दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने सेवा विभाग के सचिव आशीष मोरे को गुरुवार, 11 मई को पद से हटा दिया. आज ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि दिल्ली के प्रशासनिक मामलों में फैसले लेने का अधिकार दिल्ली सरकार को होगा, ना कि उपराज्यपाल को. ये फैसला आने के कुछ ही देर बाद केजरीवाल सरकार ऐक्टिव मोड में आ गई.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही केजरीवाल सरकार ने किस बड़े अधिकारी को हटा दिया?
अधिकारी का विभाग पहले उपराज्यपाल के कंट्रोल में था.


आजतक से जुड़े पंकज की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के सेवा विभाग के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अपने डिपार्टेमेंट के सचिव को बदलने का आदेश जारी कर दिया. आदेश के मुताबिक अब 1995 बैच के आईएएस अधिकारी एके सिंह सेवा विभाग के नए सचिव नियुक्त किए गए हैं. इससे पहले वो जल बोर्ड के सीईओ रह चुके हैं.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया था कि आने वाले दिनों में दिल्ली सरकार में बड़े प्रशासनिक फेरबदल किए जाएंगे. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि लोक सेवा कार्यों में बाधा बनने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा. इसके कुछ देर बाद ही आशीष मोरे को सेवा विभाग के सचिव पद से हटाए जाने का आदेश आ गया. कोर्ट के फैसले से पहले सेवा विभाग उपराज्यपाल के कंट्रोल में था.
इससे पहले 'दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल' वाले मामले में फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि राजधानी में अब अफसरों की ट्रांसफर पोस्टिंग पर दिल्ली सरकार का अधिकार होगा. चीफ जस्टिफ डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के ही 2019 के उस फैसले से सहमत नहीं हैं, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार का ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर से ऊपर के अफसरों पर कोई अधिकार नहीं है. इस पीठ का मानना है कि भले ही नेशनल कैपिटल टेरिटरी यानी दिल्ली पूर्ण राज्य ना हो, लेकिन यहां की चुनी हुई सरकार के पास भी ऐसे अधिकार हैं कि वो कानून बना सकती है.
फैसले की बड़ी बातें- केंद्र और राज्य दोनों के पास कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाए कि केंद्र का इतना ज्यादा दखल ना हो कि वो राज्य सरकार का काम अपने हाथ में ले ले. इससे संघीय ढांचा प्रभावित होगा.
- अधिकारियों की तैनाती और तबादले का अधिकार दिल्ली सरकार के पास होगा.
- चुनी हुई सरकार के पास प्रशासनिक सेवा का अधिकार होना चाहिए.
- अगर चुनी हुई सरकार के पास प्रशासनिक व्यस्था का अधिकार नहीं होगा, तो फिर ट्रिपल चेन जवाबदेही पूरी नहीं होती.
- उपराज्यपाल को सरकार की सलाह पर ही काम करना होगा.
- पुलिस, पब्लिक आर्डर और लैंड का अधिकार केंद्र के पास रहेगा.
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