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अमेरिका में भारतीय मूल के जज को 10 साल की जेल, डॉलर की हेराफेरी में पकड़े गए थे

टेक्सस में एक जूरी ने केपी जॉर्ज को मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामलों में दोषी पाया है. एक सप्ताह तक उनका मुकदमा चलने के बाद उन्हें सजा सुनाई गई है. केपी जॉर्ज को थर्ड-डिग्री गुंडागर्दी के आरोपों का भी दोषी ठहराया गया था.

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जज केपी जॉर्ज (बीच में) को 10 साल की सजा सुनाई गई है (PHOTO-India Today)

अमेरिका के टेक्सस में एक भारतीय मूल के जज को 10 साल की सजा सुनाई गई है. जज का नाम केपी जॉर्ज है. उन्होंने टेक्सस की फोर्ट बेंड काउंटी में पहला भारतीय मूल का जज बनकर इतिहास रचा था. जज को वित्तीय अपराध (Financial Crime) के लिए मौत की सजा सुनाई गई है. उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया है. कहा गया कि उन्होंने अपने चुनाव अभियान के लिए मिले पैसों का गलत इस्तेमाल किया था. जज केपी जॉर्ज के तार भारत के केरल से जुड़ते हैं. मूल रूप से वो केरल के हैं.

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फॉक्स 24 ह्यूस्टन की रिपोर्ट के अनुसार, फोर्ट बेंड काउंटी, टेक्सस में एक जूरी ने केपी जॉर्ज को मनी लॉन्ड्रिंग के दो मामलों में दोषी पाया है. एक सप्ताह तक उनका मुकदमा चलने के बाद उन्हें सजा सुनाई गई है. केपी जॉर्ज को थर्ड-डिग्री गुंडागर्दी के आरोपों का भी दोषी ठहराया गया था. अमेरिकी कानून के मुताबिक इस अपराध के लिए दो से 10 साल की जेल होती है. फैसले के बाद केपी जॉर्ज को हिरासत में ले लिया गया. लेकिन बाद में उन्हें 20,000 डॉलर (लगभग 18 लाख रुपये) के बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया. अपनी रिहाई की शर्तों के मुताबिक उन्होंने अपना अमेरिकी पासपोर्ट सरेंडर यानी जमा कर दिया है.

जज केपी जॉर्ज 2026 में वापस से फोर्ट बेंड काउंटी जज के पद के लिए चुनाव लड़ रहे थे. जॉर्ज ने फोर्ट बेंड काउंटी जज के तौर पर अपने तीसरे कार्यकाल के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. अमेरिका में काउंटी जज बनने के लिए चुनाव होता है. साथ ही वहां के जज किसी न किसी राजनीतिक पार्टी से भी जुड़े होते हैं. लेकिन मौजूदा जज होने के बावजूद, 3 मार्च 2026 को हुए रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. पांच उम्मीदवारों में वो पांचवें स्थान पर रहे और उन्हें केवल 8.4% वोट मिले. 2024 के आखिर की एक चुनावी चंदा रिपोर्ट से पता चला कि उन पर लगे शुरुआती आरोपों के बाद से, उन्हें मिलने वाला चंदा लगभग बंद हो गया था. उनके मुकदमे के दौरान एक पूर्व सलाहकार की गवाही से यह भी सामने आया कि चंदा जुटाने के लिए तय किए गए कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे. उनके केस की वजह से लोग उन्हें चंदा देने को तैयार नहीं थे.

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इस मुकदमे में प्रॉसीक्यूटरों (सरकारी वकील) ने दलील दी कि केपी जॉर्ज हमेशा से चुनावी कैंपेन के पैसों को लेकर गलत तर्क देते रहे. सहायक डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी कैथरीन पीटरसन ने जूरी सदस्यों को बताया कि वो फाइलिंग में झूठ बोलते रहे और पर्सनल फायदे के लिए कैंपेन के पैसों का इस्तेमाल करते रहे. सरकारी वकील ने आरोप लगाया कि केपी जॉर्ज ने एक राज्य से दूसरे राज्य में पैसे ट्रांसफर किए. सरकारी वकील ने कहा,

‘सबूतों से साफ पता चलता है कि जॉर्ज ने पैसों की हेराफेरी की. जूरी के सदस्यों से आग्रह है कि वे उन्हें दोषी ठहराएं.’

दूसरी ओर केपी जॉर्ज के डिफेंस काउंसिल (वकील) ने यह तर्क दिया कि यह पूरा मामला अधूरे रिकॉर्ड और गलत धारणाओं पर आधारित है. जॉर्ज की कानूनी टीम ने दलील दी कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने अवैध पैसों का इस्तेमाल किया. उनकी ओर से दलील आई कि सरकारी वकील इस मामले में इरादा साबित करने में नाकाम रहे.

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