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चीन की कंपनी ने वापस लिया 7895 करोड़ का इनवेस्टमेंट, भारतीय कर्मचारियों को भी निकाला

चीन की ग्रेट वॉल मोटर (GWM) ने ये फैसला FDI की मंजूरी नहीं मिलने के बाद लिया है. कंपनी एक दशक से भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में कदम रखने की कोशिश कर रही थी.

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ढाई साल से FDI मंजूरी का इंतजार कर रही थी कंपनी (फोटो- GWM)

चीन की ऑटोमोबाइल कंपनी ग्रेट वॉल मोटर (GWM) ने भारत में अपने इनवेस्टमेंट प्लान को वापस ले लिया है. इस प्लान के तहत एक अरब डॉलर (करीब 7,895 करोड़ रुपये) का निवेश किया जाना था. कंपनी ने ये फैसला FDI की मंजूरी नहीं मिलने के बाद लिया है. पिछले ढाई साल से चीन की यह कंपनी भारत सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही थी. निवेश की योजना खत्म करते ही कंपनी ने सभी भारतीय कर्मचारियों को भी तत्काल प्रभाव से निकाल दिया है. कर्मचारियों को तीन महीने की सैलरी दी जाएगी.

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क्या था GWM का प्लान?

दरअसल, कंपनी ने भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में उतरने के लिए एक अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई थी. जनवरी 2020 में एक समझौता हुआ था. इसके तहत अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर (GM) के पुणे के नजदीक तालेगांव प्लांट का अधिग्रहण करना था. कंपनी ने 2020 के ऑटो एक्स्पो में भी हिस्सा लिया था. कंपनी ने दो बार एग्रीमेंट को बढ़ाया भी था. 30 जून 2022 को इसकी समयसीमा भी खत्म हो गई, लेकिन मंजूरी नहीं मिली.

इकॉनमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया, 

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"तालेगांव प्लांट को बेचने के लिए GWM और GM के बीच टर्मशीट 30 जून को एक्सपायर हो गई. लेकिन हमें मंजूरी नहीं मिली. इसलिए दोनों कंपनी ने समझौते को रद्द करने का फैसला लिया. यह योजना ढाई साल से पेंडिंग थी. GWM भारतीय बाजार को लेकर स्टडी और मौके की तलाश जारी रखेगी."

रिपोर्ट के अनुसार ग्रेट वॉल मोटर करीब एक दशक से भारतीय बाजार में कदम रखने की कोशिश कर रही है. कंपनी ने 2014-15 और 2017 में भी भारत में निवेश की कोशिश की थी. हालांकि, सफलता नहीं मिली थी. बाद में, जनवरी 2020 में तालेगांव प्लांट के टेकओवर को लेकर GM के साथ टर्मशीट पर एग्रीमेंट हुआ था.

गाड़ियों को इम्पोर्ट कराने की कोशिश भी नाकाम

बताया जाता है कि जून 2020 में भारत-चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने चीन की कंपनियों के निवेश को लेकर सख्ती अपनाई. इस वजह से GWM का इनवेस्टमेंट प्लान भी अटक गया. अप्रैल 2020 में नए FDI नियम लागू होने के बाद कंपनी दो सालों से मंजूरी पाने में असफल रही. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने भारत में ऑपरेशन के लिए 11 कर्मचारियों को रखा था. लेकिन काम शुरू होने से पहले ही उन्हें निकाल दिया गया है. इस साल मार्च में स्ट्रैटजी डायरेक्टर कौशिक गांगुली ने कंपनी छोड़ दी थी.

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भारत के बाजार में उतरने के लिए कंपनी ने दूसरे प्रयास भी किए. पूरी तरह तैयार गाड़ियों को इम्पोर्ट करने की भी योजना बनाई गई. इन दो सालों में कंपनी ने थाइलैंड और ब्राजील में अपना कोराबार शुरू किया. लेकिन भारत में प्लान सफल नहीं रहा.

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