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मोरबी: ओरेवा कंपनी का जो बोर्ड पुल पर लगा था, उसे पीएम मोदी के दौरे से पहले ढंक दिया गया

गुजरात के मोरबी में जो पुल टूटा है, उसके मरम्मत का ठेका ओरेवा ग्रुप को मिला था.

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मोदी के दौरे से पहले ओरेवा को बोर्ड ढंका गया.

गुजरात के मोरबी में केबल पुल टूटने की घटना की चर्चा हर तरफ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य में हुई इस घटना के बाद सत्तारूढ़ बीजेपी विपक्षी दलों से लेकर आम लोगों तक के निशाने पर है. घटना को लेकर मची गहमागहमी के बीच पीएम नरेंद्र मोदी मंगलवार, एक नवंबर को मोरबी पहुंचे. लेकिन उनके पहुंचने से पहले मोरबी की आम जिंदगी में हलचल मच गई. कहा जा रहा है कि दौरे से ठीक पहले मोरबी की सड़कों और सिविल अस्पताल की मरम्मत की गई. इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं. इसके अलावा उस पुल की तस्वीरें भी वायरल हैं जो रविवार की दुर्घटना में टूट गया. खबर है कि पीएम मोदी के दौरे से पहले इस पुल पर लगे ओरेवा कंपनी के बोर्ड को ढंक दिया गया.

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खबरों के मुताबिक ओरेवा कंपनी को ही 100 साल से भी अधिक पुराने इस पुल की मरम्मत करने का ठेका मिला था. पुल टूटने की घटना के बाद से कंपनी सवालों के घेरे में है और इसके मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है. इस बीच घटनास्थल से जुड़ी तस्वीरें वायरल होती रहीं. इनमें वो तस्वीर भी शामिल रही जिसमें एक शख्स पुल पर लगे ओरेवा कंपनी के बोर्ड को ढकता दिख रहा है.

तस्वीर- आजतक

खैर, दौरे के समय पीएम मोदी के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य गृहमंत्री हर्ष सांघवी और राज्य बीजेपी प्रमुख सीआर पाटिल मौजूद थे. मोदी ने राहत कार्य में लगे लोगों से भी मुलाकात की और स्थिति का जायजा लिया. अस्पताल और घटनास्थल के दौरे के बाद पीएम मोदी मोरबी के एसपी ऑफिस भी पहुंचे थे.

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अंग्रेजों के समय साल 1879 में मोरबी शहर की मच्छू नदी पर यह केबल पुल बनाया गया था. कुछ दिन पहले ही गुजराती नववर्ष के मौके पर इस पुल को पब्लिक के लिए खोला गया था. पिछले छह महीने से इस पुल के नवीनीकरण का काम चल रहा था. ओरेवा ग्रुप (अजंता मैन्यूफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड) को इसकी मरम्मत करने की जिम्मेदारी मिली हुई थी. लेकिन, बीती 30 अक्टूबर को यह पुल टूट गया, जिसमें कम से कम 135 लोगों की मौत हुई है और कई सारे लोग घायल हुए हैं.

अजंता-ओरेवा ग्रुप दुनियाभर में दीवार घड़ी बनाने वाली कंपनी के नाम से मशहूर है. इस कंपनी को CFL बल्ब और ई-बाइक बनाने में भी विशेषतज्ञता हासिल है. भारत के बड़े कारोबारी ओधावजी राघवजी पटेल ने साल 1971 में 'अजंता क्वार्ट्ज' की स्थापना की थी, जो शुरुआत में दीवार घड़ी बनाने का काम करती थी. हालांकि, अब इस फर्म को 'दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी निर्माता कंपनी' के रूप में जाना जाता है.

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