ज्ञानवापी मस्जिद परिसर (Gyanvapi Masjid) में श्रृंगार गौरी की नियमित रूप से पूजा करने की मांग वाली याचिका को सुनवाई के लायक मानने पर मुस्लिम पक्ष ने गहरी नाराजगी जाहिर की है. मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी 'अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी' ने वाराणसी कोर्ट के फैसले को कानून का उल्लंघन करार दिया है और कहा है कि वे इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट जाएंगे.
'संसद-कोर्ट आपके, लोग बिक गए', ज्ञानवापी पर कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने जताई नाराजगी
मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे. कहा कि कोर्ट का फैसला ठीक नहीं है.


अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने हिंदू पक्ष के दावे के खिलाफ वाराणसी जिला और सत्र न्यायालय में आवेदन दायर किया था, जिसे खारिज कर दिया गया है. मस्जिद के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने निचली अदालत के आदेश पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि 'लोग बिक गए' हैं. उन्होंने कहा,
‘हम इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे, वहां अपील करेंगे. न्यायपालिका आपका है, पार्लियामेंट आपका है, आप संसद के ही फैसले को नहीं मान रहे हैं. आप चाहते हैं कि लोग बिक जाएं. आपका फैसला ही ऐसा है, आदेश ही ऐसा है. कोर्ट ने जो भी आदेश दिया है वो न्यायोचित नहीं है. लेकिन जज ने अपने विवेक से फैसला लिया है हम उसका मान करते हैं.’
सिद्दीकी ने कहा कि वाराणसी कोर्ट का यह आदेश उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के खिलाफ है.
साल 1991 का ये कानून अयोध्या की राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के संदर्भ में बनाया गया था. इसमें ये प्रावधान किया गया है कि साल 1947 में देश के धार्मिक स्थलों की जैसी 'धार्मिक स्थिति' थी, उसे जस का तस बरकरार रखा जाएगा. यानी कि धार्मिक आधार पर पूजा स्थलों में परिवर्तन नहीं किया जाएगा.
क्या है ज्ञानवापी मामला?पिछले साल अगस्त महीने में राखी सिंह नाम की दिल्ली की एक महिला और चार अन्य महिलाओं ने वाराणसी की निचली अदालत में एक याचिका डाली थी. इसमें उन्होंने मांग की थी कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के भीतर श्रृंगार गौरी और दूसरी मूर्तियों की नियमित पूजा करने की इजाजत दी जाए.
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि देवी-देवताओं की मूर्ति प्लॉट नंबर 9130 में है, जो विवादित नहीं है. साथ ही अदालत से सर्वे कराने की भी मांग की गई थी. याचिकाकर्ता महिलाएं एक दक्षिणपंथी समूह विश्व वैदिक संस्थान संघ से जुड़ी हुई हैं.
बाद में कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वे का आदेश दिया था, जो कि 16 मई को पूरा हुआ. हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इस पूरी कार्यवाही पर आपत्ति जताई और मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस मामले को जिला स्तर पर किसी सीनियर जज द्वारा सुना जाना चाहिए. जिसके बाद कोर्ट ने मामले को वाराणसी सिविल जज (सीनियर डिविजन) से वाराणसी के जिला जज के पास ट्रांसफर कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वे पहले वाराणसी जिला अदालत के आदेश का इंतजार करेंगे, इसके बाद उसमें वो हस्तक्षेप करेंगे.
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