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तारिषी को याद करिए, उसके दोस्त फराज को सलाम करिए

उसने कुरआन की आयतें सुना दी थीं. आतंकियों ने उसे वहां से भाग जाने का ऑप्शन दिया था. पर वह अपनी दोस्त तारिषी को छोड़कर नहीं गया.

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डेड बॉडी लेने के दौरान रिश्तेदारों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. reuters
आपके व्यक्तित्व का असली इम्तेहान तब होता है, जब आप किसी मुश्किल में फंसे हों.
बांग्लादेश के आतंकी हमले में भारत की तारिषी जैन की जान चली गई. उसे याद करिए, लेकिन उसके दोस्त फराज हुसैन को मत भूलिए. दोस्ती की इस कहानी ने मजहब-वजहब की सारी थ्योरीज फेल कर दी हैं. इंडिया की तारिषी जैन ढाका के उस कैफे में अपने दो दोस्तों के साथ थी. अबिन्ता कबीर और फराज हुसैन. वहां आतंकियों ने चेक करना शुरू किया. मुसलमानों की पहचान के लिए कुरआन की आयतें सुनाने को कहा गया. फराज हुसैन ने आयतें सुना दीं. चाहता तो वो जा सकता था. लेकिन तारिषी और अबिन्ता को छोड़कर जाना उसे गवारा नहीं हुआ. आतंकियों  ने उसे भी मार डाला.
आतंकी तारिषी और अबिन्ता को नहीं छोड़ रहे थे. तीनों स्कूल के दोस्त थे. फराज को वहां से जाने का ऑप्शन दिया था. लेकिन वो नहीं गया. आतंकियों ने देखा कि तारिषी और अबिन्ता वेस्टर्न कपड़े पहने हुए हैं. फराज से उन दोनों के बारे में पूछा कि वो कहां से हैं. फराज ने जवाब दिया तारिषी इंडिया से है और अबिन्ता यूएस में पढ़ाई कर रही है. वो बांग्लादेशी है. बस फिर आतंकियों ने तीनों को मार डाला.
ढाका हमले से पहले कुछ दिन पहले ही फराज हुसैन कोलकाता में था. वह पेप्सिको कंपनी के साथ इंटर्नशिप करने आया था. बीते फ्राइडे की शाम, तारिषी और अबिन्ता ने होली आर्टिसन बेकरी रेस्टोरेंट में मिलने का प्लान बनया. उनका एक और दोस्त यहां आने वाला था. मिराज उल हक. लेकिन वह लेट हो गया. इस वजह से वो अंदर नहीं पहुंच पाया और उसकी जान बच गई. 22 साल का फराज बांग्लादेश के एक अमीर परिवार से था. उसके पिता मोहम्मद वकार बिन हुसैन कई कंपनियों में डायरेक्टर हैं. उसके दादा 'प्रथोम आलो' और 'द डेली स्टार' मीडिया हाउस के मालिक हैं. 2015 में फराज ने ऑक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ एमरी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. 18 मई को ढाका आए थे छुट्टियां मनाने. अगस्त में उन्हें वापस अमेरिका जाना था पढ़ने के लिए. उसके बड़े भाई जरैफ के मुताबिक, ' फराज दूसरों की भलाई चाहता था. इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वो अपने साथियों को छोड़कर रेस्त्रां से बाहर नहीं आया. जबकि आतंकियों ने उसे बाहर जाने के लिए कह दिया था. इस्लाम हिंसा में यकीन नहीं रखता. वह सच्चा मुसलमान था. यह उसने वहां रुक कर साबित कर दिया. वह अपने साथियों को बाहर लाना चाहता था.' आतंकियों ने ढाका के उस रेस्त्रां में 20 लोगों की हत्या कर दी. ज्यादातर विदेशी थे. इनमें तारिषी अकेली इंडियन थी. दो दिन पहले ही ही यूएस से ढाका आईं थीं. ढाका में उसके पिता संजीव जैन 20 साल से गारमेंट बिजनेस कर रहे हैं. फिरोजाबाद में संजीव जैन के तीन भाइयों राकेश, राजीव और अजित का ग्लास फ्लोरिशिंग का कारोबार है.

'टाइगर हमेशा टाइगर रहता है'

बांग्लादेश के बाड़ीधारा इलाके में यूनाइटेड नेशन रोड है. वहां अमेरिकन स्कूल है. फराज, तारिषी और अबिन्ता तीनों ने यहीं से पढ़ाई की. तीनों की मौत के बाद इस स्कूल में उदासी पसरी है. कुछ दिनों के लिए इसे बंद कर दिया गया है. स्कूल ने एक बयान में कहा कि तीनों स्टूडेंट की फैमिली के साथ हमारी दुआएं हैं. उनकी मौत से हमें गहरा सदमा पहुंचा है. स्कूल अपने एलुमनाई को टाइगर कहता है. इसी लाइन के साथ मरने वाले स्टूडेंट के लिए नोटिस बोर्ड पर लिखा गया है 'टाइगर हमेशा टाइगर रहता है.' तारिषी की डेड बॉडी सोमवार को दिल्ली लाई गई. गुरुग्राम में अंतिम संस्कार होगा. यहां तारिष के परिवार का मकान है. अंतिम संस्कार में संजीव जैन के कनाडा, हॉन्ग कॉन्ग और ढाका में रहने वाले दोस्त-रिश्तेदार और नेताओं के पहुंचने की भी उम्मीद है.

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