हमने किसी भी छात्र पर गोली नहीं चलाई. हो सकता है किसी मेटल से चोट लगी हो. लेकिन सफदरजंग में भर्ती दो घायलों का भी दावा है कि उन्हें गोली लगी है. लेकिन अगर किसी को भी गोली लगी होती तो एम्बुलेंस उन्हें नजदीक के होली फैमिली या फोर्टिस में ले जाती.सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 15 दिसंबर की झड़पों के बाद साउथ ईस्ट दिल्ली के पुलिसकर्मियों ने सीनियर अधिकारियों से पूछा था कि क्या उनमें से किसी ने गोलियां चलाई थीं. उन सभी अधिकारियों ने कहा था कि गोली नहीं चलाई थी. लेकिन 18 दिसंबर को एक वीडियो सामने आया. इसमें दो पुलिसवाले फायरिंग करते दिखे. पास में एक तीसरा अधिकारी खड़ा था. एक सूत्र ने अखबार को बताया कि साउथ ईस्ट पुलिस ने इन पुलिसवालों के साथ ही साथ एसीपी की भी पहचान की. और इसकी पुष्टि की गई कि फायरिंग हुई थी. इन पुलिसवालों ने बताया कि जब प्रदर्शन हिंसक हो गया था कि वो उन्होंने आत्मरक्षा में फायरिंग की. उनके बयान तब केस डायरी में दर्ज किए गए थे. जामिया नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में हिंसा से संबंधित दो एफआईआर दर्ज की गई हैं. इसमें पुलिस गोलीबारी का कोई जिक्र नहीं है. एक अधिकारी ने कहा विशेष केस डायरी अभी क्राइम ब्रांच एसआईटी को नहीं सौंपी गई है. 4 जनवरी को जब दोबारा पूछा गया कि क्या पुलिस ने गोलियां चलाई? तो डीसीपी बिस्वाल ने कहा कि वह इस पर कमेंट नहीं कर सकते क्योंकि जांच चल रही है. इस बीच, जामिया के तीनों छात्रों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है. एसआईटी आने वाले दिनों में उनके बयान दर्ज करने के लिए उनसे संपर्क कर सकती है. सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर सुनील गुप्ता का कहना है कि दोनों छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. उनके शरीर से जो चीज निकाली गई है उसे दिल्ली पुलिस को भेज दिया गया है. हमारी भूमिका सिर्फ बेसिक ट्रीटमेंट देने तक की है. होली फैमिली अस्पताल के डायरेक्टर फादर जॉर्ज पीए का कहना है कि पेशेंट की बॉडी से जो भी निकला है उसे दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया है. पुलिस जांच कर पता लगाएगी कि यह गोली थी या टियर गैस सेल.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एंटी CAA प्रोटेस्ट में शामिल आएशा रेना और लादीदा पर उठते सवाल























