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सूखा, साहूकार के कर्ज के चलते दलित किसान ने लगाई फांसी

यूपी के ललितपुर जिले की घटना है. किसान ने खुद के खेत में की आत्महत्या.

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फोटो - thelallantop
यूपी के ललितपुर जिले में 54 साल के एक दलित आदिवासी किसान ने 23 मार्च को अपने खेत में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. फसल की बर्बादी और कर्ज का बोझ उसकी आत्महत्या की वजह बनी. मौके पर पहुंची पुलिस ने किसान की डेड बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. govind das file photo गोविंद दास सहरिया यूपी के ललितपुर जिले के निवासी थे. पेशे से किसान थे. उनके पास उनकी डेढ एकड़ जमीन थी. जहां फसल उगा कर अपने घर-परिवार का पेट भरते थे. साथ ही गोविंद मनरेगा में भी मजदूरी करते थे. फसल के लिए बीज, खाद जैसी जरूरतों के लिए वो पैसे गांव के साहूकार से लिया करते थे. गांव में तो यहीं नियम होता है. फसल उगाने के लिए किसान साहूकार से पैसे लेते हैं. फसल की कटाई के बाद उन्हें बेच कर पैसे साहूकार को ब्याज सहित वापस करते हैं. ताकि अगले फसल के लिए फिर उधार ले सकें. पिछले चार साल से गोविंद की फसल मौसम की भेंट चढ़ रहा था. कभी सूखा तो कभी ओले की वजह से. इस बार भी सूखे के चलते गेंहू की फसल अच्छी नहीं हुई. ऐसे में साहूकारों से लिए पैसों के बोझ तले लगातार गोविंद दबे जा रहे थे. ऊपर से पैसों के लिए साहूकारों का तगादा अलग. उन्हें चिंता खाए जा रही थी कि वो साहूकारों को पैसे कैसे वापस करेंगे. इसी से दुखी होकर गोविंद ने सुसाइड करने का सोचा. उन्होंने इसके लिए अपना खेत चुना जहां फसल खराब हुई थी. खेत में लगे आम के पेड़ में रस्सी डाली और फांसी लगा ली. गोविंद के परिजनों के मुताबिक उनपर करीब डेढ़ लाख का कर्ज था. और वो बढ़ता ही जा रहा था. सूखे को ध्यान में रखकर किसानों ने खेत में दो कुंए खुदवाए थे. पर वो भी सूख गए. यह सूखा पिछले 25 दिनों में 6 किसानों की जान ले चुका है. गोविंद की आत्महत्या की घटना पर ललितपुर के जिलाअधिकारी ने चुप्पी साध रखी है. गोविंद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहेंगे.

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