दिल्ली टेरर मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार रिजवान इब्राहिम मोमिन को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है. अभियोजन पक्ष (Prosecution) कोर्ट में रिजवान के आतंकी संबंधों को साबित करने में नाकाम रहा. महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने कथित आतंकी साजिश के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था. जिनमें रिजवान इब्राहिम मोमिन, मोहम्मद इरफान रहमतअली शेख और एक ऑटो रिक्शा चालक जाकिर हुसैन शेख शामिल है.
दिल्ली टेरर मॉड्यूल केस में कोचिंग पढ़ाने वाले आरोपी रिजवान को हाई कोर्ट ने क्यों दी जमानत?
Maharashtra ATS ने दिल्ली टेरर मॉडयूल मामले में रिजवान इब्राहिम मोमिन, मोहम्मद इरफान रहमतअली शेख और ऑटो रिक्शा चालक जाकिर हुसैन शेख सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी (ATS) ने आरोप लगाया था कि जाकिर हुसैन शेख के छोटा शकील से संबंध हैं. और रिजवान इब्राहिम मोमिन ने शेख को शरण दी थी. और उसका फोन नष्ट करने में मदद की थी. मोमिन पर IPC की धारा 19 के तहत मामला दर्ज किया गया. जिसमें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत तीन साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है.
अप्रैल 2023 में स्पेशल कोर्ट ने मोमिन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस आदेश के खिलाफ मोमिन की अपील स्वीकार करते हुए कहा,
अभियोजन पक्ष यह दिखाने के लिए कोई भी सबूत नहीं पेश कर पाया है कि मोमिन को जाकिर की गतिविधियों के बारे में पता था. या उसने किसी आतंकी गतिविधि में भाग लिया था. या उसके बारे में जानता था.
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि अपीलकर्ता लगभग तीन साल से हिरासत में है. और उसके खिलाफ अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है. कोर्ट के मुताबिक कि मुकदमें में दूसरे आरोपी मोहम्मद इरफान रहमतअली शेख पर एक ही तरह के आरोप हैं. जिसे जमानत मिल चुका है.
जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस गौरी वी गोडसे की बेंच ने 25 जुलाई को ये फैसला सुनाया. जिसकी कॉपी 1 अगस्त को उपलब्ध कराई गई. मोमिन के वकील मुबीन सोलकर ने सह-आरोपी के साथ समानता के आधार पर बेल मांगी थी. जिसे पिछले साल बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी थी.
मुबीन सोलकर ने आगे कहा,
मोमिन छात्रों को कोचिंग पढ़ाता था. उसने जाकिर को एक रात अपने घर पर रुकने की अनुमति दी थी. उसे जाकिर के किसी आतंकी गतिविधि में शामिल होने की कोई जानकारी नहीं थी. उसका कोई आपराधिक बैकग्राउंड भी नहीं है. उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया था.
पुलिस ने जाकिर और मोमिन के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) कोर्ट से शेयर किया था. जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि महज दोनों के बीच कॉल एक्सचेंज के आधार पर किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता.
हाईकोर्ट बेंच ने आगे बताया,
अपीलकर्ता एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता था. और वह कोविड-19 के समय जरूरतमंदों को जरूरी सामान बांट रहा था. और उस समय उसने सामान को लाने ले जाने के लिए जाकिर के ऑटो रिक्शे का उपयोग किया था.
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बेंच ने मोमिन को जमानत देते हुए कहा,
रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और बयानों को ध्यान में रखते हुए हम प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अभियोजन पक्ष ने जिन परिस्थितियों पर भरोसा किया है. उनसे यह साबित नहीं हो पा रहा कि अपीलकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं. इसलिए UAPA की धारा 43-डी (5) के तहत जमानत देने में कोई रुकावट नहीं है.
हाईकोर्ट ने मोमिन को 50,000 रुपए के निजी मुचलके और 50,000 की जमानत राशि जमा करने पर जमानत देने का निर्देश दिया है. उसे मुकदमें के खत्म होने तक हर महीने NIA के मुंबई कार्यालय में आना होगा. और वह हाईकोर्ट की अनुमति के बिना विशेष NIA कोर्ट मुंबई के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकता.
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