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जिस पाकिस्तानी की एक आवाज पर जल उठता है कराची

हुक्मरान सख्त नफरत करते हैं. मीडिया कवरेज पर भी बैन है. लेकिन कराची में चलती इसी की है.

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फोटो - thelallantop
पाकिस्तान की हुकुमत का एक ऐसा दुश्मन, जिससे पड़ोसी मुल्क के हुक्मरान सख्त नफरत करते हैं.  हजारों मील दूर लंदन में रहकर भी जिसकी एक आवाज पर पूरा कराची जल उठता है. अल्ताफ हुसैन. 1984 से एक्टिव मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) का चीफ अल्ताफ हुसैन. मकसद उर्दू भाषी मुहाजिरों का नेतृत्व और अधिकार की लड़ाई. मुहाजिर वो रिफ्यूजी हैं, जो आजादी के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए थे. कनाडा की फेडरल कोर्ट ने MQM को 2006 में आतंकी संगठन करार दिया. अल्ताफ हुसैन के किसी भी बयान को पाकिस्तानी मीडिया में दिखाने की इजाजत नहीं है. लाहौर हाईकोर्ट ने 7 सितंबर 2015 को अल्ताफ की तस्वीर, वीडियो या बयान मीडिया में दिखाने पर पूरी तरह बैन लगा दिया है. MQM के विरोध की एक बड़ी वजह यूनिवर्सिटी और सिविल सेवाओं में सिंधियों को तरजीह देना है. मांग साफ सी कि उर्दू भाषी मुहाजिरों को हुकुमत और सरकारी नौकरियों में तरजीह दी जाए. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में इस वक्त MQM के 25 सांसद हैं. कुछ दिन पहले ही पार्टी के 23 सांसदों ने इस्तीफा दे दिया था. सरकार पर आरोप लगाया कि कराची में पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं पर जबरन कार्रवाई की जा रही है. अभी लोकल जनरल चुनावों में कराची शहर में एमक्यूएम की मस्त जीत हुई है. नवाज शरीफ और इमरान खान की पार्टी से ज्यादा अल्ताफ की पार्टी का परचम रहा. आजादी से पहले अल्ताफ हुसैन अपने मां-पिता के साथ उत्तर प्रदेश के आगरा में रहते थे.  बंटवारे के बाद अल्ताफ पाक चले गए. अल्ताफ हुसैन लंदन में 1992 से राजनीतिक शरणार्थी बनकर जिंदगी काट रहे हैं और MQM के फैसले ले रहे हैं. वहां रहने की वजह 1992 में पाकिस्तानी सरकार का ऑपरेशन क्लीन अप. यानी मिलिट्री भेजकर MQM का सफाया, जिससे उस दौर में मचे सियासी भूचाल को खत्म करने की कोशिश की गई. लेकिन इस ऑपरेशन के शुरू होने से ठीक एक महीने पहले अपनी लाइफ पर मंडराते खतरे को देख अल्ताफ यूनाइटेड किंगडम (यूके) चले गए. ऐसा नहीं है कि अल्ताफ हुसैन ब्रिटेन में गुपचुप तरीके से रह रहे हैं. ब्रिटेन के हुक्मरान और पुलिस के हाथों से अल्ताफ दूर नहीं हैं. 2002 में एक क्लेर्किल मिस्टेक की वजह से उन्हें ब्रिटिश नागरिकता मिली. जून 2014 में मेट्रोपॉलिटन पुलिस लंदन में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में अल्ताफ को गिरफ्तार भी करती है. लेकिन तीन दिन बाद ही रिहाई भी नसीब हो जाती है. अल्ताफ हुसैन पर भ्रष्टाचार समेत करीब 3576 केस दर्ज हैं. भारत, पाकिस्तान और अल्ताफ हुसैन: अल्ताफ हुसैन खुले तौर पर हमेशा से भारत और पाकिस्तान की कड़वाहट दूर करने की कोशश करते नजर आते हैं. अल्ताफ हुसैन की मदद और फंडिंग करने का आरोप भारत पर भी लगता रहा है. लेकिन MQM और भारत दोनों ही इसे खारिज करते आए हैं.

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