I-PAC पर ED की रेड के बाद हंगामा कोलकाता में था, कुछ वैसा ही नज़ारा कलकत्ता हाई कोर्ट में भी देखने को मिला. मामला जस्टिस सुव्र घोष की बेंच के सामने सुना जाना था. लेकिन कोर्टरूम में इतनी भीड़ और भारी हंगामा था कि सुनवाई हो नहीं पाई. जज ने सुनवाई टाल दी और उठकर चले गए.
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हाई कोर्ट में हंगामे के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में विरोध मार्च निकाला. TMC का कहना है कि केंद्र सरकार 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक बदले की भावना से केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है.
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यह विवाद राजनीतिक सलाह देने वाली संस्था I-PAC के दफ्तर और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर ED की तलाशी से जुड़ा है. लाइव लॉ के मुताबिक, अदालत में भारी हंगामे की वजह से कोलकाता हाई कोर्ट ने ED याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी. याचिका में ED ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी. ED का आरोप है कि आई-पैक पर छापे के दौरान ममता बनर्जी ने जांच में हस्तक्षेप किया. अब इस मामले की सुनवाई 14 जनवरी को होने की संभावना है.
हालांकि, ED शुक्रवार को ही इस पर तत्काल सुनवाई की मांग करने की तैयारी में है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई टलने से नाराज़ ED ने कोलकाता हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल से संपर्क कर मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की. सबसे पहले यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के सामने मौखिक रूप से उठाया गया.
रिपोर्ट में हाई कोर्ट के सूत्रों के हवाला से लिखा गया है कि ED ने यह अनुरोध किया कि यदि जस्टिस सुव्र घोष की अदालत में मामले की सुनवाई संभव नहीं है, तो इसे किसी अन्य न्यायाधीश को सौंप दिया जाए. इस पर मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय ने ED से कहा कि वह अपनी मांग लिखित रूप में प्रस्तुत करे, जिसके बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा. ED ने लिखित याचिका दाखिल कर एक विशेष पीठ गठित कर मामले की तत्काल सुनवाई कराने का अनुरोध किया.
दूसरी तरफ, TMC ने भी हाई कोर्ट में अपनी याचिका दाखिल की थी. TMC ने याचिका में अदालत से अनुरोध किया है कि 8 जनवरी को ED की तलाशी के दौरान जब्त की गई सामग्री के 'दुरुपयोग और प्रसार' पर रोक लगाई जाए. यह तलाशी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 17 के तहत की गई थी. TMC का आरोप है कि ED ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़ा बेहद संवेदनशील राजनीतिक डेटा गैरकानूनी तरीके से अपने कब्जे में ले लिया.
इस पूरे ड्रामे के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में विरोध मार्च निकाला. इस मार्च में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, मंत्री, सांसद, विधायक और बड़ी संख्या में पार्टी समर्थक शामिल हुए. ममता बनर्जी ने 8बी बस स्टैंड इलाके से मार्च की शुरुआत की. इस दौरान केंद्र की बीजेपी सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए और उस पर आरोप लगाया गया कि वह 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक बदले की भावना से केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है.
यह रैली हाजरा मोड़ की ओर बढ़ी. यह विरोध प्रदर्शन उस घटना के एक दिन बाद हुआ है, जब गुरुवार को ममता बनर्जी ED की तलाशी के दौरान अचानक प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर पहुंच गई थी. ED वहां छापेमारी कर रही थी और इसी दौरान काफी नाटकीय घटनाक्रम भी देखने को मिले थे.
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ED किसी वित्तीय जांच से असंबंधित तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक दस्तावेज, हार्ड डिस्क और गोपनीय संगठनात्मक डेटा जब्त करने की कोशिश कर रही थी. उनका कहना था कि यह पूरी कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और इसका मकसद उनकी पार्टी को डराना और चुनावी तैयारियों में बाधा डालना है.
दूसरी तरफ, बीजेपी वाले भी सड़कों पर नज़र आए. भारतीय जनता युवा मोर्चा ने प्रदर्शन किया. हालांकि, ये प्रदर्शन उतने बड़े स्तर पर नहीं दिखा जितना ममता बनर्जी का था.
वीडियो: छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के हाथ में कौन सी फाइल थी? कोर्ट तक बात पहुंच गई












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