दीया मिर्ज़ा बॉलीवुड एक्ट्रेस हैं. सोशल मुद्दों पर भी बात करती हैं. हाल ही में वो मुंबई में नागरिकता संशोधन एक्ट ( CAA) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं. उन्होंने महाराष्ट्र में आरे जंगल काटे जाने का खुलकर विरोध किया था. 27 जनवरी को दीया 'जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल' में पहुंची थीं. यहां वो क्लाइमेट इमरजेंसी (जलवायु आपातकाल) पर बात करते हुए स्टेज पर ही फूट-फूटकर रोने लगीं.
दीया मिर्ज़ा को स्टेज पर फूट-फूटकर रोता देखकर लोग ऊल-जलूल बातें कहने लगे
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में दीया जलवायु परिवर्तन पर बात कर रही थीं.


इस वीडियो को एएनआई के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया है.
किसी के दुख-दर्द को समझने से पीछे ना हटें. अपने आंसूओं को बहने से ना रोकें. उसे महसूस करें, उसे सभी हदों तक महसूस करें. ये हमारी ताकत है. ये हम ही हैं और यह परफॉर्मेंस नहीं है.
इसी दौरान एक शख्स आंसू पोछने के लिए दीया को टिशू पेपर देता है, लेकिन वो कहती हैं-
शुक्रिया मुझे पेपर की जरूरत नहीं है.
दीया की बात सुनकर लोग तालियां बजाने लगते हैं. सोशल मीडिया पर ये वीडियो खूब देखा जा रहा है. लेकिन कई लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं. लोग इस वीडियो के नीचे ओवरएक्टिंग और बेस्ट एक्ट्रेस जैसी बातें लिख रहे हैं. कुछ यूजर्स कह रहे हैं कि पर्यावरण की चिंता है तो कार, एसी चलाना बंद कर दें. लैदर की जैकेट न पहनें, वगैरह.
कुछ लोगों ने उनका एक वीडियो खोज निकाला, जिसमें वो ड्राइविंग कर रही हैं और एक्सयूवी चलाने का एक्सपीरियंस बता रही हैं. एक यूजर ने एक रिपोर्ट शेयर की है, जिसके मुताबिक दीया पर काफी वक्त से पानी का बिल पेंडिंग है. बाकी ट्वीट आप नीचे देख सकते हैं.
ये पहली बार नहीं है, जब पर्यावरण संरक्षण की बात पर किसी एक्टर को ट्रोल किया गया हो. प्रियंका चोपड़ा भी इस तरह की ट्रोलिंग झेल चुकी हैं. नबंवर 2018 में उनका एक वीडियो आया था. जिसमें वो लोगों को अपनी अस्थमा की बीमारी की वजह से दिवाली पर पटाखे न चलाने की रिक्वेस्ट करती दिखी थीं. करीब एक साल बाद जुलाई 2019 में प्रियंका की मियामी वैकेशन में पति निक जोनास के साथ कुछ तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिनमें वो सिगार पीती हुईं नजर आई थीं. इसके बाद उन्हें भयंकर तरीके से ट्रोल किया था.
पिछले साल नवंबर में प्रियंका चोपड़ा ने मास्क लगाए हुए एक फोटो शेयर की थी. इस फोटो के शेयर होते ही प्रियंका चोपड़ा को सोशल मीडिया पर काफी मजाक बनाया गया था.
शायद ट्रोल्स के पास इतनी सी समझ नहीं होती कि जो लोग पर्यावरण पर बात कर रहे हैं, उनकी सामान्य जिंदगी भी है. पर्यावरण पर बात कर रहे लोगों में ट्रोल्स को साधु बाबा नजर आते हैं. और वो चाहते हैं कि उन्हें दुनिया की हर सुविधा छोड़कर, कुटिया बनाकर जंगल में बस जाना चाहिए. नहीं तो उनके मुताबिक सब दिखावा है.
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