1. इंडिया की हार की पहली सबसे बड़ी वजह और कुछ नहीं 273 के टारगेट को हल्के में लेना रही. टीम ने वो कमिटमेंट ही नहीं दिखाई जो फाइनल मैच में इंडिया जैसी बड़ी टीम से दिखनी चाहिए थी. रोहित शर्मा और धवन बैटिंग करने आए और धवन 12 रन बनाकर निकल लिए. अब जिम्मेदारी रोहित के कंधों पर थी, मगर वो अपने टच में दिखे ही नहीं. हालांकि रोहित शर्मा ने 89 गेंदों में 56 रन बना लिए मगर ये एक बेहद कमजोर पारी थी जिसे रोहित ने बेहद खराब तरीके से आउट होकर टीम के लिए फायदे की जगह नुकसानदायक बना दिया. रोहित ने एडम जैंपा को ऐसे खेला जैसे कोई नौसिखिया खेल रहा हो. जब रोहित 51 पर खेल रहे थे तो जैंपा की गेंद पर विकेट कीपर एलेक्स कैरी ने कैच छोड़ा. जब रोहित 53 पर थे तो जैंपा की ही गेंद पर रोहित ने ग्लेन मैक्सवेल को एक आसान कैच दिया जिसे मैक्सी ने छोड़ दिया. यही नहीं, जब रोहित शर्मा 56 पर थे तो वो जैंपा की ही गेंद आगे बढ़ गए और गेंद मिस करने के साथ साथ बैट भी हवा में उछाल दिया और अजीबोगरीब तरीके से आउट हो गए. रोहित शर्मा का यहां आउट होना इंडिया के लिए सीरीज हारना था क्योंकि तब तक इंडिया 5 विकेट खो चुका था.

रोहित ने सिर्फ 4 चौके मारे, ये रोहित शर्मा का स्टाइल नहीं है.
2. हार की दूसरी वजह हैं दिल्ली के लौंडे. अपने होम ग्राउंड पर टीम इंडिया के शिखर धवन, विराट कोहली और फिर ऋषभ पंत ने तो मानो कसम खा ली कि कुछ भी हो, अपने घर दिल्ली में बल्ला नहीं चलाना है. धवन ने 12 रन बनाए, कोहली ने 20 और ऋषभ पंत ने 16 रन बनाए. आज इन भाई साहब ने विकेटकीपिंग सुधारी तो बैटिंग में फिसल गए. चौथे नंबर पर बैटिंग करने का मौका मिला और खुद को एक जिम्मेदार खिलाड़ी साबित करने का एक मौका और छोड़ दिया. इन्होंने नैथन लायन की गेंद पर स्लिप पर खड़े एलेक्स कैरी को आसान सा कैच थमा दिया. ऐसा लगा कि कैच प्रैक्टिस करवा रहे थे.

कोहली और पंत नहीं चले. पैट कमिंस ने पूरी सीरीज में 14 विकेट लिए हैं.
3. अब तक खुद को बढ़िया और जुझारू खिलाड़ी साबित कर चुके विजय शंकर से उम्मीद थी कि वो फाइनल में कुछ खास करेंगे. कम से कम अच्छी पार्टनरशिप ही करेंगे. मगर यहां तो उलट ही हो गया. इन्होंने ने भी एडम जैंपा की गेंद को ऐसे खेला जैसे कैचिंग ड्रिल चल रही हो. गेंद को आसमान में टांग दिया और उस्मान ख्वाजा के पास र्प्याप्त टाइम था कि वो गेंद के नीचे आ जाएं और एक आसान कैच लपक लें. शंकर को इस तरह आउट होता देख इंडियन फैंस के चेहरे उतर गए थे. इंडिया की तरफ से उस्मान ख्वाजा और पीटर हैंड्सकॉम्ब जैसी कोई पारी नहीं दिखी. ख्वाजा ने इस मैच में भी 100 रन बनाए. पूरी सीरीज में 383. हैंड्सकॉम्ब ने जरूरी 50 मारे.

जैंपा की गेंद पर विजय शंकर का ये शॉट बहुत नुकसान कर गया.
4. अभी ठहरिए. इंडिया की हार की एक वजह रवींद्र जडेजा भी हैं. 29 ओवर बीत चुके थे और स्कोरबोर्ड पर 5 विकेट खोकर 132 का स्कोर था. यहां एक भी विकेट गिरने का मतलब साफ था कि इंडिया की पूंछ स्टार्ट हो जाएगी. मगर क्या करते, जडेजा ने तो जैंपा को खेलने के लिए पैर आगे बढ़ा दिया था. पिछला पैर लाइन पर था, अंदर बिल्कुल नहीं. स्टंप आउट दिए गए. वो भी जीरो पर. कुल तीन गेंद खेलीं और लौट गए. इंडिया का स्कोर 132 पर ही 6 विकेट हो गया. ड्रेसिंग रूप में बैठी टीम इंडिया के खिलाड़ियों के चेहरे उतर गए, स्टेडियम में बैठे दर्शक शांत हो गए.

जडेजा को भी बहुत जल्दी थी आज.
5. अब अकेले केदार जाधव और भुवनेश्वर कुमार कहां तक जान मारते. 40 ओवरों में 180 रन बने थे और आस्किंग रेट 10 से भी ऊपर जा चुका था. यानी आखिरी 9 ओवरों में 91 रन इंडिया को चाहिए थे. दोनों के बीच पहले शानदार 50 रनों की पार्टनरशिप हुई फिर ये दोनों इसे और आगे ले गए और 43 ओवरों में स्कोर 200 पार हो गया. दोनों के बीच 91 रनों की शानदार पार्टनरशिप हुई. भुवनेश्वर ने शानदार 46 रन और केदार ने 44 रन बनाए. दोनों टिक चुके थे कि फिर पैट कमिंस ने भुवनेश्वर को बाउंड्री पर कैच करवा दिया और अगले ओवर की पहली ही गेंद पर रिचर्जसन ने जाधव को भी मैक्सवेल के हाथों बाउंड्री पर कैच करवा दिया. और यहां इंडिया के लिए जीत की सारी उम्मीदें भी थम गईं. इंडिया का स्कोर 223 पर 8 हो गया. फिर रिचर्डसन ने शमी को आउट कर इंडिया का नौवां विकेट भी गिरा दिया. 237 पर कुलदीप का विकेट गिरा और इंडिया ये मैच 35 रनों से हार गया. इंडिया के लिए अगर इस मैच में कुछ पॉजिटिव रहा तो वो केदार जाधर और भुवनेश्वर की बैटिंग. उसके अलावा इंडिया बहुत खराब खेली. इसलिए मैच के साथ साथ सीरीज भी हारी.

भुवनेश्वर कुमार और केदार जाधव ही एक राहत थे, मगर जीत नहीं दिला पाए.
























