प्यूडीपाई ने आतंकी के लिए एक मैसेज दिया है.
न्यूज़ीलैंड के क्राइस्चर्च में हमला हुआ. मस्जिद में 49 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. आतंकी ब्रैंटन टैरंट ने हमला करने से पहले एक वीडियो बनाया. इस वीडियो में उसने कहा -
सबस्क्राइब टू प्यूडीपाई. प्यूडीपाई यूट्यूब पर सबसे ज्यादा सबस्क्राइबर्स वाला चैनल है. स्वीडन से ऑपरेट किया जाता है. आमतौर पर फनी वीडियोज बनाता है. इस लड़ाई के बारे में और ज्यादा जानने के लिए
यहां पढ़िए. अब प्यूडीपाई ने इस आतंकी के लिए कुछ कहा है. ट्वीट कर लिखा है-
अभी-अभी न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में विनाशकारी हमले के बारे में सुना. उस आदमी के द्वारा अपना नाम लिए जाने में काऱण असहज महसूस कर रहा हूं. मेरा दिल और विचार पीड़ितों, उनके परिवार वालों और इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं.
ट्विटर पर कुछ लोग प्यूडीपाई को हमले का दोषी मान रहे हैं. ये ठीक नहीं है. लेकिन ये भी नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने यूरोपियन या व्हाइट रेस को अपने सबस्क्राइबर्स हासिल करने के लिए नहीं उकसाया. न जाने कितने ही स्टार्स ऐसे हैं जिन्होंने प्यूडीपाई को सबस्क्राइब करने की अपील की. ये साफ़ तौर पर दो नस्लों के बीच का ही विभाजन है. इसे एशियाई बनाम यूरोपियन कहा जा सकता है. कुछ ने इसे व्हाइट वर्सेज ब्लैक समझा हो. ऐसा नहीं है कि सिर्फ प्यूडीपाई ने ही इस मुकाबले को आइडेंटिटी वॉर बनाने की कोशिश की.
ऐसी ही कोशिशें भारत की तरफ से भी की गईं. प्यूडीपाई का मुकाबला टी सीरीज से है. प्यूडीपाई यूरोपियन लोगों से सबस्क्राइब करने की अपील करते रहे वहीं टी सीरीज को नंबर वन बनने के लिए सिर्फ इंडियन ऑडियंस को अपने पक्ष में करना था. और इसका सबसे अच्छा तरीका है राष्ट्रवाद. उन्होंने टी सीरीज को एक प्राइवेट कम्पनी ना मानकर देश से जोड़ दिया. सोशल मीडिया पर #BharatWinsYoutube ट्रेंड हुआ. टी सीरीज के लिए काम करने वाले न जाने कितने ही बड़े-बड़े सिंगर्स ने इसे सोशल मीडिया पर फैलाया. इसका असर भी हुआ. बड़े मार्जिन से पीछे चल रही टी सीरीज अब कुछ हजार सबस्क्राइबर्स से पीछे है. बीच में एक दिन ऐसा भी रहा जब प्यूडीपाई इस रेस में पिछड़ गया.

ये रेस मजे के लिए हो सकती है. लेकिन इसका फनी पार्ट कहां ख़त्म होता है ये कोई नहीं जानता. फिर कुछ सनकी सिरफिरे लोग इसे हद से ज्यादा गंभीरता से ले लेते हैं. उसी का नतीजा है क्राइस्टचर्च में मस्जिद पर हुआ हमला. एक खास जाति, पहचान और जगह के खिलाफ कुंठा से भरे कुछ लोगों पर ऐसे कैंपेन का नेगेटिव असर पड़ता है, जिसका नतीजा दुनिया देख ही चुकी है. प्यूडीपाई ने इस हमले पर खेद जताकर ये साफ़ कर दिया है कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं कि सबस्क्राइबर्स का ये वॉर इस हद तक पहुंच जाएगा. उनका इतना कहना इस सनक को शायद थोड़ा काम करने में मदद करे.
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