भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने 39 हजार पहियों को बनाने का कॉन्ट्रैक्ट चीन की एक कंपनी को दिया है. अंग्रेजी अखबार इकॉनमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण दूसरे देशों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. जिस कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, उसका नाम ताइझांग इंटरनेशनल लिमिटेड है.
इंडियन रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों के पहिए बनाने का कॉन्ट्रैक्ट चीन की कंपनी को दे दिया!
ये कॉन्ट्रैक्ट ऐसे समय में दिया गया है, जब बीते साल जुलाई में भारत के साथ जमीनी सीमाएं साझा करने वाले देशों की कंपनियों पर इनवेस्टमेंट और सप्लाई को लेकर उल्लेखनीय प्रतिबंध लगा दिए गए थे. ये प्रतिबंध चीन के साथ गलवान घाटी में हुई झड़प और उससे पैदा हुए तनाव को देखते हुए लगाए गए थे.


रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इकॉनमिक टाइम्स को बताया,
"ये पहिए वंदे भारत ट्रेन्स के लिए हैं. ये कॉन्ट्रैक्ट इसलिए देना पड़ा क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पहिए सप्लाई करने वाली दूसरे देश की कंपनियों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है."
रिपोर्ट के मुताबिक, इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 170 करोड़ रुपये है. इसी साल चार अप्रैल को इस कॉन्ट्रैक्ट को खोला गया था. बाद में मई में चीन की कंपनी को ठेका दे दिया गया.
ये कॉन्ट्रैक्ट ऐसे समय में दिया गया है, जब बीते साल जुलाई में भारत के साथ जमीनी सीमाएं साझा करने वाले देशों की कंपनियों पर इनवेस्टमेंट और सप्लाई को लेकर उल्लेखनीय प्रतिबंध लगा दिए गए थे. ये प्रतिबंध चीन के साथ गलवान घाटी में हुई झड़प और उससे पैदा हुए तनाव को देखते हुए लगाए गए थे. चीन की जिस कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, उसे इससे पहले मार्च 2020 में कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था.
चीन की सरकार से कनेक्शनडिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड ने एक कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी का काम भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को रजिस्टर करना था. रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही कंपनियां भारत में इनवेस्टमेंट और सप्लाई कर सकती थीं.
चीन की जिस कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, वो ताइयुआन हेवी मशीनरी ग्रुप का हिस्सा है. इस ग्रुप का संबंध 1950 में चीन द्वारा गठित किए गए हेवी मशीन प्लांट से है. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, इसका संबंध चीन की सरकार से है.
इधर खबरें हैं कि भारतीय रेलवे ने पहिए बनाने के लिए स्वदेशी निर्माण पर फोकस करना शुरू कर दिया है. उसने लोकल लेवल पर भी ट्रेन के पहियों की मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी शुरू कर दी है. रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे के अधिकारी ने बताया कि देश में व्हील मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम डेवलेप करने की जरूरत है और स्वदेशी निर्माता कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज के निर्माण के लिए निवेश करने से पहले ही इसमें आगे की संभावनाएं देख रही हैं.
बता दें कि इंडियन रेलवे ने साल 2019 में नई दिल्ली-कानपुर-प्रयागराज-वाराणसी रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत की थी. वंदे भारत एक्सप्रेस एक सेमी-हाई स्पीड ट्रेन है.
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