एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, इंडियन एयरफोर्स ने बम गिराने के लिए ठिकाने भी चुन लिए थे. पाकिस्तान का कब्जे वाला कश्मीर और रावलपिंडी के पास चकलाला में पाकिस्तानी आर्मी का ठिकाना. इन ठिकानों पर बमबारी के लिए चार लड़ाकू विमान और एयरफोर्स के चार जवान. जिन चार पायलटों को इस मिशन पर भेजा जाना था, उनकी तैयारी भी करवाई गई. रूट तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर विजनावस से पूरी तैयारी हुई. पायलटों के पास रहने वाली रिवॉल्वर में गोलियां भर ली गईं. उन्हें नक्शे और पाकिस्तानी करेंसी मुहैया कराई गई. पाकिस्तानी करेंसी इसलिए ताकि सरहद के उस पार इमरजेंसी होने पर मदद मिल सके.
चैनल को जो दस्तावेज हाथ लगे हैं, उनमें स्क्वॉड्रन डायरी के हवाले से ये दावा किया गया है. दरअसल 1999 में वॉर खत्म करने के लिए दिल्ली में इंडिया-पाक के तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह और सरताज अजीज के बीच एक बैठक हुई थी. इंडिया ने पाक से कहा,
'पाकिस्तानी घुसपैठिए करगिल की पहाड़ियों से हटें. LOC को नए सिरे से फिक्स करने की डिमांड को छोड़ा जाए. सेना के कैप्टन सौरभ कालिया समेत 6 भारतीय फौजियों को टॉर्चर करने वाले जवानों को सजा दी जाए.'

12 जून 1999 में जसवंत सिंह और सरताज अजीज के बीच मुलाकात
सरताज अजीज के साथ जसवंत की बैठक फेल रही. सरताज उधर पाकिस्तान लौटे. इधर इंडियन एयरफोर्स ने मीटिंग बुला ली.
आगे पढ़िए स्क्वॉड्रन डायरी में दर्ज पूरी बात,
'12 जून की रात एयरफोर्स हेडक्वॉर्टर से ऑर्डर दिया गया कि 13 जून की सुबह हमले के लिए तैयार रहें. हमने पाकिस्तानी करेंसी अपने पास रखी और अपने घरवालों को चिट्ठियां भी लिख डाली थीं. हमारा उड़ने का प्लान सुबह 6.30 बजे का था. जवान पायलट इस हमले को लेकर एक्साइटेड थे. लेकिन हमें 'अटैक' करने के ऑर्डर नहीं मिले थे. रात 12 बजे इस मिशन को कैंसल कर दिया गया था. स्क्वॉड्रन में हमें तड़के 3 बजे ऑर्डर मिले थे कि हमें हमला नहीं करना है.'पाकिस्तान, चीन उड़ा सकते थे हमारे विमान? पाकिस्तान के पास 1999 में एफ-16 नाम का फाइटर प्लेन था. फ्रांस और चीन में बने क्रोटेल, मिसाइल भी इंडियन विमानों के लिए खतरा हो सकते थे. इंडियन एयरफोर्स इस चीज को जानती थी. इसलिए टोटल 16 फाइटर प्लेन लगाए गए. ताकि बम बरसाने वाले MIG-27 को कवर दिया जाए. MIG-27 फाइटर प्लेन को रावलपिंडी का एयरबेस उड़ाना था. कवर का काम मिला MIG-21 को. MIG-21 के लिए रास्ता साफ करने का काम मिला MIG-29 को.
खैर ये वो मिशन रहा, जो पूरा नहीं हो पाया. आखिर में जुलाई 1999 में इंडियन आर्मी ने पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों को पीछे खदेड़ मारा था.























