विश्वास और अंधविश्वास के बीच का फर्क अगर इंसान भूल जाए तो अंजाम बेहद खतरनाक हो सकता है. ऐसा ही हुआ दिल्ली में. एक महिला ने अपने मरे हुए पिता को दोबारा जिंदा करने के लिए दो महीने के मासूम बच्चे का अपहरण किया. फिर बलि देने के लिए तांत्रिक पूजा का पूरा इंतजाम किया. लेकिन इससे पहले कि महिला बच्ची की बलि के नाम पर हत्या कर पाती पुलिस समय पर पहुंच गई. बच्चे की जान बच गई. लेकिन अंधविश्वास का ये मामला गंभीर है.
मरे हुए पिता को जिंदा करने के लिए बच्चे के साथ ये करने जा रही रही थी, फिर पुलिस पहुंच गई!
पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन जो खुलासा हुआ, वो सुन दिमाग सुन्न हो जाएगा.


पुलिस अधिकारियों ने इस केस को लेकर बताया कि थाना अमर कॉलोनी को 10 नवंबर को सूचना मिली कि दो महीने के एक बच्चे का अपहरण किया गया है. इसके बाद मामले की जांच की गई तो पता लगा कि बच्चे की मां से आरोपी श्वेता, सफदरजंग अस्पताल में मिली. जहां आरोपी ने खुद को जच्चा-बच्चा देखभाल के लिए काम करने वाले एनजीओ का सदस्य बताया. फिर 10 नवंबर को घर आकर फ्री में दवा और इलाज कराने का झांसा देकर बच्चे को ले गई.
बच्चे के परिजनों ने पुलिस में शिकायत की. पुलिस ने बच्चे की तलाश शुरू की. इसके बाद पुलिस ने आरोपी श्वेता को पकड़ लिया. दिल्ली के कोटला मुबारकपुर की रहने वाली 25 साल की श्वेता पहले भी डकैती और चोरी के दो मामलों में आरोपी रह चुकी है. श्वेता ने पूछताछ में पुलिस ने बताया,
इसी साल अक्टूबर में उसके पिता की मौत हो गई थी. अंतिम संस्कार के दौरान, उसे पता चला कि एक ही लिंग के बच्चे की बलि देने से उसके पिता को दोबारा जिंदा किया जा सकता है. इसके बाद उसने नवजात लड़के की तलाश शुरू कर दी. फिर 10 नवंबर को उसने अपहरण कर लिया. लेकिन वह बलि दे पाती इससे पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया.
आरोपी श्वेता अपनी मां के साथ रहती है. फिलहाल पुलिस अब मां की भूमिका की भी जांच कर रही है.
अश्वीकरण: इस खबर में बताई गई जानकारी अंधविश्वास से जुड़ी है. नरबलि देना एक कानूनन अपराध है. इस तरह के अंधविश्वास से बचना और बचाना जरूरी है.
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