ईरान में मानवीय मदद लेकर पहुंचे एक प्लेन पर बड़ा हमला हुआ है. ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने दवा और जरूरी सामान से भरे मानवीय मदद वाले प्लेन पर अटैक किया. यह प्लेन कुछ ही दिनों में भारत आने वाला था, जिस पर 30 मार्च की रात को हमला किया गया. इस महीने की शुरुआत में भारत ने ईरान को दवा समेत बड़ी मात्रा में मानवीय मदद भेजी थी.
ईरान का दवाई ढोने वाला प्लेन भारत आने वाला था, अमेरिका ने मशहद एयरपोर्ट पर ही उड़ा दिया
US-Israel Attacks Iranian Aircraft: ईरान ने इंटरनेशनल संस्थाओं से इस घटना पर तुरंत ध्यान देने, जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाने और सिविल एविएशन के खिलाफ ऐसे खतरों को दोबारा होने से रोकने की अपील की. ईरान ने फिलहाल ने बताया कि Plane पर अटैक से कितना नुकसान हुआ.


समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सूत्रों ने बताया कि यह प्लेन मशहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़ा था, और मानवीय मदद ऑपरेशन के तहत नई दिल्ली के लिए उड़ान भरता. फिलहाल, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. अमेरिका या इजरायल ने भी अभी तक 'महान एयर' के प्लेन पर हमले की बात कबूल नहीं की है.
इंसानी मदद के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लेन पर हमला होने से सिविल और मदद के लिए यूज होने वाले एयरक्राफ्ट की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है. इससे वेस्ट एशिया में और भी ज्यादा तनाव पैदा होने का भी खतरा है. ईरान ने इस बात की जानकारी नहीं दी है कि अटैक से प्लेन को, दवाई के कंसाइनमेंट या मानवीय मदद आदि को कितना नुकसान पहुंचा है.
नॉन-मिलिट्री एयरक्राफ्ट यानी आम लोगों की सेवा में लगे विमानों को इंटरनेशनल कानून के तहत सुरक्षा मिलती है. सुरक्षा के बावजूद एक ह्यूमैनिटेरियन ऐड मिशन पर लगे प्लेन पर हमला चिंताजनक है.

भारत में ईरान की एंबेसी ने अपने बयान में दावा किया कि यह हमला अमेरिका और इजरायल ने किया है. ईरानी एंबेसी ने प्लेन पर हमले की निंदा की और ईरान की सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के हवाले से X पर लिखा,
"दवाइयां और मेडिकल इक्विपमेंट ले जा रहे ईरानी एयरक्राफ्ट पर हमला एक वॉर क्राइम है और इंटरनेशनल कानून का साफ उल्लंघन है. इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन ने कई देशों से ईरान में दवाइयां और मेडिकल इक्विपमेंट ले जा रहे एक ईरानी सिविलियन एयरक्राफ्ट पर इजरायली-अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की, जो मशहद एयरपोर्ट पर उतरा था. ऑर्गनाइजेशन के बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि मानवीय मिशन में लगे सिविलियन एयरक्राफ्ट को निशाना बनाना इंटरनेशनल एविएशन नियमों का खुला उल्लंघन है और मानवीय कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है."

ईरानी एंबेसी ने आगे लिखा,
“शिकागो कन्वेंशन (1944) और मॉन्ट्रियल कन्वेंशन (1971) के अनुसार, सिविलियन एयरक्राफ्ट की सुरक्षा के खिलाफ कोई भी काम एविएशन के क्षेत्र में एक इंटरनेशनल क्रिमिनल ऑफेंस माना जाता है. इसके अलावा, जिनेवा कन्वेंशन के एडिशनल प्रोटोकॉल I के आर्टिकल 52 के तहत, मानवीय मदद ले जा रहे एयरक्राफ्ट समेत सिविलियन चीजों पर हमला एक वॉर क्राइम है.”
सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन ने इंटरनेशनल संस्थाओं से इस काम पर तुरंत ध्यान देने, जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाने और सिविल एविएशन के खिलाफ ऐसे खतरों को दोबारा होने से रोकने की अपील की.
'महान एयर' पर लंबे समय से अमेरिका ने बैन लगा रखा है. वाशिंगटन ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन मानता है और उसका आरोप है कि महान एयर का IRGC से लिंक है. तेहरान इस दावे से इनकार करता है, जिससे हालात और मुश्किल हो गए हैं.
वीडियो: ईरान जंग के बीच महंगा तेल बेच रहा तेहरान, IRGC मालामाल






















