The Lallantop

चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे माधव सिंह सोलंकी का निधन, मोदी ने इस तरह याद किया

क्या था उनका 'खाम' समीकरण?

Advertisement
post-main-image
माधव सिंह सोलंकी चार बार गुजरात के सीएम रहे. उनका एक रिकॉर्ड आज तक गुजरात की राजनीति में कोई तोड़ नहीं सका. (फाइल फोटो- Social Media)
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता माधव सिंह सोलंकी नहीं रहे. वे 94 साल के थे. चार बार गुजरात के सीएम रहे सोलंकी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त किया. लिखा –
“माधव सिंह सोलंकी जी अद्भुत लीडर थे. उन्होंने दशकों तक गुजरात की राजनीति में अहम भूमिका निभाई. उन्हें समाज की जो सेवा की, उसके लिए उन्हें याद रखा जाएगा. उनके निधन से दुखी हूं. मैंने उनके बेटे भरत सोलंकी जी से बात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं. राजनीति से इतर, माधव सिंह जी पढ़ने के शौकीन थे और कल्चर के प्रति जुनूनी थे. जब कभी भी हम मिलते तो वे मुझसे किताबों के बारे में बात करते थे. बताते थे कि उन्होंने कौन सी नई किताब पढ़ी. हमारी बातों को मैं हमेशा याद रखूंगा.”
राहुल गांधी ने ट्वीट किया –
“माधव सिंह सोलंकी जी के निधन से दुखी हूं. कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत करने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. उनके परिवार और मित्रों के साथ मेरी संवेदनाएं.”
इनके अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारम्मैया और तमाम अन्य राजनेताओं ने दुख व्यक्त किया. सोलंकी का खाम समीकरण माधव सिंह सोलंकी पहली बार 1976 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद 1980, 1985 और 1989 में वे सीएम बने. गुजरात की राजनीति में जीत का एक बड़ा समीकरण उन्हीं की देन माना जाता है. ये समीकरण है - खाम (KHAM). यानी क्षत्रिय (ओबीसी), हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम. यह बात अलग है कि उन्होंने अपने मुंह से कभी ‘खाम’ शब्द का उपयोग नहीं किया. इसी समीकरण के दम पर कांग्रेस ने 1985 के विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 149 सीट जीती थीं. ये ऐसा रिकॉर्ड था, जिसे आज तक गुजरात का कोई सीएम तोड़ नहीं सका. आई रिपीट – कोई भी सीएम नहीं तोड़ सका. 2012 के गुजरात विधानसभा से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों से कहा था कि इस बार हमें किसी भी हालत में माधव सिंह सोलंकी का रिकॉर्ड तोड़ना है. इस चुनाव में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला, लेकिन सोलंकी का वो रिकॉर्ड नहीं टूट सका.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement