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गुजरात: सरकारी योजना में मुस्लिम महिला को मिला घर, कॉलोनी के लोग रहने नहीं दे रहे

गुजरात के वडोदरा में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत एक मुस्लिम परिवार को मकान एलॉट करने पर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया है. स्थानीय लोगों ने कहा है कि कि हरनी क्षेत्र एक हिंदू बहुल शांतिपूर्ण क्षेत्र है और लगभग चार किलोमीटर की परिधि में मुसलमानों की कोई बस्ती नहीं है. यह 461 परिवारों के शांतिपूर्ण जीवन में आग लगाने जैसा है.

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मुस्लिम महिला को मिली कॉलोनी का विरोध हो रहा है. (फोटो: सोशल मीडिया)

गुजरात के वडोदरा में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत एक मुस्लिम महिला को मकान एलॉट (Gujarat Muslim Woman Flat) करने पर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया है. वडोदरा के हरणी इलाके में मोटनाथ रेजिडेंसी बनाई गई थी. यहां मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 461 मकान बने थे. और पिछले 6-7 सालों से लोग यहां रह रहे हैं.

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इंडियन एक्सप्रेस की अदिति राजा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत एक मुस्लिम महिला को हरनी में वडोदरा नगर निगम (VMC) के मोटनाथ रेसीडेंसी में एक आवास आवंटित किया गया था. महिला उद्यमिता और कौशल विकास मंत्रालय की एक शाखा में काम करती है. हालांकि, उनके वहां जाने से पहले ही इस रेजिडेंसी के निवासियों ने जिला कलेक्टर और दूसरे अधिकारियों को एक लिखित शिकायत भेज दी. जिसमें एक मुस्लिम के वहां रहने पर आपत्ति जताई गई. और उनकी मौजूदगी से होने वाले ‘संभावित खतरे’ और ‘विवाद’ का हवाला दिया गया. अधिकारियों के मुताबिक, वह रेजिडेंसी में एकमात्र मुस्लिम हैं, जिनको मकान आवंटित हुआ है.

इस मुद्दे पर हालिया प्रदर्शन 10 जून को हुआ था. 44 वर्षीय मुस्लिम महिला ने बताया कि विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 2020 में हुई थी. जब स्थानीय लोगों ने CMO को पत्र लिखकर उनके घर के आवंटन को कैंसिल करने की मांग की थी. हालांकि, तब हरणी पुलिस ने सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए और केस बंद कर दिया था.

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एक्सप्रेस से बातचीत में महिला ने बताया, 

मैं वडोदरा के एक मिली जुली आबादी इलाके में पली बढ़ी हूं. और मेरे परिवार ने कभी भी एक जगह इकट्ठा होकर रहने के कॉन्सेप्ट पर विश्वास नहीं किया. मैं हमेशा चाहती थी कि मेरा बेटा एक समावेशी इलाके में बड़ा हो. लेकिन मेरे सपने टूट गए हैं. क्योंकि लगभग छह साल हो गए हैं. और मेरे सामने जो विरोध है उसका कोई समाधान नहीं है. मेरा बेटा अब 12 वीं क्लास में है और इतना बड़ा हो गया है कि वह समझ सकता है कि क्या हो रहा है.भेदभाव उसे मानसिक रूप से प्रभावित करेगा.

इसे 'रिप्रेजेंटेशन इन पब्लिक इंट्रेस्ट'बताते हुए डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, VMC मेयर, VMC कमीश्नर और वडोदरा के पुलिस कमीश्नर को की गई शिकायत में 33 लोगों ने सिग्नेचर किया है. इनकी मांग है कि लाभार्थी को आवंटित आवास को कैंसिल किया जाए और लाभार्थी को किसी दूसरी आवास योजना में ट्रांसफर किया जाए.

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मोटनाथ रेजिडेंसी को-ऑपरेटिव हाउजिंग सर्विसेज सोसाइटी लिमिटेड के मेमोरेंडम में कहा गया,  

मार्च 2019 में एक अल्पसंख्यक लाभार्थी को मकान नंबर K204 आवंटित किया है. हमारा मानना ​​है कि हरणी एक हिंदू बहुल शांतिपूर्ण क्षेत्र है और लगभग चार किलोमीटर की परिधि में मुसलमानों की कोई बस्ती नहीं है. यह 461 परिवारों के शांतिपूर्ण जीवन में आग लगाने जैसा है.

रेजिडेंसी के निवासियों का कहना है कि अगर मुस्लिम परिवारों को रहने की अनुमति दी गई तो कानून व्यवस्था की दिक्कत पैदा हो सकती है. सिग्नेचर करने वालों में से एक ने कहा कि यह VMC की गलती है,  

उन्होंने आवंटन करते वक्त जांच नहीं की. यह आम सहमति है कि हमने इस कॉलोनी में घर इसलिए बुक किए हैं क्योंकि ये एक हिंदू कॉलोनी है. और हम नहीं चाहेंगे कि दूसरे धार्मिक और सांस्कृतिक बैकग्राउंड के लोग हमारी कॉलोनी में रहें.

लाभार्थी के एक नजदीकी पड़ोसी ने कहा कि हालांकि आवासीय कॉलोनी में कई परिवार मांसाहारी भी हैं, लेकिन एक अलग धार्मिक पहचान के विचार ने निवासियों के बीच चिंता पैदा कर दी है. पहचान न बताने की शर्त पर निवासी ने कहा,

हमें अपने पड़ोस में अल्पसंख्यक परिवार के रहने से सहज महसूस नहीं होता. यह सिर्फ़ खाने की पसंद की बात नहीं है बल्कि माहौल की भी बात है.

महिला वर्तमान में अपने पैरेंट्स और बेटे के साथ वडोदरा के दूसरे इलाके में रहती हैं. उनका कहना है.  

मैं सिर्फ इस विरोध के कारण अपनी मेहनत से कमाई गई संपत्ति बेचना नहीं चाहती. मैं इंतजार करूंगी. मैंने कॉलोनी की मैनेजिंग कमिटी से बार-बार समय लेने की कोशिश की. लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया. हालिया विरोध से दो दिन पहले उन्होंने मुझे रखरखाव का बकाया मांगने के लिए बुलाया. मैंने कहा कि अगर वे मुझे निवासी के तौर पर शेयर सर्टिफिकेट देंगे तो मैं इसे देने के लिए तैयार हूं. 

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उन्होंने बताया कि  VMC ने पहले ही सभी निवासियों से 50,000 रुपये मेंटेनेंस चार्ज के तौर पर लिए थे, जो उन्होंने चुका दिए थे. आगे उन्होंने कहा कि वो इस समय लीगल हेल्प ले सकती हैं या नहीं इसका उनको यकीन नहीं है. क्योंकि सरकार ने उन्हें अभी रेजिडेंसी कॉलोनी में रहने से रोका नहीं है.

इधर, कॉलोनी के एक दूसरे निवासी ने लाभार्थी के साथ एकजुटता दिखाई है. उन्होंने कहा कि वे एक सरकारी योजना की लाभार्थी हैं और उन्हें कानूनी प्रावधानों के तहत फ्लैट दिया गया है. रेजीडेंट्स की चिंताएं सही हो सकती है. लेकिन किसी से मिले जुले बिना उसके बारे में धारणा बना लेना सही नहीं है.

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