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मोदी सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए 67000 करोड़ रुपये तय किए थे, पता है बजट कितना धड़ाम हुआ?

वित्त मंत्रालय ने हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय को इस साल के लिए जल जीवन मिशन का बजट कम करने की जानकारी दे दी है.

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सांकेतिक तस्वीर. (साकेंतिक तस्वीर- इंडिया टुडे)

क्या केंद्र सरकार अपनी महत्वाकांक्षी ग्रामीण जल योजना यानी जल जीवन मिशन (JJM) के बजट में बड़ी कटौती की तैयारी कर रही है? इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि बजट 2025-26 में इस योजना के लिए 67,000 करोड़ रुपये तय किए गए थे. लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (रिवाइज़्ड एस्टीमेट) में इसे घटाकर करीब 17,000 करोड़ रुपये किया जा सकता है. इस जानकारी के मुताबिक, जल जीवन मिशन में लगभग 60 प्रतिशत की कटौती की जाएगी.

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इंडियन एक्सप्रेस ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि वित्त मंत्रालय ने हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय को इस साल के लिए जल जीवन मिशन का बजट कम करने की जानकारी दे दी है. बताया गया है कि जल शक्ति मंत्रालय अभी भी कैबिनेट से इस योजना को 2028 तक बढ़ाने की औपचारिक मंजूरी का इंतजार कर रहा है. ऐसे में मंजूरी न मिलने की स्थिति में यह माना गया कि वित्त वर्ष के बचे हुए 2-3 महीनों में पूरी बजट राशि खर्च करना संभव नहीं होगा.

1 फरवरी 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जल जीवन मिशन को आगे बढ़ाने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि 2019 से अब तक देश के ग्रामीण इलाकों में 15 करोड़ घरों, यानी लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को पीने के साफ पानी के लिए नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं. वित्त मंत्री ने कहा था कि 100 प्रतिशत कवरेज हासिल करने के लिए मिशन को 2028 तक बढ़ाया जा रहा है और इसके लिए कुल बजट भी बढ़ाया जाएगा.

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जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी. इसका लक्ष्य था कि 2024 तक देश के सभी ग्रामीण घरों को हर व्यक्ति के लिए रोज़ाना 55 लीटर पीने का पानी उपलब्ध कराने वाले नल कनेक्शन दिए जाएं. वित्त वर्ष 2024-25 में भी केंद्र ने इस योजना के लिए 70,163 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन बाद रिवाइज़्ड एस्टीमेट के तहत इसे घटाकर 22,694 करोड़ रुपये कर दिया गया था.

यह योजना अनियमितताओं के कारण भी विवादों में रही है. साल 2025 में सरकार ने इस पर सख्त रुख अपनाया. 21 मई 2025 को इंडियन एक्सप्रेस ने इस योजना पर विस्तृत रिपोर्ट की थी. रिपोर्ट में सामने आया था कि तीन साल पहले मिशन की गाइडलाइन्स में कुछ बदलाव किए गए. इन बदलावों से खर्च पर लगने वाली एक अहम रोक हट गई. इसके बाद लागत में भारी बढ़ोतरी हुई. जांच में पाया गया कि इससे अनुमानित लागत के मुकाबले करीब 16,839 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हुए, जो लगभग 15 प्रतिशत ज्यादा था.

इसी महीने सरकार ने जल जीवन मिशन के कामकाज की जमीनी जांच के लिए सौ से ज्यादा अधिकारियों को भेजा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि मिशन में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और किसी को भी बख्शा न जाए.

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10 नवंबर को ग्रामीण इलाकों में नल से पीने का पानी उपलब्ध कराने में वित्तीय अनियमितताओं और घटिया काम की शिकायतों के बाद 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कम से कम 596 अधिकारियों, 822 ठेकेदारों और 152 थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.

वीडियो: खर्चा-पानी: ‘जल जीवन मिशन’ पर 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट से PM मोदी का सीना चौड़ा हो जाएगा

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