अमेरिका और इजरायली हमले के विरोध में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बढ़ा दिया है. उनकी अनुमति के बाद ही वहां से कोई जहाज गुजर पा रहा है. इस बीच शिप ट्रैकिंग डेटा से जानकारी मिली है कि भारत की ओर आ रहे कच्चे तेल से भरे एक जहाज ने अचानक रास्ता बदल लिया है. भारत आ रहा ये जहाज अब चीन की ओर मुड़ चुका है.
ईरान से 6 लाख बैरल तेल लेकर भारत आ रहा टैंकर अचानक चीन की ओर क्यों मुड़ा?
ईरान के खार्ग द्वीप से भारत के गुजरात की तरफ आ रहे कच्चे तेल के एक टैंकर ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया है. यह टैंकर अब चीन की ओर जाता दिख रहा है. इस टैंकर में लगभग 6 लाख बैरल कच्चा तेल लोड है. जहाज ट्रैकिंग साइट्स के मुताबिक, इस टैंकर के 2 अप्रैल की देर रात से तीन अप्रैल की सुबह तक वडीनार पहुंचने की उम्मीद थी.


जहाज ट्रैकिंग फर्म केप्लर के डेटा के मुताबिक, भारत की ओर आ रहे तेल टैंकर 'पिंग शुन' भारत की ओर आ रहा था. लेकिन अब यह चीन के डोंगयिंग की ओर पहुंचने का सिग्नल दे रहा है. ईरान के खार्ग द्वीप से निकले इस टैंकर में लगभग 6 लाख बैरल कच्चा तेल लोड है.
केप्लर के डेटा के मुताबिक, 2 अप्रैल की दोपहर तक यह टैंकर गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचने का संकेत दे रहा था. इस टैंकर के 2 अप्रैल की देर रात से तीन अप्रैल की सुबह तक वडीनार पहुंचने की उम्मीद थी. लेकिन इस टैंकर ने अचानक से दक्षिण की ओर यू-टर्न ले लिया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच, अमेरिका ने 21 मार्च को ईरानी कच्चे तेल पर लगे बैन को एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है. इसका मकसद ग्लोबल ऑयल सप्लाई की स्थिति में सुधार लाना है. साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमत को नियंत्रित करने के ज्यादा से ज्यादा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचने देना है. डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए प्रतिबंध के चलते भारत ने मई 2019 से ईरान से कच्चा तेल खरीदना बंद कर दिया था.
प्रतिबंधित टैंकर्स का रास्ता बदल लेना कोई बड़ी घटना नहीं है. ये पकड़े जाने से बचने के लिए ऐसा करते हैं. लेकिन टैंकर के शुरुआती रूट से पता चलता है कि यह गुजरात के वडीनार के लिए ही निकला था. यदि इसका डेस्टिनेशन चीन होता तो इसका रूट अलग होता. इसके अलावा अमेरिका ने प्रतिबंध भी हटाया हुआ है. इसलिए टैंकर को ऐसी रणनीति अपनाने की जरूरत भी नहीं थी.
हालांकि अभी तक ये साफ नहीं है कि ईरानी तेल लेकर आ रहे टैंकर का खरीददार कौन सा भारतीय रिफाइनर था. केप्लर फर्म में मॉडलिंग और रिफाइनिंग मैनेजर सुमित रितोलिया ने बताया,
टैंकर के रूट में बदलाव का कारण पेमेंट से जुड़ा विवाद लग रहा है. अगर ये विवाद सुलझ जाता है तो जहाज अभी भी भारतीय रिफाइनरी तक पहुंच सकता है. इस घटना से एक चीज साफ है कि चीन को छोड़कर बाकी देशों के लिए ईरान से कच्चे तेल के आयात में लॉजिस्टिक्स एकमात्र समस्या नहीं है. अब उनके कमर्शियल टर्म्स से डील करना भी एक बड़ी चुनौती है.
पिछले कुछ सालों से ईरान के तेल निर्यात का 90 फीसदी हिस्सा चीन के हिस्से जाता रहा है. डॉनल्ड ट्रंप द्वारा प्रतिबंध में छूट दिए जाने के बाद ईरान ने दावा किया कि उसके पास अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को बेचने के लिए कच्चे तेल का एक्स्ट्रा स्टोरेज नहीं है. हालांकि तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स की मानें तो ईरान टैंकर्स में लगभग 140 से 170 मिलियन बैरल तेल टैंकर में मौजूद है. इसमें पहले से बिके हुए और बिन बिके हुए दोनों तरह के टैंकर हैं.
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