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प्रचार-प्रसार: उर्वशी ढोलकिया, निदर्शना गोवानी द्वारा आयोजित मकर संक्रांति समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं

वर्ली पुलिस मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम ने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आकर्षित किया और यह एक शानदार सफलता थी.

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(फोटो: विशेष इंतजाम)

फसल उत्सव पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यह एक मस्ती भरा वार्षिक उत्सव है जिसका लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं. पारंपरिक मिठाइयाँ, सर्दियों के व्यंजन, अलाव, उत्सव, पतंग उड़ाना, रंगोली, और दोस्तों और परिवार के साथ मस्ती इस त्योहार की विशेषता है. यह उन सांस्कृतिक उत्सवों में से एक है जो वर्षों से मनाया जा रहा है और आधुनिकीकरण के साथ इसमें मिलावट नहीं हुई है. श्रीमती निदर्शना गोवानी, जो संस्कृति और परंपराओं में दृढ़ विश्वास रखती हैं, हर साल इस परंपरा को कायम रखती हैं और सामुदायिक समारोहों का आयोजन करती हैं. यह आयोजन, लोगों को त्योहार का आनंद लेने में मदद करते हैं. इस वर्ष, मकर संक्रांति के अवसर पर उन्होंने बच्चों के लिए पतंगबाजी का आयोजन किया.

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मौज-मस्ती से भरा यह कार्यक्रम शानदार रूप से सफल हुआ. उर्वशी ढोलकिया इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं. उर्वशी ने इस कार्यक्रम में पतंगबाजी प्रतियोगिता के विजेताओं और सबसे अच्छी पोशाक वाली महिलाओं को पुरस्कार दिए. 'सर्वश्रेष्ठ पोशाक वाली महिला' के पुरस्कार के लिए पारंपरिक महाराष्ट्रीयन पोशाक अनिवार्य थी . यह कार्यक्रम पारंपरिकता का एक शानदार नमूना था . इस कार्यक्रम में भाजपा की प्रवक्ता सुमिता सुमन सिंह और गजाला पठान भी शामिल हुईं.

वर्ली पुलिस मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम ने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आकर्षित किया और यह एक शानदार सफलता थी. इस अद्भुत उत्सव का श्रेय श्रीमति निदर्शना गोवानी के प्रयासों को दिया जा सकता है. यह संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. हमने इस पहल के बारे में उनसे बात की और उन्होंने कहा कि व्यस्त जीवन में त्यौहार धीरे-धीरे आकर्षण खो रहे हैं परन्तु वह हिंदू धर्म के रंगों को जीवित रखना चाहती हैं.

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उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को परंपराओं के महत्व के बारे में जानने की जरूरत है और उन्हें उनकी जड़ों से जोड़ने की जरूरत है. इस दौर में जब आधुनिक खिलौनों ने पतंगबाजी जैसी पारंपरिक खुशियों की जगह ले ली है, बच्चों को उस समृद्ध अतीत से जोड़ने की जरूरत है, जिसमें उनके पूर्वज रहते थे.

इस अवसर के सम्मानित अतिथियों ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं की सराहना की.

सुश्री गोवानी ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करना चाहती हैं जो सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा दें और लोगों को त्योहार का आनंद लेने में मदद करें.

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हम उन्हें उनके व्यापक प्रयासों के लिए बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि परंपराओं के रंग उसी तरह बरकरार रहेंगे जैसे उन्होंने कल्पना की है .

(ये आर्टिकल प्रायोजित है)

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