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शादी की खुशी में गोली चलाई, दूल्हे को लग गई

सुनो बाबूजी, गोली बारात में नहीं आती और दूल्हे को नहीं पहचानती.

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फोटो - thelallantop
हिसार है हरियाणा में. गुरुवार को वहां एक ब्याह हो रहा था. अब ब्याह है तो लोग मजे भी खूब करते हैं. लेकिन ब्याह में तमंचे का कौन काम? यहां भी यही हुआ. दूल्हे के जो अजीज मित्र थे. निकाल लिए तमंचा कर दिए फायर. गोली तो बारात में आई नहीं थी. किसी को पहचानती नहीं थी. लग गई दूल्हे को. ऐसा नहीं है कि ब्याह में गोली-कट्टा-तमंचा लहराने से हुई पहली दुर्घटना है. अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में भी ऐसे ही हुआ था. शादी में फायरिंग हुआ था. एक लड़की को गोली लग गयी थी. कुछ दिन अस्पताल में रही. फिर मौत हो गयी. उज्जैन में भी यही हुआ था. शादी में चली गोली, दूल्हे के पिता की मौके पर मौत हो गई थी. https://twitter.com/ANI_news/status/726287402818379776 लेकिन इस बार तो ढेर होशियार बनने के चक्कर में दूल्हा ही निशाने पर आ गया. अब बताइए. क्या हुआ होगा. उस परिवार का हाल. क्या हुआ होगा उस लड़की का हाल. खैरियत है, दूल्हे राजा अस्पताल में भर्ती हैं. और खतरे से बाहर हैं. हिसार के एस.एच.ओ मंदीप सिंह हैं. बोले लड़के के बाबूजी की शिकायत पर केस दर्ज कर दिए हैं.

पर बाबूजी एक बात बताएं. गलती भले लड़के के दोस्त की थी. पर आप क्या तमंचा लेवा के डकैती डालने गए थे? खुशी है? तो पटाखे फोड़वा लो. छुरछुरी जला लो. बंदूक दिखा-दिखा के किसे डरा रहे हैं? या ये दिखाना चाहते हैं कि बंदूक मर्दानगी की निशानी है. और हम तो यूं ही बंदूक लिए फिरते हैं. ये सवाल उन तमाम लोगों से है. जो हर्ष फायर के नाम पर गोलियां दागते हैं. बंदूकें हिंसा की प्रतीक हैं. ब्याह एक अच्छा मौका होता है. ब्याह में खून खराबे की चीज का क्या औचित्य? ये वो ज़माना नहीं है. जब आपको घोड़ी पर चढ़कर बगल में कटार और हाथ में बंदूक लिए बारात लूटने जाना होता है. चीजें सांकेतिक हैं, उन्हें रहने दीजिए. लेकिन ऐसी हरकतें न कीजिए. जिनसे किसी की जान पर बन आए. 


ये स्टोरी शिवेंदु शेखर ने की है, शिवेंदु दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रहे हैं.

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