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फतह-2 हाइपरसॉनिक मिसाइल: ईरान का वो हथियार जिसने अमेरिका-इजरायल की नींद उड़ा दी!

Iran की Fattah-2 Missile ने हालिया जंग में America और Israel को भारी नुकसान पहुंचाया है. Hypersonic होने के कारण इसे US-Israel के Air Defence Systems हर बार रोक नहीं पा रहे हैं.

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अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यकाल में ईरान ने मिसाइल टेक्नोलॉजी में जबरदस्त प्रगति की है. (PHOTO-IRNA)

वेस्ट एशिया की जंग में ईरान की मिसाइल्स ने जबरदस्त तबाही मचाई है. बीते कुछ सालों में ईरान ने हर तरह की मिसाइल तकनीक पर जबरदस्त काम किया है. सबसे अधिक चर्चा फतह-2 नाम की मिसाइल की हो रही है. कहा जा रहा है कि ये वही मिसाइल है जिसने खाड़ी देशों के अमेरिकी सैन्य अड्डों को खूब नुकसान पहुंचाया है. ये एक बैलिस्टिक और हाइपरसॉनिक मिसाइल का कॉम्बिनेशन है. दोनों खूबियां इस मिसाइल को काफी खतरनाक बनाती हैं.

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'फतह' शब्द को देखें तो फारसी में इसका मतलब 'विजेता' (फतह करने वाला) होता है. बीते कुछ सालों में ईरान नें अपनी मिसाइल तकनीक पर काफी मेहनत की है. फतह-2 इसका सबसे अच्छा उदाहरण है. ये एक हाइपरसॉनिक बैलिस्टिक मिसाइल है. यानी इसकी रफ्तार मैक 5 (1 मैक=1234 किलोमीटर प्रति घंटा) या उससे अधिक हो सकती है. ईरान फतह-2 की रेंज 2000 किलोमीटर से ज्यादा बताता है.

यह मिसाइल हाइपरसॉनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) वारहेड से लैस है. ये एक खास तकनीक है जिसमें मिसाइल, ग्लाइड यानी उसपर लगे पंखों को मूव करके उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है.

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हाइपरसॉनिक स्पीड पर ऐसा कर पाना इस मिसाइल को अचूक बनाता है. क्योंकि ऐसा करने से एयर डिफेंस सिस्टम्स इस मिसाइल को रोकने में उतने प्रभावी नहीं रह जाते. फतह-2 में दो तरह के ईंधन का इस्तेमाल होता है. एक सॉलिड और एक लिक्विड फ्यूल.

Exclusive: Iran's Fattah-1 Hypersonic Missile Emerges as a New Threat to  Israeli Defense Systems
फतह मिसाइल (PHOTO-IRNA)

लिक्विड 'हाइड्राजाइन' (Hydrazine) के इस्तेमाल से दो फायदे मिलते हैं. पहला ये कि मिसाइल की स्पीड काफी बढ़ जाती है. दूसरा ये कि टारगेट पर पहुंचने के बाद मिसाइल में बचा फ्यूल भी फटता है. इससे और भी अधिक तबाही होती है.

सॉलिड फ्यूल इसे लॉन्च के बाद पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर ले जाता है. फिर जब ये टारगेट की ओर बढ़ती है, तब इसका लिक्विड फ्यूल सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है. इस कारण ये हाइपरसॉनिक रफ्तार तक पहुंच जाती है. दावा है कि ये मैक 15 की रफ्तार तक जा सकती है.

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ईरान की सरकारी ‘इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी’ (IRNA) के हवाले से कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि फतह-2 मिसाइल ने हालिया जंग में अमेरिका और इजरायल को भारी नुकसान पहुंचाया है. हाइपरसॉनिक होने के कारण इसे अमेरिकन और इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम्स हर बार रोक नहीं पा रहे. अब फतह को समझने के बाद, ये भी जान लेते हैं कि बैलिस्टिक मिसाइल किसे कहते हैं.

बैलिस्टिक मिसाइल

बैलिस्टिक मिसाइल्स फायर होने के बाद सबसे पहले वायुमंडल में काफी ऊंचाई पर या उससे बाहर भी निकल जाती हैं. इसे बूस्ट फेज कहा जाता है. वहां पहुंचने पर इनका बूस्टर बंद हो जाता है. इसके बाद ये अपने टारगेट की तरफ बढ़ना शुरू करती हैं जिसे मिडकोर्स फेज कहा जाता है. ये वापस से वायुमंडल में प्रवेश कर अपने टारगेट पर अटैक करती हैं. इसे टर्मिनल फेज कहा जाता है.

इन मिसाइल्स में पारंपरिक विस्फोटक (Conventional Warhead) के साथ-साथ न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने की भी क्षमता होती है. लेकिन ईरान परमाणु संपन्न देश नहीं है. वहीं न्यूक्लियर पावर वाले देश इससे न्यूक्लियर हमला कर सकते हैं. इसीलिए बैलिस्टिक मिसाइल्स को आज की तारीख में काफी अहम माना जाता है. रेंज के आधार पर देखें तो बैलिस्टिक मिसाइल्स को तीन कैटेगरी में बांटा गया है.

शॉर्ट रेंज: 1000 किलोमीटर से कम रेंज होती है. इन्हें टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल भी कहा जाता है.

मीडियम रेंज: इनकी रेंज 1000-3000 किलोमीटर तक होती है. इन्हें थिएटर बैलिस्टिक मिसाइल भी कहते हैं.

इंटरमीडिएट रेंज: इनकी रेंज 3000-5000 किलोमीटर तक होती है.

लॉन्ग रेंज: इनकी रेंज 5 हजार किलोमीटर से अधिक होती है. इन्हें इंटरकंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) भी कहा जाता है.

फतह-2 के अलावा ईरान के पास खैबर-शेकन, खोर्रमशहर और सेज्जिल जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. वो लगातार अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इनका इस्तेमाल भी कर रहा है. इसके अलावा ईरान के शाहेद-136 ड्रोन्स भी अमेरिका-इजरायल के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं.

वीडियो: खामेनेई के X अकाउंट से ट्वीट के जरिए इजरायल को क्या चेतावनी दी गई?

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