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BJP विधायकों को जवाब नहीं दे रहे दिल्ली के अधिकारी, स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को चिट्ठी लिखनी पड़ गई

रोहिणी विधानसभा सीट से BJP विधायक विजेंद्र गुप्ता को पार्टी ने विधानसभा में स्पीकर नियुक्त किया है. नई सरकार का गठन हुए अभी महीने भर का समय ही बीता था कि उन्होंने मुख्य सचिव धर्मेंद्र को शिकायत भरा पत्र लिख दिया.

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विजेंद्र गुप्ता ने अधिकारियों पर अनदेखा करने का आरोप लगाया, सौरभ भारद्वाज ने दी प्रतिक्रिया.(तस्वीर:PTI)

दिल्ली विधानसभा के स्पीकर और BJP नेता विजेंद्र गुप्ता ने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कॉल और मैसेज को ‘अनदेखा’ करने का आरोप लगाया है. उन्होंने दिल्ली के मुख्य सचिव को लेटर लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है. इस मसले पर पूर्व कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज की भी प्रतिक्रिया आई है. पूर्व की केजरीवाल सरकार के समय आम आदमी पार्टी (AAP) भी अक्सर दिल्ली के अधिकारियों पर केंद्र सरकार का पक्ष लेकर उनके अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाती थी. अब BJP विधायक भी उसी ‘नौकरशाही मशीनरी’ में खुद को उलझा पा रहे हैं.

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पत्र में क्या कहा?

रोहिणी विधानसभा सीट से BJP विधायक विजेंद्र गुप्ता को पार्टी ने विधानसभा में स्पीकर नियुक्त किया है. नई सरकार का गठन हुए अभी महीने भर का समय ही बीता था कि उन्होंने मुख्य सचिव धर्मेंद्र को शिकायत भरा पत्र लिख दिया. ANI के मुताबिक विजेंद्र गुप्ता ने 19 मार्च को अपने पत्र में लिखा,

“मेरे संज्ञान में कुछ ऐसे मामले लाए गए हैं, जहां माननीय सदस्यों (विधायकों) के फोन कॉल या मैसेजों को संबंधित अधिकारियों ने स्वीकार नहीं किया है. यह एक गंभीर मामला है और मुझे लगता है कि इस संबंध में सरकारी निर्देशों का जल्द से जल्द पालन करने की जरूरत है.”

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नियम क्या कहता है?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक विजेंद्र गुप्ता ने मामले में दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और भारत सरकार के पर्सनल एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट (DOPT) के नियमों का संज्ञान लेने को कहा है. GAD ने साल 2020 में नियम बनाए थे. इनके मुताबिक अधिकारियों को सांसदों और विधायकों के लेटर, फोन कॉल्स, या संदेशों को ‘तुरंत स्वीकार’ करना और ‘जल्दी जवाब’ देना जरूरी है. यानी अधिकारी विधायकों के कॉल्स या संदेशों को अनदेखा नहीं कर सकते. इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों को प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए.

इन नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है. नियम कहते हैं कि सांसदों या विधायकों से मिले हर लेटर या मैसेज को 15 दिनों के अंदर स्वीकार करना पड़ता है और अगले 15 दिनों के अंदर उसका जवाब देना जरूरी है.

BJP विधायकों की शिकायतें

विजेंद्र गुप्ता के अलावा कई अन्य बीजेपी विधायकों ने नाम ना छापने की शर्त पर इन आरोपों की पुष्टि की है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP के तीन विधायकों ने आरोप लगाए हैं कि उनके इलाकों में कुछ अधिकारी नियमित रूप से उनके संदेशों को अनदेखा करते हैं.

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एक बीजेपी विधायक ने कहा कि हर दिन सैकड़ों लोग पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क जैसी समस्याओं के साथ उनके पास आते हैं, जिनके लिए उन्हें अधिकारियों से बात करनी पड़ती है. और ऐसे में वे संदेशों का अनदेखा करेंगे तो काम कैसे होगा. एक अन्य बीजेपी विधायक ने कहा, “अधिकारियों की यह बेरुखी सीधे हमारी जवाबदेही को प्रभावित करती है.”

आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया

दिल्ली सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जो लोग हर मुद्दे पर पहले AAP को सलाह देते थे, आज वे ही इससे परेशान हैं. सौरभ ने अपने ‘एक्स’ हैंडल से पोस्ट किया. इसमें उन्होंने लिखा, “दस साल तक दिल्ली के अफसरों को सिखाया गया कि मंत्री और विधायकों की बात नहीं सुननी. विधायकों और मंत्रियों के फ़ोन नहीं उठाने, चिट्ठी का जवाब नहीं देना. बात बात पर आम आदमी पार्टी को ज्ञान देने वाले आज ख़ुद परेशान हैं.”

AAP नेता ने आगे लिखा है, “अब भाजपा की सरकार बनी तो अफसरों की मनमानी समझ आ रही है. पहले यही भाजपा इन्ही अफसरों की तरफदारी करती थी, अब उन्हें कर्तव्य सिखाया जा रहा हैं. आज भाजपा को समझ आया है कि प्रजातंत्र को कमज़ोर करने से देश और जनता का सिर्फ नुक़सान ही होता है.”

बहरहाल, विजेंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव से अपील की है कि सभी प्रशासनिक सचिव, विभागों के प्रमुख, दिल्ली पुलिस और दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) इन नियमों का पालन करें. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि इस बारे में होने वाली कार्रवाई से उनको अवगत कराया जाए.

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