स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान हर जहाज से 20 लाख डॉलर (करीब 18.78 करोड़ रुपये) ले लेगा. एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. इसके मुताबिक, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के एक सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर लिए जाएंगे. अमेरिका-इजरायल से जंग के बीच ईरान का यह कदम शिपमेंट सेक्टर में हलचल मचाने वाला है.
होर्मुज से निकलना है तो 18 करोड़ रुपये दो... ईरान अब हर तेल टैंकर से वसूलेगा 'टोल'
ईरान में शुरू हुई जंग के शुरुआती दिनों से ही Strait of Hormuz को लेकर विवाद है. ईरान ने अपने दुश्मन देशों के लिए इसे बंद कर दिया है. अमेरिका की मांग है कि इसे खोल दिया जाए. इसके बंद होने से तेल और गैस के दाम में बढ़ोतरी देखी जा रही है. अब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर नया प्लान बनाया है.


ईरान के होर्मुज से जहाज गुजरने की इजाजत देने के बदले जो रकम तय की गई है, उसकी वजह भी बताई गई है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, अलाएद्दीन बोरौजेदी ने कहा,
"ईरान ने 47 सालों के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संप्रभुता की नई परिभाषा काबिज की है. अब कुछ जहाजों के गुजरने के लिए 20 लाख डॉलर का शुल्क लिया जाएगा. ये शुल्क लिया जाना ईरान की ताकत को दर्शाता है. अब, चूंकि युद्ध में खर्चा होता है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हमें ये करना ही होगा."
बोरौजेर्दी ने कहा कि युद्ध में पैसों की जरूरत होती हैं. माने, ईरान युद्ध खर्च की भरपाई दूसरे देशों के जहाजों से पैसा वसूलकर करेगा. इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक जरूरी रास्ता है. ईरान इसी रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से वसूली करेगा. हालांकि, बयान के मुताबिक, ये नियम सारे देशों पर लागू नहीं किया गया है. ये शुल्क सिर्फ कुछ ही देशों से लिया जाएगा. खासतौर पर ईरान के दुश्मन देशों से.
अमेरिका-इजरायल से ईरान का युद्ध एक तरफ, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मसला दूसरी तरफ. होर्मुज में जारी बंदी ने पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है. इसी रास्ते से कई देशों का व्यापार होता है. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG का ट्रांसपोर्टेशन होर्मुज से होता है. ईरान की बंदिश ने कच्चे तेल के दाम में आग लगा दी है. क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.
होर्मुज बंद ना हो, इसके लिए 22 देशों का ग्रुप एक साथ आ रहा है. ये सुनिश्चित करेगा कि समुद्री रास्ता सुरक्षित और स्वतंत्र रहे. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) के महासचिव मार्क रुट्टे ने बताया,
"एक अच्छी खबर आई है. 22 देशों का समूह साथ आया है. इन 22 देशों में कुछ NATO के सदस्य भी हैं. इसमें जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और बहरीन जैसे देश भी शामिल हैं. इसका मकसद है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को आजाद रखा जाए और जल्द से जल्द खोल दिया जाए. हमें इसके लिए एक साथ काम करना होगा."
जंग के शुरुआती दिनों से ही इस रास्ते को लेकर विवाद है. ईरान ने अपने दुश्मन देशों के लिए इसे बंद कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा था,
"होर्मुज स्ट्रेट केवल हमारे दुश्मनों और उनके हमलों का समर्थन करने वालों के लिए बंद है."
अमेरिका चाहता है कि ये रास्ता सबके लिए खोल दिया जाए. रविवार, 22 मार्च की सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक धमकी भरे संदेश में लिखा था,
"अगर ईरान अगले 48 घंटों के भीतर बिना किसी धमकी के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके अलग-अलग पावर प्लांट पर हमला करेगा और उन्हें पूरी तरह से तबाह कर देगा. शुरुआत सबसे बड़े प्लांट से होगी."

ट्रंप की धमकी पर ईरान का जवाब भी सामने आया है. ईरानी सेना के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा,
“अगर अमेरिका ने अपनी धमकी के मुताबिक, ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला किया तो होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. जब तक हमारे पावर प्लांट्स फिर से नहीं बन जाते, तब तक इसे खोला नहीं जाएगा.”

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा सा समुद्री रास्ता है. ये फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. और फिर आगे जाकर अरब सागर से मिल जाता है. इसके नॉर्थ में ईरान है. साउथ में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान हैं. इसके आसपास सारे ऐसे देश हैं जो बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई करते हैं.
इस रास्ते से दुनिया भर में तेल सप्लाई होता है, खासकर भारत समेत एशियाई देशों में. दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब 20 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है. अब ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर लेगा.
वीडियो: ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, ईरान ने उल्टा क्या धमका दी?























