इस मरदूद का नाम है जैकोब्स वैन नीरोप. उमर 51 साल है. करम निरे लड़कपने वाले. चेनु चिनोन सिटी के पेशंट इनके पास आते. कहते. सर. दांत में दर्द है. जबड़ा पिरा रहा है. खाते हैं तो गले में चुभता सा है. या फिर कोई ये भी कहता होगा कि हैं तो हम क्यूट. हंसी भी हमारी सुंदर है. बस दांत जरा से टेड़े हैं. जब निकल रहे थे छोटे में. तो हम अपनी जीभ ठेलते रहते थे. अम्मा समझाती थीं. पर मान जाएं तो हम कैसे.और फिर डॉक्टर साहब क्या करते. लिटा देते पेशंट को. जला देते बल्ब. और लेकर चिमटा औजार हथौड़ी सब. कर देते मूसरई. उखाड़ देते स्वस्थ दांत भी. मरीज मरे बराबर हो जाता. डॉक्टर तसल्ली देते. रोता क्यों है. इंश्योरेंस का पइसा मिलेगा. माटी मिले ऐसे पइसे को. ये हमने खबर लिखते लिखते सोचा. मरीजों ने दो महीने पहले सोचा. पहुंच गए पुलिस के पास. बोले,दारोगा जी, इसको पकड़ लो. ये बदमाश आदमी है. जबरदस्ती दांत उखाड़ पछाड़ देता है. कानून के लंबे हाथ. ले लिए लपेटे में. और प्रेस वाले. उन्हें मसाला मिल गया. जैकोब्स को नाम दिया. डेंटिस्ट ऑफ हॉरर. चला मुकदमा. और कल मिल गई सजा. कित्ती. इत्ती. 8 साल कैदे बामशक्कत. और साथ में जुर्माना भी. 7 लाख 88 हजार रुपये का. अब डॉक्टर चक्की पीसिंग पीसिंग पीसिंग. बत्तीसी भी साथ में ही पीसिंग. (ये स्टोरी दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रहे शिवेंदु ने लिखी है.)
अगली बार किसी डेंटिस्ट से मिलें तो ये खबर सुनाएं
कहानी ‘हॉरर ऑफ डेंटिस्ट’ की, जो अगले 8 साल जेल में बिताएगा.
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अपने यहां डाक साब को भगवान बराबर मानते हैं. सफेद कोट वाले जिंदगी बचाते हैं. जो भगवान की दी है. ये तो हुई मानने की बात. मगर एक डेंटिस्ट ने जो कांड किया. उसके बाद तो डाक साब को शैतान बराबर कहने वाले भी मिल जाएंगे. वैसे मिल तो डेंटिस्ट को डॉक्टर न मानने वाले भी जाते हैं. पर वो कहानी फिर कभी.
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