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मराठा आरक्षण: जरांगे पाटिल का अनशन खत्म, कहा- 'सरकार को और वक्त दे रहे हैं'

मराठा आरक्षण के लिए अनशन पर बैठे जरांगे पाटिल ने कहा, 'हम सरकार को और समय देने का फैसला कर रहे हैं.' अपना अनशन खत्म करने की घोषणा करते हुए जरांगे पाटिल बोले कि सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी मराठों को आरक्षण मिले.

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सरकार ने माना है कि उनकी समिति राज्य भर में काम करेगी और एक रिपोर्ट सौंपेगी. (फोटो- ट्विटर)
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पंकज खेळकर

महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) देने पर सहमति जताई है. मराठा आरक्षण को लेकर पिछले कुछ दिनों से हो रही हिंसा के बाद सरकार ने अब ये फैसला लिया है. इसके साथ ही मराठा आरक्षण के लिए आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारी जरांगे पाटिल भी अपना अनशन तोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्होंने सरकार को आरक्षण जारी करने और सरकारी मसौदा तैयार करने के लिए 2 महीने का अतिरिक्त समय देने पर भी सहमति जताई है. 

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जरांगे पाटिल ने अनशन खत्म करने की घोषणा करते हुए कहा कि वो महाराष्ट्र सरकार को मराठा आरक्षण के लिए दो महीने का वक्त और दे रहे हैं. इस हिसाब से नई समय सीमा 2 जनवरी, 2024 तक की है. जरांगे पाटिल ने अनशन पर बैठे लोगों को संबोधित करते हुए कहा,

“हम अतिरिक्त समय देने का निर्णय ले रहे हैं, मैं आप लोगों से पूछ रहा हूं कि क्या हमें सरकार को अतिरिक्त समय देना चाहिए?”

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पाटिल ने आगे कहा कि, यहां मंच पर हमारे पास सरकारी प्रतिनिधि और समिति के जानकार लोग हैं. हमारे पास जानकार लोगों की अपनी टीम भी है, जो यहां पास में बैठे हैं. पाटिल ने कहा,

“सरकार द्वारा गठित समिति को कुछ और समय लेना चाहिए, लेकिन ये सुनिश्चित करने पर काम करना चाहिए कि सभी मराठों को आरक्षण मिले. सरकार ने माना है कि उनकी समिति राज्य भर में काम करेगी और एक रिपोर्ट सौंपेगी. सरकार कुनबी मराठों को प्रमाण पत्र देने के लिए तैयार है.”

25 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे थे

बता दें कि जरांगे पाटिल 29 अगस्त को जालना में पहली बार भूख हड़ताल पर गए थे. 14 सितंबर को जरांगे ने शिंदे और अन्य मंत्रियों के आश्वासन पर अपना उपवास तोड़ा था. उन्होंने 40 दिनों में आरक्षण की घोषणा का आश्वासन दिया था. 24 अक्टूबर को 40 दिनों की डेडलाइन पूरी हुई थी. इसके बाद 25 अक्टूबर से जरांगे फिर से भूख हड़ताल पर बैठ गए थे. 

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पूरे प्रदेश में कई जगह हिंसक घटनाएं हुईं. NCP के पार्टी ऑफिस को आग के हवाले कर दिया गया था. इतना ही नहीं, कई गांवों ने आने वाले चुनावों का बहिष्कार करने की बात भी कही. बीड में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि पुलिस को धारा 144 लागू करनी पड़ी थी.

हिंसा के बीच कई नेताओं के घर जला दिए गए. NCP के विधायक प्रकाश सोलंके के घर में आग लगा दी गई. बीड से NCP के ही शरद पवार गुट के विधायक संदीप क्षीरसागर के घर और पार्टी दफ्तर को आग लगा दी गई. घरों को तो आग लगाई ही गई, साथ ही परिसर में खड़ी गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया गया था.

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