बाराबंकी में एक जगह है हैदरगढ़. लखनऊ से सौ किलोमीटर दूर ही होगा. वहां गोमती किनारे टीकाराम घाट है. दस दिन से वहां जल सत्याग्रह चल रहा था. काहे के लिए? उनके यहां नदी पर पुल नहीं है. बरसात के चार महीने नदी एक इधर और उधर रहने वाले मिल नहीं पाते. गांववालों का बाकी दुनिया से कनेक्शन नहीं रह जाता.
वैसे तो आम दिनों के लिए पीपा पुल लगा रहता है, लेकिन बरसात में हटा देते हैं. फिर न बच्चे स्कूल जा पाते न आदमी-औरत काम पर.


बच्चियां बताती हैं. नाव यूज करनी पड़ती है स्कूल जाने को. फिर डर लगता है. नाव डूब न जाए. एक बूढ़ा आदमी तो डूब भी गया था. समाजवादी पार्टी के मंत्री जी तीन साल पहले गांव गए तो कह आए थे पक्का पुल बनवाएंगे. आज तक नहीं बना. फिर क्या बेचारे गांवालों को पानी में उतरना पड़ा. उसके बाद मीडिया पहुंचा. मीडिया में खबर चली तो नेताजी लोग भी पहुंचे. राज्यसभा के सांसद और कांग्रेस के नेता हैं डॉक्टर पी.एल. पुनिया वो पहुंचे और 25 लाख देने की कही. बोले सांसद निधि से ज्यादा से ज्यादा 25 लाख दे सकता हूं. बाकी सीएम को कहूंगा वो लगाएं और पुल बनवा दें.


गांववाले कह रहे थे कि अब एक जुलाई से वो भूख हड़ताल करेंगे. जल सत्याग्रह तब तक चालू रहेगा जब तक पुल बनना तय नहीं हो जाता. पी.एल. पुनिया भले पहुंच गए हैं, समाजवादी पार्टी की जिसकी सरकार है. उसकी ओर से कोई चूं-चा नहीं हुई है. अखिलेश यादव को जन्मदिन मुबारक. इधर देख लें आपके स्टेट में लोग पानी में खड़े होने पर मजबूर हैं.