र आ रहा था. DM साहब मैरिज हॉल में घुसते ही सामने आ रहे हर शख्स पर चिल्लाने लगे, उन्हें धकियाने और उन्हें थप्पड़ मारने लगे. डीएम किसी की बात सुनने को राज़ी नहीं थे. एक महिला ने परमीशन की कॉपी दिखाई तो उन्होंने वो फाड़ दी, ये कहते हुए कि रात 10 बजे के बाद शादी समारोह की इजाज़त नहीं है.
इस दौरान डीएम पुलिसवालों पर भी लगातार नाराज़ होते दिखे. कि उनकी मिलीभगत से ही लोग कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं. पूरी कार्रवाई के बाद डीएम ने कहा,
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