शशि थरूर को न जाने क्या सूझी. भगत सिंह बता दिए कन्हैया कुमार को. किसी ने भौंहें उछाल कर उनको रोक दिया होगा. नहीं तो खुद को लाला लाजपत राय भी बता देते. राहुल गांधी को आइंस्टीन बता सकते थे. लालू यादव को चार्ली चैपलिन कह सकते थे. थैंक्यू बोलो उनको. वो रुक गए उतने पर ही. नहीं तो न्यूज चैनलों में कंबल बिछा के लेटे रहते पैनलिस्ट. फेसबुक पर #I_am_Falane चल पड़े होते. हमने भी सोचा अपने बारे में. ऊंची भाषा में कहें तो आत्म निरीक्षण किया. फिर मेरे अंदर से आवाज आई कि मैं कार्लमार्क्स हूं. मैंने धांय से शशि थरूर की हां में हां मिलाते हुए फेसबुक पर पोस्ट डाल दिया. फिर तो भाईसाहब गजब हो गया. इतने पुनर्जन्म के किस्से सामने आए हैं कि गिनते गिनते उंगलियां कम पड़ जाएंगी. हम उसका स्क्रीनशॉट लेकर रख लिए हैं. आपको दिखाने के लिए.

अगर इतने इशारों के बाद भी कोई पूछता है मैं कौन हूं, कहां हूं तो उसको नेट समाधि ले लेनी चाहिए.

महारानी विक्टोरिया अगर फेसबुक से बाहर मिलती तो पूछता मैं. क्या हक था इत्ते साल हमए देश को गुलाम बनाके रखने का?

जिसको लोग भूले हैं वो कोई और नहीं. सबसे बड़ा वाला है.

जिन लोगों के अंदर एक से ज्यादा लोगों की आत्माएं हैं उनका फाउल है.

अब आगे से जिसको आत्मनिरीक्षण करना हो वो नोट कर ले. जो नाम यहां इस्तेमाल किए जा चुके हैं उनको न इस्तेमाल करें.