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अमित शाह ने बताया, बीजेपी आईटी सेल की नजर में एंटी नैशनल कौन?

इंटरव्यू में प्रियंका गांधी, एयर स्ट्राइक और कांग्रेस पर भी खुलके बोले बीजेपी अध्यक्ष.

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अब तो अमित शाह भी संसद गुस्साने लगे हैं
पुलवामा अटैक के बाद भारत की एयर स्ट्राइक. फिर उसके पाकिस्तान के जवाब के बाद से भारत-पाकिस्तान में टेंशन अपने चरम पर है. इस माहौल के बीच 1 फरवरी को शुरू हुआ इंडिया टुडे कॉन्क्लेव. यहां पहुंचे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह. उन्होंने भारत-पाकिस्तान टेंशन के साथ ही कई और जरूरी राजनीतिक सवालों के जवाब दिए. पढ़िए उनके इंटरव्यू के अंश-
# पिछले 72 घंटे में देश ने जो देखा उससे क्या मैसेज गया?
उरी की घटना के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और अब एयर स्ट्राइक से इतना संदेश जरूर गया है कि अब देश में नरेंद्र मोदी की सरकार है. हम आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए हैं. पुलवामा के बाद पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ा है. ये हमारी कूटनीति की जीत है. अगर अभिनंदन इतने कम समय में वापस देश आ रहे हैं तो ये भी हमारी डिप्लोमेसी की जीत है.
# इमरान खान कहते हैं सुबूत दीजिए. हम बातचीत को तैयार हैं?
मैं इतना कहता हूं कि सुबूत की बात बाद में. पुलवामा में जो हुआ उसकी निंदा तो पाकिस्तान का प्रधानमंत्री करे. दो शब्द नहीं बोले. कि घटना गलत हुई है. कैसे भरोसा करें हम. जो पहले सुबूत दिए हैं, पहले उस पर कार्रवाई करें.
# विपक्ष सेना और स्ट्राइक पर राजनीति कर रहे हैं, आप ये कहते हैं. येदियुरप्पा ने 28 में 22 सीटें बातें करने की बात की?
येदियुरप्पा ने जो कहा वो उन्हें नहीं कहना चाहिए था. उन्होंने खेद भी जताया है. पर आप लोगों को मनमोहन सिंह का वो बयान नहीं दिखता है. जिसमें वो कहते हैं - दोनों देशों को संयम बरतना चाहिए. दोनों देशों को पागलपन नहीं करना चाहिए. आप क्या इक्वेट कर रहे हैं. भारत और पाकिस्तान की तुलना हो ही नहीं सकती. एक आतंकवाद फैलाने वाला देश है. एक अपनी आत्मरक्षा में कार्रवाई करने वाला देश है. दोनों को एक प्लैटफॉर्म में कैसे रखा जा सकता है. मीडिया को भी ये दिखाई नहीं पड़ता. और क्यों नहीं दिखाई पड़ता. पूरे 3 दिन में पाकिस्तान मीडिया के चेहरे में मैंने हंसी देखी है तो ये 22 दलों के रेजोल्यूशन के बाद देखी है. ऐसा क्या रिजॉल्व कर दिया कि पाकिस्तान में आनंद का वातावरण हैं. जब पूरा विश्व भारत के साथ है, तो यहां से क्यों आवाजें निकल रही हैं. हम भी विपक्ष में रहे हैं. हमने सरकार का हमेशा समर्थन किया है.
# 26/11 के बाद आपने भी तो होर्डिंग लगवाईं थीं कि अगर मजबूत सरकार चाहिए तो बीजेपी चुनें?
इस पर शाह बोले कि वो हमने चुनाव के वक्त लगवाया था. घटना के वक्त नहीं. और ये चुनाव में उठना भी चाहिए. चुनाव में देश की सुरक्षा मुद्दा नहीं होगा. मगर जब घटना हुई तो हमने विरोध नहीं किया. हमारा इतिहास उठा के आप देख लो. हमने 1971 के वक्त क्या स्टैंड लिया था. जनसंघ का स्टैंड 1965 के युद्ध के वक्त देख लीजिए.
# विपक्ष पूछता है कि सरकार से सवाल पूछना क्या ऐंटी नैशनल होना है. क्या पुलवामा हमले में इंटेलिजेंस फेलियर नहीं था. बीजेपी और सरकार जवाब दे?
देखिए सवाल पूछने में कोई दिक्कत नहीं है. सवाल पूछने के फोरम होते हैं. पूछने का समय होता है. अभी हमारा जवाब देना भी बाकि है. वो मानते हैं कि हम जवाब देंगे ही नहीं. इसीलिए उन्होंने शुरू से ही पॉलिटिक्स शुरू कर दी. हमारा जवाब देना बाकि है. दुनिया को हमारा तथ्य बताना बाकि है. विदेश विभाग को दुनिया भर से संपर्क करना है. उस वक्त आप सवाल कर रहे हैं. और सवाल क्या कर रहे हैं वो. क्या आपके समय कोई आतंकवादी घटना नहीं हुई. और सवाल तो मैं करता हूं कि तब आपने जवाब क्यों नहीं दिया. देश की जनता आपसे सवाल पूछती है. 26/11 के बाद आपने जवाब क्यों नहीं दिया. आपने क्या किया. सवाल ये है.
# मनमोहन सिंह सरकार मानती थी कि एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान नहीं बदलेगा. बातचीत का रास्ता ही ठीक है. उनका कहना है कि आपने भी तो हमला कर लिया तो कौन सा पाकिस्तान बदल गया?
तो बातचीत से भी कौन सा बदल गया. आपने भी तो 10 साल बातचीत की. एकतरफा मरते जाएं. क्या रणनीति है ये. हो सकता है मनमोहन सिंह मुझे ज्यादा समझदार हों, मुझसे अच्छा ही सोचते होंगे देश के लिए. पर मैं नहीं समझ पाया कि एक के बाद एक घटनाएं होती जाएं. और आप बातचीत की बात करते रहो.
# बातचीत से नहीं निकलेगा, एयर स्ट्राइक से नहीं निकलेगा तो निकलेगा कैसे?
ये मुझे नहीं मालूम. मगर आतंकवाद फैलाने वाले. इन पर दबाव, खौफ बढ़ा है कि उन्हें जवाब मिलेगा. एकतरफा नहीं चलेगा.
# इस वक्त जो सरकार चला रहे हैं, उनमें नरेंद्र मोदी हैं, अमित शाह हैं, अजीत डोवाल हैं. मगर फिर भी पाकिस्तान में हाफिज सईद, मसूद अजहर खुलेआम जिंदा घूम रहे हैं. ऐसा क्यों?
इतना करा तो ही आप लोग इतने सवाल दाग देते हो. अगर मसूद अजहर पर कुछ ज्यादा किया तो आप लोग क्या करोगे. हमने आतंकवाद को कठोरता से डील किया है. आजादी के बाद से किसी भी सरकार से ज्यादा अच्छा और कठोर रहा है हमारा रुख आतंकवाद के लिए. सबसे ज्यादा आतंकवादी हमारे समय में मारे गए हैं. और हो सकता है कि लोग पूछें कि इससे क्या हासिल हुआ. मैं यही कहना चाहता हूं. कि 20 साल से एक अघोषित युद्ध भारत से लड़ा जा रहा है. आतंकवादियों को आगे करके. ऐसे में इनको जवाब नहीं दिया जाना गलत है.
#विपक्ष को लग रहा है कि ये टेंशन सब इसलिए की जा रही है कि चुनाव से पहले लोगों का घ्यान नौकरी, बिजली, सड़क, पानी जैसे मुद्दे से भटकाया जा सके? क्योंकि तीन राज्यों में बीजेपी हार गई है, इसलिए नैशनल सिक्योरिटी को मुद्दा बनाकर लोगों को भटकाया जा रहा है?
विपक्ष का क्या कहना है कि क्या पुलवामा हमने करवाया है क्या. उसके बाद जो हुआ, उस पर सवाल उठ रहे हैं पूछने पर शाह बोले. हम तारीख नहीं तय करते हमले की. हम सिर्फ इतना कहते हैं कि जब भी हमला होगा, हम जवाब देंगे. ये हमारी सरकार की नीति है.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अमित शाह.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अमित शाह.

