मथुरा में हुई हिंसा के बाद इंडिया टुडे टीवी चैनल ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया है. इस स्टिंग में मथुरा इंटेलीजेंस यूनिट के चीफ मुन्नी लाल गौर कागजों का एक गट्ठर दिखा रहे हैं. बता रहे हैं ढाई-तीन सौ पेजों में 80 बार रिपोर्ट भेजकर सरकार को मथुरा के बारे में चेतावनी दी. जब जो होता था सरकार को बताया जाता था, लेकिन किसी ने ध्यान न दिया. हिंसा अब हुई लेकिन 23 जनवरी 2015 को सबसे पहले एक छह पन्ने की रिपोर्ट भेजी गई थी. सरकार को ये भी पता था कि आदमी औरत और बच्चे तीन फिट का डंडा और झंडा लेकर कभी भी संघर्ष करने के लिए तैयार हैं. सरकार को अवैध असलहों की जानकारी भी भेजी गई थी. मतलब सरकार को पता था अवैध रूप से हथियार रखे हैं, लेकिन पुलिस को कुछ करने का कोई आदेश ही नहीं मिला.

सब इंस्पेक्टर सुनील कुमार तोमर जिनकी ड्यूटी जवाहर बाग के बाहर लगी थी. उनसे जब पुलिस की नाकामी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा जब हमें कोई ऑर्डर ही नहीं थे तो हमारी नाकामी कैसी? हमें तो पता था कि अंदर अपराधी बैठे हैं, लेकिन हमें कुछ करने को कहा ही नहीं गया. ये भी कहा कि मामला कोर्ट में गया तो इन्हें रोका गया, वर्ना इनके नाम तो पट्टा होने वाला था. 270 एकड़ जमीन बहुत होती है, करोड़ों की कीमत होती है. इसीलिए तो इनके खिलाफ एक्शन नहीं लिया जा रहा था.
समझना चाहें तो ऐसे समझें कि इतनी जमीन अगर रामवृक्ष के गुंडों के हाथ लग जाती तो बहुतों के हित सधते और बहुतों का फायदा होता.