निचली अदालत ने असांज को अमेरिका के हवाले ना किए जाने के लिए उनकी मानसिक हालत और आत्महत्या की आशंका का हवाला दिया था. इस फैसले के तुरंत बाद अमेरिका ने ब्रिटिश हाई कोर्ट में अपील की थी जिसने उसके पक्ष में फैसला सुना दिया है. अब असांज को अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है. वहां उनके खिलाफ जासूसी के आरोप के तहत सुनवाई शुरू हो सकती है.
'घोर अन्याय'
हालांकि असांज के पास अभी भी हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने का विकल्प खुला हुआ है. उनकी पार्टनर स्टेला मॉरिस ने इस ओर इशारा भी किया है. हाई कोर्ट के फैसले को 'घोर अन्याय' बताते हुए मॉरिस ने कहा कि असांज की लीगल टीम जल्द से जल्द इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी.जूलियन असांज इस समय हाई सिक्योरिटी के बीच लंदन की बेलमार्श जेल में बंद हैं. अप्रैल, 2019 में एक्वाडोर द्वारा उनका साथ छोड़ने के बाद लंदन पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. अब हाई कोर्ट ने निचली अदालत के जज को आदेश दिया है कि वह असांज को अमेरिका प्रत्यर्पित करने की रिक्वेस्ट रिव्यू के लिए गृह मंत्री को भेजे. यूनाइटेड किंगडम की गृह मंत्री प्रीति पटेल ही असांज को प्रत्यर्पित करने के संबंध में अंतिम फैसला लेंगी.
'शर्मनाक फैसला'
पिछले एक दशक से अधिक समय से चल रहा जूलियन असांज का मामला अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस का केंद्र बना हुआ है. असांज का समर्थन करने वालों का कहना है कि किसी भी दूसरे मीडिया संस्थान की तरह ही विकीलीक्स के पास भी समाज की भलाई के लिए गोपनीय दस्तावेज प्रकाशित करने का अधिकार है. इन लोगों का कहना है कि मीडिया को यह आजादी अमेरिका का संविधान देता है. यही नहीं, पहले भी अमेरिकी मीडिया इस तरह के दस्तावेज प्रकाशित कर चुका है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक ने इसे जायज बताया है.

लंदन हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते Julian Assange के समर्थन. (फोटो: AP)
जाहिर है लंदन हाई कोर्ट के इस फैसले पर असांज के समर्थकों ने नाराजगी जताई है. रिपोर्टर्स विदऑउट बॉर्डर की यूके ब्रांच हेड रेबेका विनसेंट ने ट्वीट करते हुए कहा,
"यह बहुत ही शर्मनाक है. इस फैसले के चिंतित करने वाले निहितार्थ हैं. ना केवल असांज के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि पूरी दुनिया में पत्रकारीय आजादी के लिए भी."
प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की तरफ से भी ट्वीट किया गया,
"पत्रकारिता अपराध नहीं है. जूलियन असांज को रिहा करो."
वहीं विकीलीक्स के साथ जुड़े आइसलैंड के पत्रकार क्रिस्टीन रैनसन ने लिखा,
"संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के दिन यूनाइटेड किंगडम की एक अदालत ने खोजी पत्रकारिता को अंधेरे में धकेल दिया है और जूलियन असांज का उत्पीड़न जारी रखा."विकीलीक्स के कागजात पर काम कर चुकीं इटली की पत्रकार स्टेफानिया मारूजी ने कहा कि जूलियन असांज का मामला पत्रकारिता का भविष्य तय करेगा. साथ ही साथ यह भी तय करेगा कि नागरिकों के पास सरकारों के काले सच को जानने का अधिकार है या नहीं. मारूजी ने यह भी कहा कि जूलियन असांज को अब बस लोगों का दबाव बनाकर ही बचाया जा सकता है.





















