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गोविंद पानसरे हत्याकांड के इन 6 आरोपियों को जमानत, HC बोला- 'ट्रायल का अंत नहीं दिख रहा'

हाई कोर्ट ने आरोपियों को जमानत देते हुए कहा कि अब तक मुकदमे में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और आरोपी पहले ही पांच साल से अधिक समय तक जेल में रह चुके हैं.

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गोविंद पानसरे को 20 फरवरी 2015 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में गोली मार दी गई थी. (India Today)
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विद्या

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2015 में लेखक और कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले में 6 आरोपियों को जमानत दे दी है. अदालत ने कहा कि आरोपी लंबे समय से जेल में हैं और ट्रायल में कोई खास प्रगति नहीं हुई है. हालांकि, मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह तावड़े की जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी गई है. जस्टिस अनिल किलोर ने आदेश दिया कि तावड़े की याचिका को उपयुक्त बेंच के सामने रखा जाए.

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इन आरोपियों को मिली जमानत-
1. सचिन अंदुरे
2. गणेश मिस्किन
3. अमित देगवेकर
4. अमित बड्डी
5. भारत कुराने
6. वासुदेव सूर्यवंशी

सरकार ने आरोपियों की जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि मामले में गवाहों की गवाही अगले 9 महीनों में पूरी हो जाएगी. लेकिन कोर्ट ने कहा कि अब तक मुकदमे में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और आरोपी पहले ही पांच साल से अधिक समय तक जेल में रह चुके हैं.

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क्या है पूरा मामला?

20 फरवरी 2015 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में गोविंद पानसरे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वे दक्षिणपंथी कट्टरता के मुखर आलोचक थे. प्रॉसिक्यूशन का दावा है कि यह हत्या नरेंद्र दाभोलकर (2013), एमएम कलबुर्गी (2015) और गौरी लंकेश (2017) की हत्याओं से जुड़ी हुई थी. पहले इस हत्याकांड की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही थी, लेकिन बाद में इसे महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) को सौंप दिया गया. जांच एजेंसियों का मानना है कि 2018 के नालासोपारा आर्म्स हॉल केस में गिरफ्तारियां होने के बाद ही इस तरह के हमले बंद हो गए.

प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, केस चार प्रमुख गवाहों पर आधारित है. इनमें से पानसरे की पत्नी ने दो आरोपियों की पहचान की थी और एक अन्य गवाह ने एक आरोपी को पहचाना था. हालांकि, दो गवाह किसी भी आरोपी को पहचान नहीं पाए.

केस की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने माना कि मामला गंभीर है, लेकिन ट्रायल की गति बहुत धीमी है. कोर्ट ने कहा कि कोल्हापुर की अदालत में केस की सुनवाई काफी धीमी हो रही है और ट्रायल के खत्म होने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं है. जस्टिस अनिल किलोर ने कहा – “इस ट्रायल का कोई अंत नजर नहीं आ रहा.”

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