#पीएम ने कल कहा कि अभी तो केवल पायलट प्रोजेक्ट था, मेन प्रोजेक्ट तो आना अभी बाकि है?
मैं मानता हूं कि दो हमलों से उधर पूरा संदेश गया है. हमने शांति का भी मौका दिया था. मगर उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया. उस वक्त भी विपक्ष चीखा था कि क्यों पहुंच गए वहां. हम तो आपके बातचीत के प्लान को ही लेकर बढ़े थे. मैं मानता हूं कि पहले एक बार शांति का प्रयास करना ठीक है. मगर जब वो सुधर ही नहीं रहे तो क्या कर सकते हैं. जवाब देना पड़ेगा. और जवाब मोदी जी ने दृढ़ता से दिया है, जवानों ने वीरता से दिया है. और ऐसे ही देंगे.
#2019 का चुनाव आपके हिसाब से किस मुद्दे पर लड़ा जाएगा. नैशनल सिक्योरिटी, आतंकवाद, पाकिस्तान से टेंशन या फिर डोमेस्टिक इशूज?
ढेर सारे इशूज होंगे. चुनाव कभी एक मुद्दे पर नहीं लड़ा जाता. हर आदमी के जहन में अलग मुद्दा चल रहा होता है. हर आदमी के मन में एक सवाल होता है. वो हर पार्टी से पूछता है. और पार्टियों को जवाब देना होता है. देना भी चाहिए.
#कश्मीर की समस्या को सुलझाने में पिछले 5 साल में आप ज्यादा कामयाब नहीं रहे?
कोई भी लोकतांत्रिक सरकार या दल ये नहीं मानेगा कि हथियार का उपयोग अंतिम समाधान है. मगर हथियार का उपयोग नहीं करना भी समाधान नहीं है जब सामने से हमला हो रहा हो.
# तो कश्मीर मुद्दा कैसे सॉल्व होगा?
ये इस शो में तो नहीं सॉल्व होगा. एक घंटे में तो नहीं होगा. जो गल्तियां 1947 के बाद जवाहरलाल नेहरू कर गए. वो यहां तो सॉल्व नहीं होगी. इस प्रकार की चीजों पर चर्चा ऐसे प्रोग्रामों में नहीं हो सकती.
# तीन राज्यों के नतीजे आपके लिए कितना बड़ा झटका थे? छत्तीसगढ़ में आपने बोला था 65 आएंगी, 17 आईं. राजस्थान में आपने बोला था 180 आएंगी, 74 आईं. एमपी में आपने कहा था 200 प्लस आएंगी. 109 आईं. क्या कहेंगे इस पर?
लोकतंत्र में हमारी अपेक्षाएं और लोगों की भावना में अंतर निकला. हम स्वीकार करते हैं कि हमारा आंकलन अनुकूल नहीं रहा. हम हारे जरूर हैं मगर तीनों जगह हमारा बेस नहीं खत्म हुआ है. 2019 का चुनाव राष्ट्रीय सरकार चुनने के लिए होगा. इसकी तुलना पिछली मनमोहन सरकार से होगी. इसलिए हमारा पलड़ा काफी भारी है.
# 2014 के चुनाव में फर्क ये है कि अब नए गठबंधन हो गए हैं. माया-अखिलेश यूपी में साथ आ गए हैं. इससे कितना फर्क पड़ेगा.
इस गठबंधन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. 2017 विधानसभा चुनाव में भी आप लोग कांग्रेस-सपा के गठबंधन को 270 सीटें दिला रहे थे. 27 भी नहीं आईं. चुनाव ऐसे नहीं लड़ा जाता है. हमने चुनाव बस बहुत बारीकी से लड़ना पड़ेगा. पार्टी को इसकी आदत है.
# आपकी सरकार पर आरोप लगा कि आपने सरकारी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया?
ये सवाल पूछने का आपको जरूर अधिकार है. मगर विपक्ष को नहीं है. आपातकाल लगाने वालों को हमसे सवाल पूछने का अधिकार नहीं. जिनके परिवार के मेंबर के अलावा कोई पार्टी का अध्यक्ष नहीं बन सकता. बीजेपी का किसी भी संस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं है. आरबीआई एक्ट के तहत सरकार को सुझाव देने का हक है. सुझाव नहीं लोगे तो कौन जिम्मेदारी लेगा. संसद और जनता के सामने हमें जवाब देना है. दो साल के फिक्स टेन्योर की वजह से सीबीआई डायरेक्टर निरंकुश होते गए. क्योंकि उन्हें लगता है कि कोई छू नहीं सकता. हम इसको कंट्रोल करेंगे.
# आप सीबीआई का इस्तेमाल उनके साथ करते हैं जो आपके विरोधी है, मुकुल रॉय के खिलाफ जांच नहीं होती?
मुकुल रॉय से पूछताछ होने के ढाई साल बाद वो आए हैं. और उनके खिलाफ मुकदमा खत्म नहीं हुआ है. जो मुकदमे मायावती वगैरह के खिलाफ दर्ज हुए हैं उनको हमने नहीं दर्ज किया, आपने(यूपीए ने) किए. उनके खिलाफ अब उन मामलों में सिर्फ जांच चल रही है. हम इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करते. अब जांच चल रही है तो सर्दी में पसीने क्यों छूट रहे हैं.
अमित शाह
अमित शाह

