प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या वह हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन मानते हैं या नहीं? इस पर राजनाथ मुंह पर हाथ रखकर अपने बगल में बैठे शख्स से पूछने लगे और फिर छोटा सा जवाब दिया, 'हां.' फिर पत्रकार ने कहा कि गृह मंत्रालय की लिस्ट में इस संगठन का नाम क्यों नहीं है? इस पर राजनाथ बोले, 'अच्छा' और फिर खिलखिलाकर हंस दिए.
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फर्जी अकाउंट से आए नए ट्वीट्स. लल्लन इसे पहले ही फर्जी बता चुका है.
राजनाथ की पुलिस को 'सच्चाई' पता है, राजनाथ को नहीं पता
11 फरवरी को thelallantop.com ने सबसे पहले इस खबर को लोगों तक पहुंचाया था कि हफीज़ सईद के ट्वीट्स फर्जी हैं और ये पूरा का पूरा अकाउंट फर्जी है.
हफीज़ सईद की फर्जी ट्विटर अकाउंट की न्यूज़
ये खबर सब तक पहुंचाने की पूरी कोशिश की थी कि हफीज़ सईद के जिस अकाउंट से ये ट्वीट किये जा रहे हैं और 'न्यूज़ चायनलों' पे भी सटासट चिपकाये जा रहे, वो फर्जी है. लेकिन शायद राजनाथ सिंह के पास टाइम की कमी थी या हो सकता है सरकारी इन्टरनेट स्लो चल रहा हो. वो जो भी हो, लेकिन किसी भी घटना पर ये दावे करना कि उसे हफीज़ सईद के इशारों पर चलाया जा रहा है, एक बड़ी बात है. और इससे पहले सारी बातों को पक्का-पोढ़ा कर लेते तो काफी बेहतर होता. कम से कम किसी को देश के गृह मंत्री के ऊपर हंसने का मौका तो न मिलता. वैसे 12 फरवरी को दिल्ली पुलिस खुद हफीज़ सईद के फर्जी अकाउंट से किये ट्वीट को दिखा चुकी थी और ये चेता चुकी थी कि ऐसे बकलोलों की बातों में न आओ तो सेहत के लिए अच्छा रहेगा.

दिल्ली पुलिस का ट्वीट.
सन्डे को हुई इस प्रेस कांफ्रेंस में राजनाथ सिंह से एक और सवाल पूछा गया. इसका वीडियो भी फेसबुक और ट्विटर पर दौरे कर रहा है. लोग खूब मौज ले लेकर शेयर कर रहे हैं. किसी पत्रकार ने पूछा कि क्या गृह मंत्रालय हफीज़ सईद के संगठन जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन मानता है? इस सवाल पर वो हुआ जो गृह मंत्री से उम्मीद नहीं थी. उन्हें अपने बगल में बैठे हुए लोगों से ये कन्फर्म करना पड़ा कि क्या वाकई जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन माना जाता है. जमात-उद-दावा वो आतंकी संगठन है जिसे हफीज़ ने लश्कर पर बैन लगने के बाद बनाया था. हफीज़ सईद वही मास्टरमाइंड हैं जिसने 26 नवम्बर का खेल इंडिया के खिलाफ़ रचा था. हफीज़ सईद की आवाज़ के सैम्पल पाकिस्तान से मांग-मांग कर इंडिया थक चुका है लेकिन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को ये तय करने के लिए कि क्या हफीज़ सईद आतंकी है, किसी और से पूछना पड़ गया. वो भी मुंह छुपा कर. कन्फर्मेशन के बाद जवाब दो टूक - "है."
अपने फॉलो-अप में पत्रकार ने जब कहा कि क्यूँ गृह मंत्रालय की टेररिस्ट आर्गेनाइजेशन की लिस्ट में से जमात-उद-दावा का नाम ही नहीं है तो बड़ी ही अचरज भरी आवाज़ में वो ऐसे पूछते हैं जिससे ये मालूम चलता है कि उन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं मालूम था. और उसके बाद एक शर्मिंदगी भरी हंसी जो सारी कहानी शीशे की तरह साफ़ कर देती है. सभी पत्रकार भी हंस पड़ते हैं और बात आई गयी हो जाती है.
पूरी स्टोरी का मॉरल ये निकलता है कि
1. गृह मंत्री को न ही इस बात की कोई भी जानकारी थी कि फलाना ट्वीट जिस अकाउंट से किया गया वो नकली था. 2. हफीज़ सईद के संगठन जमात-उद-दावा को इंडिया ने टेररिस्ट आर्गेनाइजेशन घोषित किया है. 3. इंडिया की टेररिस्ट आर्गेनाइजेशन लिस्ट में जमात-उद-दावा का नाम है या नहीं.
सरकारी फॉलो-अप यानी अपनी लेथन समेटने की कोशिश में एक कोशिश ये ज़रूर की गयी कि गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि राजनाथ सिंह के बयान इंटेलिजेंस इनपुट के दम पर दिए गए थे. लेकिन शायद तब तक बहुत देर हो चुकी थी. लोग फेसबुक और ट्विटर पर मजे ले रहे थे और दिल्ली पुलिस इस बात पर अपना माथा फोड़ रही थी कि आखिर ये इंटेलिजेंस इनपुट उन्हें क्यूँ नहीं मिला? आखिर वो भी तो केंद्र सरकार के इस गृह मंत्रालय के अंडर ही आती है ;)























