मौत के बाद प्रदर्शन करते परिवार वाले और रोती हुई इसराइल की बेटी. (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)
"मेरे पापा को वापस लौटा दो...हमलोग कहीं दूर चले जाएंगे... खुशी से रहेंगे."
इसराइल खान की बेटी रोते हुए, लोगों से अपने पिता को वापस मांग रही है. 30 साल के इसराइल खान (इशरू खान) की मौत 21 नवंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की गुना पुलिस ने उसी दिन इसराइल को एक केस में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. परिवारवालों ने आरोप लगाया है कि हिरासत में 'पुलिस की पिटाई' के कारण उसकी मौत हुई. हालांकि, पुलिस इस तरह के आरोपों से इनकार कर रही है.
पूरा मामला क्या है?इसराइल खान गुना शहर के गोकुल सिंह चक का रहने वाला था. 21 नवंबर की शाम भोपाल में इज्तिमा (धार्मिक कार्यक्रम) में हिस्सा लेकर गुना लौटा. इंडिया टुडे से जुड़े विकास दीक्षित की रिपोर्ट के मुताबिक, वो ऑटो से अपने घर जा रहा था कि बीच रास्ते कुसमौदा पुलिस चौकी के पास से उसे गिरफ्तार किया गया. पुलिस की मानें तो उसके खिलाफ 19 नवंबर को मारपीट के मामले में एक केस दर्ज हुआ था. इसी सिलसिले में पूछताछ के लिए उसे पकड़ा गया था.
रिपोर्ट के अनुसार, गुना के कैंट थाने में इसराइल को ले जाया गया. इसके बाद पुलिस की अपनी कहानी है और परिवार का अलग आरोप है. लेकिन सवाल ये है कि इसराइल को पकड़ा किस मामले में गया था? दरअसल, 18 नवंबर को कैंट इलाके में ही एक व्यक्ति सद्दाम खान के साथ मारपीट मामले में पुलिस की टीम पहुंची थी. पुलिस का आरोप है कि जब वहां टीम पहुंची, तो कुछ लोगों ने गालियां देना शुरू कर दिया और पुलिस की गाड़ी में तोड़फोड़ की, जान से मारने की धमकी दी. पुलिस ने कुछ लोगों पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की, जिसमें इसराइल खान सहित 8 लोगों के नाम थे. इसी केस में पुलिस लोगों को पकड़ रही थी.
इसराइल के घरवालों का कहना है कि जब मारपीट की ये घटनाएं हुईं, तो इसराइल भोपाल में इज्तिमा में था. इसराइल के पिता ने कहा कि वो 21 नवंबर को ही लौटा था. उन्होंने आरोप लगाया कि इसराइल की मौत पुलिस हिरासत में हो गई, उसके शरीर पर जख्म के निशान थे.
'पुलिस ने पैसे मांगे थे'इसराइल की बेटी रोते हुए कहती है,
"मेरे पापा को किसने मारा? किसने तकलीफ पहुंचाई है? बस मेरे पापा को लौटा दो... हम खुशी से रहेंगे. यहां से चले जाएंगे दूर... यहां कभी लौटकर नहीं आएंगे. बहुत दूर चले गए वो..."
मृतक के चाचा ने पुलिस पर पैसे लेने का भी गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने बताया,
"प्रभारी विनोद छावरी ने पैसे मांगे थे. 30 हजार रुपये उसे कल (20 नवंबर को) दिए थे. इसराइल के पिता पैसे थाने पर देकर आए. एक लाख की मांग थी. 70 हजार की फिर व्यवस्था करी थी. पैसे लेकर हम थाने पहुंचते...इससे पहले उन्होंने इसराइल को खत्म कर दिया."
गुना पुलिस ने क्या कहा?पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान इसराइल की तबीयत बिगड़ गई और वो वहीं बेहोश हो गया. पुलिसवाले उसे जिला अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) विनोद सिंह चौहान ने बताया कि मामले में चार पुलिस कॉन्स्टेबल को लाइन हाजिर किया गया है. जांच के बाद दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि, घरवाले पुलिस की इन दलीलों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं. उन्होंने अस्पताल में पुलिस के खिलाफ हंगामा किया. इसके बाद 22 नवंबर को स्थानीय लोगों ने इसराइल के शव को नेशनल हाइवे पर रखकर चक्काजाम किया. परिवार के लोग सभी आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. हंगामे के बाद SP पंकज श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत में आश्वासन दिया कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद इसराइल का पोस्टमार्टम हो पाया. एसपी ने मामले में न्यायिक जांच का भी आदेश दिया है.
MP में हिरासत में मौतें बढ़ींपुलिस हिरासत में मौत के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है. केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021-22 में राज्य में 201 लोगों की हिरासत में मौत हुई. जो उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद सबसे ज्यादा है. साल 2020-21 में मध्य प्रदेश में ये संख्या 163 थी.
इसी महीने सागर जिले में 21 साल के युवक की हिरासत में मौत हुई थी. मृतक कृतेश पटेल पर एक नाबालिग लड़की के अपहरण का आरोप था. कृतेश के परिवारवालों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया था. वहीं, दो महीने पहले इंदौर में एक 19 साल के आदिवासी युवक की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी. उसे पुलिस ने डकैती और दूसरे मामलों में गिरफ्तार किया था. पहले के दोनों मामलों में भी न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे.
दी लल्लनटॉप शो: UP पुलिस की हिरासत में मौतों के लंबे इतिहास को क्यों बदल पाए योगी आदित्यनाथ?