# आपकी जो सोशल मीडिया फोर्स कहती है कि अगर आप हमारे साथ हो तो देशभक्त हो, विरोधी हो तो ऐंटी नैशनल हो?
आप एयरस्ट्राइक पर सवाल खड़ा करोगे तो देश की जनता जवाब मांगेगी. मांगना भी चाहिए. अगर किसी और पार्टी की सरकार है और वो आतंकवाद के खिलाफ स्टैंड लेती है. मैं उसकी आलोचना करता हूं तो जनता मुझसे भी जवाब मांगेगी.
# प्रियंका गांधी की एंट्री हुई. इससे उत्तर प्रदेश में फर्क पड़ेगा?
जहां तक मिसेज वाडरा का राजनीति में एंट्री का सवाल है. तो आपको मालूम नहीं हैं कि वो 12 साल से राजनीति में ही हैं. कई बार कैंपेनिंग कर चुकी हैं. अभी चुनाव हारने के बाद दो साल इधर-उधर बिताएंगे. बाद में कहेंगे री-एंट्री. तो आप कहते रहो. मगर इससे देश की जनता को कोई आस नहीं है. परिवारवाद के दिन समाप्त हो गए हैं.
# बीजेपी के राज में आप माइनॉरिटीज को कहां देखते हैं?
हम माइनॉरिटी, मेजॉरिटी को कुछ मानते ही नहीं हैं.
#आप अपनी पार्टी को इस वक्त कितनी सीटें दे रहे हैं?
सीटों का आंकड़ा देना अभी मुश्किल हैं. मगर इतना कह सकता हूं कि अभी के बहुमत से ज्यादा नंबर के साथ नरेंद्र मोदी की सरकार बनेगी.


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