पुलिस कहती है इस गैंग मे शामिल ज्यादातर लोग उत्तरप्रदेश के हैं. पर कौन हैं? क्या हैं? कैसे हिप्नोटाइज कर लूट लेते हैं, दइउ जाने प्रितिमा देवी को कैसे लूटा गया, सच में हिप्नोटाइज किया गया. या बातों में बहकाया गया शायद ही पता लगे. पर आगे आपको कुछ ऐसे गिरोहों के बारे में बताते हैं. जिनकी लूट का ढंग खुद में ही अजीब होता है. होता था.
नमस्ते गैंग
ये गैंग भी दिल्ली-एनसीआर में एक्टिव है. पैटर्न समझिए, जहां-जहां कॉल सेंटर और बीपीओ ज्यादा होते हैं, बाहर से आकर लोग काम करते हैं. वहीं ऐसे गिरोह पाए जाते हैं. ऐसे शहरों में भीड़ ज्यादा होती है और जान-पहचान वाले कम. नमस्ते गैंग वाले भी कारवालों को निशाना बनाते हैं. लूटने के लिए कार वालों को ये नमस्ते करते हैं. फिर कार रोकने का इशारा करते हैं. फिर समान पार कर देते हैं. कई बार सामान ले जाना इतना आसान नहीं होता. तो ये चाकू और बंदूक अड़ाकर लूट लेते हैं.कूलर गैंग
कूलर गैंग वाले आप पर हमला नहीं करते आपके कूलर को निशाना बनाते हैं. आमतौर पर कूलर घर के बाहर खिड़कियों पर लगे होते हैं. ये कूलर के पानी में नशीली दवाई मिला देते हैं. नशा पानी में घुलकर हवा से सारे कमरे में फैलता है. आप गहरी नींद में सो जाते हैं. कई घंटों तक नींद नहीं टूटती, आप सोते हैं और सोते ही जाते हैं. इस बीच ताला टूटता है, आलमारी चटकती है, जेवर साफ होते हैं और आप कंगले.चड्डी बनियान गिरोह
इस गिरोह के लोग दिनभर भिखारियों, बेकारों जैसे फिरते थे. लोगों के घर पर नजर रखते और रात होते ही कपड़े उतार लूट के लिए निकल पड़ते. ये सिर्फ चड्डी बनियान में होते. इनके हाथ में हथियार होते, चाकू, कुल्हाड़ी, रॉड. इनके उन्ह पुते होते. हाथ-पैर और सारी देह में या तो कीचड लगा होता या तेल जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल होता. हाथ लगाते ही ये छिटल जाते. साथ ही ये लंबूसड़ से होते, तेल-मैल में पुते होते तो डरावने भी दिखते और इसका सायकोलॉजिकल प्रेशर पड़ता. ये अपनी लूट के रास्ते में आने वालों को जान से मार देने में भी नहीं हिचकते थे. मेरे साथ स्कूल में एक लड़का पढ़ता था, उसके पापा के घर में ये गिरोह घुसा तो सबको मार डाला था, सिर्फ उसके पापा बच गए थे क्योंकि वो वहां थे नहीं. चड्डी-बनियान गिरोह देश के हर कोने में मिल जाया करता है. आज भी इसकी खबरें आती हैं.सरियामार
सरियामार गिरोह का आतंक सबसे ज्यादा बच्चों में था. उन्हें इसके नाम से खूब डराया जाता. नाम बताने की किसी शर्त पर काम किए बिना सीलमपुरिया सूत्र टिनटिन त्रिवेदी बताते हैं, ये गिरोह कुछ वैसे ही चलता था, जैसे NH-10 में आपने अनुष्का शर्मा को चलये देखा होगा. ये पैर के पास सरिया रख कर चलते और बगल में जाते किसी को भी सरिया से मार उसे लूट लेते थे. कई बार इस गिरोह के लोग घर में घुसकर लोगों को मार-लूट लेते थे.महिला शॉल गिरोह
इस गिरोह में बेसिकली औरतें होती हैं. ये दुकानों के आगे शॉल खोलकर बैठ जातीं, उसकी आड़ में कोई शटर खोलता और पीछे से शटर के नीचे घुस जाता. बाहर से देखने पर कुछ पता नहीं चलता कि क्या हो रहा है, अंदर घुसी औरत सामान पारकर बाहर आ जाती. ऐसा ये बिना ताला तोड़े भी कर लेती थीं. किसी दुकान में कई शॉल ओढ़ी औरतें पहुंचती. दुकानदार से बातें करतीं सामान निक्ल्वातीं और इतने में कोई शॉल में सामान छुपा पार कर देती.टट्टी गिरोह
ये यूजुअल चोरों जैसे ही होते थे, खाली घरों के ताले तोड़ते, चोरी करते. लेकिन जाते-जाते टट्टी कर जाते. जिसके घर में चोरी हुई हो उसके सामने सवाल होता पहले पुलिस को बताए या टट्टी हटाए.Advertisement













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