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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ऐसा भड़के ट्रंप, सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगा दिया

Donald Trump 10% Global Tariff: यह टैरिफ 150 दिनों से ज्यादा के लिए नहीं लगाया जा सकता. इसकी समयसीमा बढ़ाने के लिए अमेरिकी पार्लियामेंट 'कांग्रेस' की मंजूरी लेनी होगी.

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वाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप. (AP/Allison Robbert)

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर दिए हैं. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भड़के ट्रंप ने सख्ती दिखाते यह कदम उठाया. शुक्रवार, 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट 6-3 के बहुमत से ट्रंप के तमाम ग्लोबल टैरिफ रद्द कर चुका है.

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सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद ट्रंप ने कहा कि टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि कोर्ट के कुछ सदस्यों पर शर्म आ रही है कि उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है. इस बीच उन्होंने फैसले से असहमति जताने वाले तीन जज- जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल एलिटो और ब्रेट कैवनॉ का धन्यवाद किया.

शनिवार, 21 फरवरी को डॉनल्ड ट्रंप ने 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा,

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"यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैंने अभी-अभी ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10 फीसदी टैरिफ पर साइन किया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा."

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने साफ किया है कि भारत के साथ अंतरिम डील के तहत भारतीय सामानों पर 18 फीसदी टैरिफ ही लगेगा.

10 Percent Global Tariff
डॉनल्ड ट्रंप का पोस्ट. (truthsocial.com/@realDonaldTrump)

10 फीसदी टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप ने एक अलग अमेरिकी कानून- ट्रेड एक्ट, 1974 के सेक्शन 122 का इस्तेमाल किया है. यह सेक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी देश पर 15 फीसदी तक टैरिफ लगाने की इजाजत देता है, ताकि 'अमेरिका के बड़े और गंभीर बैलेंस-ऑफ-पेमेंट घाटे' को ठीक किया जा सके.

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हालांकि, यह टैरिफ 150 दिनों से ज्यादा के लिए नहीं लगाया जा सकता. इसकी समयसीमा बढ़ाने के लिए अमेरिकी पार्लियामेंट 'कांग्रेस' की मंजूरी लेनी होगी. दी हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति को इस टैरिफ को लागू करने और जारी रखने के बारे में कांग्रेस से सलाह भी लेनी होती है. अमेरिकी कानून के इस सेक्शन का पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को रद्द करने का फैसला उन टैरिफ पर है, जो ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत एकतरफा तौर पर लगाए थे. इनमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए 'रेसिप्रोकल टैरिफ' भी शामिल हैं. कोर्ट ने फैसले में कहा कि 1977 का कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता. ऐसा केवल कांग्रेस कर सकती है.

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