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अब क्या सच में सस्ता मिलेगा पेट्रोल? सरकार ने 11 राज्यों से शुरुआत कर दी है

क्या इस खास तरह के पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान होगा?

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सांकेतिक तस्वीर (आज तक)

आप अगर पेट्रोल (Petrol) से चलने वाले वाहन का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए बड़ी खबर है. बीती 6 फरवरी से देश के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण (Ethanol) वाले पेट्रोल (ई-20) की बिक्री शुरू हो गई है. फिलहाल 15 शहरों में ये पेट्रोल बिकेगा और सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक पूरे देश में इसकी बिक्री शुरू हो.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इंडिया एनर्जी वीक-2023 में इस बात का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि भारत ने ई-20 पेट्रोल का लक्ष्य तय समय से दो महीने पहले ही पा लिया है. इसकी वजह से भारत को हर साल लगभग 30 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है. इस बीच चर्चा हो रही है कि आखिर ये एथेनॉल ब्लेंडेट पेट्रोल है क्या और इसके फायदे क्या हैं. हम आपको सबकुछ अच्छे से बताते हैं.

एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल होता क्या है?

एथेनॉल एक तरह का बायोफ्यूल है. यानी इसे शुगर कम्पाउंड को सड़ाकर बनाया जाता है. ठीक वैसे ही, जैसे दूध से दही बनाया जाता है. आमतौर पर गन्ने से चीनी बनाने के दौरान इसका प्रोडक्शन होता है. हालांकि, चावल और मक्का जैसे अनाजों से भी इसे बनाया जाता है.

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इसी एथेनॉल को जब पेट्रोल में मिलाया जाता है, तो उसे एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कहते हैं. फिलहाल पेट्रोल में 5 से 10 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जा रहा है.

इस पेट्रोल का इस्तेमाल सभी गाड़ियों में किया जा सकता है. देश में चल रहीं ज्यादातर गाड़ियों के इंजन BS-4 से BS-6 तक के हैं. कंपनियों को पहले ही ई-20 इंजनों वाले वाहन बनाने के आदेश दिए जा चुके हैं.

सस्ता हो सकता है आपका सफर

फिलहाल एथेनॉल की कीमत करीब 60 रुपये प्रति लीटर है. महंगे पेट्रोल में अगर इसका अनुपात बढ़ेगा, तो कीमत पर असर होना तय है. एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से क्रूड ऑयल के इम्पोर्ट पर निर्भरता कम होगी. 'रोडमैप फॉर एथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-2025' के मुताबिक, 2020-21 में भारत ने 45 लाख करोड़ रुपये कीमत का क्रूड ऑयल इम्पोर्ट किया था. पूरे देश में ई-20 प्रोग्राम लागू होने के बाद हर साल करीब 30 हजार करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. अगर इसका फायदा आम लोगों तक पहुंचा, तो आपका सफर सस्ता होना तय है.

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हालांकि, पेट्रोल की कीमत का बड़ा हिस्सा टैक्स का होता है. अभी केंद्र और राज्य मिलाकर 50% से ज्यादा टैक्स लगाते हैं. इस हिसाब से कीमतों में बड़ा फर्क आने की संभावना कम है.
एक बात और. 2014-15 में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन इंस्टीट्युट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने एथेनॉल की एफिशियंसी को लेकर एक स्टडी की थी. इसमें सामने आया कि 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग फ्यूल इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों के माइलेज में औसतन 6% की कमी आई है.

फायदे और भी हैं

मेसाचुसेट्स इंस्टीट्युट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और होन्डा (R&D) की एक जॉइंट स्टडी में सामने आया कि एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड के एमिशन में कमी आई है. फोर-व्हीलर में ये आंकड़ा 30% और टू-व्हीलर में 50% तक है.

गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाता है. इससे कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लक्ष्य में भी दिक्कत आती है. फिलहाल देश में चल रहे कुल वाहनों में से 98% में नॉर्मल पेट्रोल का इस्तेमाल किया जाता है. केवल 2% वाहनों में ही बायोफ्यूल इस्तेमाल होता है. क्योंकि बायोफ्यूल वाहन के इंजन में पूरी तरह जल जाता है, इसलिए इससे प्रदूषण भी कम होता है. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% क्रूड ऑयल आयात करता है. इस फैसले से आयात पर निर्भरता कम होगी.

वीडियो: मास्टरक्लास: विंडफॉल टैक्स क्या है? क्या इससे पेट्रोल-डीजल महंगा होगा और सरकार मालामाल?

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