फ़्रांस में चाकू से हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है (France Knife Attack). वहीं, 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें 2 पुलिस अधिकारी भी शामिल है. वहीं, तीन अन्य अधिकारियों को मामूली चोटें आई हैं. फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने इस हमले को इस्लामी चरमपंथ करार दिया है. उन्होंने कहा है कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा.
फ्रांस में चाकू से हुए हमले को राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया इस्लामी आतंकवाद, एक की मौत, तीन घायल
France Knife Attack News: अधिकारियों ने बताया है कि संदिग्ध ने हमला किया और ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाया. 37 साल के एक अल्जीरियाई नागरिक को हमले के संदिग्ध के रूप में गिरफ़्तार किया गया है. मामले में अब तक क्या पता चला?


इमैनुएल मैक्रों 22 फ़रवरी को एक एग्रीकल्चर फ़ेयर में पहुंचे थे. यहां उन्होंने मीडिया को बताया,
बेशक ये इस्लामी आतंकवाद का काम है. अपराधी एक इस्लामी चरमपंथी था. सरकार इस हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. हमारी धरती पर आतंकवाद मिटाने के लिए वो सब कुछ करेंगे, जो किया जा सकता है.
इससे पहले, फ़्रांस के आंतरिक मामलों के मंत्री ब्रूनो रिटेलो 22 फ़रवरी की रात हमले वाली जगह पर पहुंचे थे. ये हमला फ़्रांस के पूर्वी शहर मुलहाउस में एक बाज़ार के पास हुआ. ये इलाक़ा जर्मनी और स्विटरज़रलैंड की सीमा से सटा हुआ है. फ्रांस के आतंकवाद विरोधी मामलों की जांच करने वाले ऑफ़िस (PNAT) ने मामले की जांच संभाल ली है.
फ़्रांस के मीडिया संस्थान फ़्रांस 24 की ख़बर के मुताबिक़, PNAT के अधिकारियों ने बताया है कि संदिग्ध ने हमला किया और ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाया. बता दें, घटना में जिस व्यक्ति की मौत हुई, उसकी पहचान 69 साल के एक पुर्तगाली नागरिक के रूप में हुई है. इस हमले में तीन लोग घायल हैं. इनमें वो पुलिस अधिकारी भी शामिल था, जिसने हमलावर को रोकने की कोशिश की.
न्यूज़ एजेंसी AP की ख़बर के मुताबिक़, 37 साल के एक अल्जीरियाई नागरिक को हमले के संदिग्ध के रूप में गिरफ़्तार किया गया है. वहीं, न्यूज़ एजेंसी AFP ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि संदिग्ध को न्यायिक निगरानी में नजरबंद रखा गया है. उसे फ़्रांस से निष्कासित करने को लेकर भी बातचीत चल रही है.
इस संदिग्ध व्यक्ति का नाम कट्टरपंथ के लिए चिह्नित लोगों की लिस्ट में था. इस आतंकवाद निगरानी सूची को FSPRT के नाम से भी जाना जाता है. ये संस्थान लोगों पर नज़र रखने और कट्टरपंथ को रोकने के लिए अलग-अलग अधिकारियों से डेटा इकट्ठा करता है. इसे 2015 में शार्ली हेब्दो के दफ़्तरों और एक यहूदी सुपरमार्केट पर हुए हमलों के बाद शुरू किया गया था.
बताते चले, फ़्रांस में चरमपंथी धमकियों के चलते हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है.
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