वहीं एक्सप्रेस ने एक और एयर फोर्स अधिकारी के हवाले से छापा है कि एयर फोर्स ने वो हथियार यूज किए जो ठीक निशाने पर जाकर लगते हैं और इसमें आसपास जानमाल का नुकसान नहीं होता है. वहीं इस स्ट्राइक में भी हुआ है. अधिकारियों ने ये भी कहा है, "अगर बालाकोट की जगह मुज्जफराबाद टारगेट होता तो सिविलिन्स को बचाना थोड़ा मुश्किल होता क्योंकि ये घनी आबादी वाला इलाका है. ऐसे में लोगों को उस जगह से निकालना पड़ता है ताकि टारगेट को सटीकता से हिट किया जा सके." इससे पहले 4 मार्च को एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा था कि अगर हमने टारगेट को हिट करने का प्लैन बनाया तो हमने वो सफलतापूर्वक किया. अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो पाकिस्तान जवाब देने की क्यों सोचता.पता चल गया है कि पाकिस्तान में जैश के ठिकाने पर IAF ने जो बम दागे, उनमें कितना बारूद था
सूत्रों के मुताबिक आतंकी अड्डे तबाह हुए हैं.
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अभी भी क्लियर नहीं है कि बालाकोट में कितना नुकसान आतंकी कैंपों को हुआ है.
26 फरवरी से तमाम खबरों के बीच एक खबर ये घूम रही है कि इंडियन एयर फोर्स की एयर स्ट्राइक में आतंकी ठिकानों को कोई नुकसान नहीं हुआ है. पाकिस्तानी आर्मी कुछ इंटरनेशनल मीडिया और अपने देश के पत्रकारों को ठिकाने के पास ले गई जहां ये रिपोर्टिंग हुई कि जैश ए मोहम्मद की मदरसा से करीब एक किलोमीटर दूरी पर इंडियन एयर फोर्स ने बम गिराए जहां सिर्फ कुछ एक पेड़ गिर गए और बाकी कोई नुकसान नहीं हुआ है. अब इसी सवाल के जवाब ढूंढते इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक रिपोर्ट छापी है. उसमें सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इंडियन एयर फोर्स की एयर स्ट्राइक में हरेक वॉरहेड में 70-80 किलो टीएनटी के बराबर विस्फोटक था. वॉरहेड माने किसी बम का वो हिस्सा, जिसमें बारूद भरा होता है. रिपोर्ट में लिखा है कि नेट एक्सप्लोसिव क्वांटिटी से ही तय होता है कि टारगेट को कितना नुकसान होगा. सैटेलाइट से मिली तस्वीरों में ये साफ है कि जैश के आतंकी ठिकानों को नुकसान हुआ है. इसी रिपाोर्ट में ये भी लिखा है कि इंडियन एयर फोर्स ने इस्राइली स्पाइस 2000 प्रीसीजन- गाइडेड म्यूनिशन का इस्तेमाल किया है. इसका मतलब होता है कि किसी टारगेट को भेदती बारूद के गोले और इनका वजन करीब 907 किलो का आंका गया है. यहां एयर फोर्स से सूत्रों ने अखबार को ये भी बताया है, "किसी भी टारगेट पर स्ट्राइक का कितना नुकसान होगा वो इस बात पर भी डिपेंड करता है कि कितना एक्सप्लोसिव यूज हुआ, वॉरहेड किस डिजाइन के थे, बारूद कैसा था, किस दिशा में गोले दागे गए, इनकी पैकिंग और कवर कैसे थे और एक्सप्लोसिव के साथ क्या मिलाया गया था. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि जब हवा से गोले दागे गए तो वो बिल्डिंग में किस दिशा के साथ अंदर घुसे. इन सब बातों से ही तय होता है कि कितना नुकसान टारगेट को हुआ.
वहीं एक्सप्रेस ने एक और एयर फोर्स अधिकारी के हवाले से छापा है कि एयर फोर्स ने वो हथियार यूज किए जो ठीक निशाने पर जाकर लगते हैं और इसमें आसपास जानमाल का नुकसान नहीं होता है. वहीं इस स्ट्राइक में भी हुआ है. अधिकारियों ने ये भी कहा है, "अगर बालाकोट की जगह मुज्जफराबाद टारगेट होता तो सिविलिन्स को बचाना थोड़ा मुश्किल होता क्योंकि ये घनी आबादी वाला इलाका है. ऐसे में लोगों को उस जगह से निकालना पड़ता है ताकि टारगेट को सटीकता से हिट किया जा सके." इससे पहले 4 मार्च को एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा था कि अगर हमने टारगेट को हिट करने का प्लैन बनाया तो हमने वो सफलतापूर्वक किया. अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो पाकिस्तान जवाब देने की क्यों सोचता.
वहीं एक्सप्रेस ने एक और एयर फोर्स अधिकारी के हवाले से छापा है कि एयर फोर्स ने वो हथियार यूज किए जो ठीक निशाने पर जाकर लगते हैं और इसमें आसपास जानमाल का नुकसान नहीं होता है. वहीं इस स्ट्राइक में भी हुआ है. अधिकारियों ने ये भी कहा है, "अगर बालाकोट की जगह मुज्जफराबाद टारगेट होता तो सिविलिन्स को बचाना थोड़ा मुश्किल होता क्योंकि ये घनी आबादी वाला इलाका है. ऐसे में लोगों को उस जगह से निकालना पड़ता है ताकि टारगेट को सटीकता से हिट किया जा सके." इससे पहले 4 मार्च को एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा था कि अगर हमने टारगेट को हिट करने का प्लैन बनाया तो हमने वो सफलतापूर्वक किया. अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो पाकिस्तान जवाब देने की क्यों सोचता.Add Lallantop as a Trusted Source

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