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डेविड शेफर्ड: वो अंपायर जो 111, 222, 333 के स्कोर पर टांग उठाकर टोटका करता था

कोई पूछे स्पिरिट ऑफ क्रिकेट तो नाम शेफर्ड लिखना. आज ही के दिन पैदा हुए थे.

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फोटो - thelallantop
आईसीसी ने डेविड शेफ़र्ड से बोला कि रुक जाइए. 2005 के ऐशेज़ में एक भव्य विदाई देंगे. लेकिन उन्होंने मना कर दिया. वो नॉर्मल अंत चाहते थे. एकदम सौम्य. कोई शूं-शां नहीं. क्यूंकि वो खुद भी वैसे ही थे. कोई चमक दमक नहीं. आउट को आउट कहने में कभी देरी नहीं की. कभी नहीं सोचा कि सामने कौन है. उनके लिए तेंदुलकर का वजन उतना ही था जितना अगरकर का. वो क्रिकेट से लौट गए. जेनी, अपने भाई बिल और अपने कुत्ते के पास. और उस दिन एक लेगसी का अंत हुआ. वो लेगसी जो शुरू हुई थी 1965 में. जब डेविड शेफ़र्ड ने ऑक्सफ़ोर्ड की ओर से पहला मैच खेला था. 139 गेंद में 108 रन बनाये. हालांकि उन्हें टीम में स्थापित होने में 1 साल लग गया. और उस एक साल के बाद शुरू हुआ वक़्त जहां लोगों ने शेफ़र्ड से आशा लगानी शुरू कर दी. 1969 में वो अपनी फॉर्म के चरम पर थे मगर इंजर्ड हो गए. 30 साल की उमर तक आते-आते वो क्राउड के चहेते हो गए. 'गुड ओल्ड शेप' का नाम मिला. उस नाम की दो बड़ी वजहें थीं. एक तो उनकी देह. वो देह प्रोफेशनल क्रिकेट में कम ही देखने को मिलती है. उसकी वजह थी एक रोड एक्सीडेंट. जिसके बाद उनका वजन बढ़ता गया. उस एक्सीडेंट में उनके साथ बैठे एक खिलाड़ी की मौत हो गयी थी. दूसरी वहज था उनका खेल. वो फ्रंट और बैक फुट, दोनों पर खेल सकते थे. लेट कट उतनी ही सुन्दरता से मारते थे जितना सुन्दर उनका बैक फुट पंच था. लेकिन उनका दिल हमेशा गेंद को हवा में मारने में लगा रहता था. उनके कप्तान टोनी ब्राउन कहते हैं, "मुझे याद है बुच व्हाइट को उन्होंने बहुत मारा था. जो बहुत तेज़ गेंद फेंकता था. और वो मैदान पर भारी शरीर के बावजूद तेज़ थे. 22 यार्ड्स पर डेविड सबसे तेज़ दौड़ा करते थे." खेलने के दिनों में उनके सामने रेगुलरली हार आती रही. पुराने क्रिकेट के गजब राइटर गिब्सन कहते हैं कि हर कोई गुस्से में लाल होक आता था, डेविड पर्पल रंग का चेहरा लेकर आते थे. लेकिन जब जीतते थे उतने ही प्रसन्नचित. ग्लोस्टरशेयर के लिए खेलते हुए सरे के खिलाफ़ अपनी टीम को 24 पर 4 विकेट से उबारा. खुद 72 रन बनाये. साल 1973. ये वही क्लब था जो इनसे लगातार वजन कम करते रहने को कहता रहा.

क्लब ने मोटापे कम करने को कहा

ऐसे में एक दिलचस्प किस्सा है. उनके टीम मेट जैक डेवी बताते हैं. डेविड शेफ़र्ड को एक हेल्थ फार्म में भर्ती कराया गया था. उसके बेहद नज़दीक एक पब था. वो पब डेविड के एक टीम-मेट का फेवरिट था. डेविड ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे. वहां एक खिड़की थी जिससे बहुत ही आसानी से भागा जा सकता था. शेफ़र्ड हर रात उस खिड़की की शरण में जा पहुंचते थे. हालांकि वो बहुत ज़्यादा नहीं पेटे थे लेकिन बियर तो बियर थी. हां, उनका दोस्त वहीँ जमा रहता था.

अम्पायरिंग करियर

शेफ़र्ड ने 70 के दशक में क्रिकेट खेला मगर सेलेक्टर्स को उतना नहीं इम्प्रेस कर सके की उनका नाम इंग्लैंड की क्रिकेट टीम के लिए लिख लिया जाता. टोनी ब्राउन हमेशा उनसे कहते थे कि वो बहुत परेशान हो जाते हैं. वो सब कुछ व्यवस्थित चाहते थे. जो अम्पायर का काम था. और शेफ़र्ड एक दिन अम्पायरिंग में खड़े थे. ganguly david shepherd 20 साल का अम्पायरिंग करियर. 92 टेस्ट मैच. 172 वन-डे मैच. और इसी बीच तीन लगातार वर्ल्ड कप. 1996, 1999, 2003. अम्पायर नहीं वो मशीन थे. गजब की डिसीज़न मेकिंग की प्रतिभा. अच्छा हुआ उस समय में डीआरएस नहीं था. डेविड शेफ़र्ड होते तो बहुत नाराज़ होते. जब उनसे गलती होनी ही नहीं थी तो भला डीआरएस की ज़रुरत क्या थी? दुनिया का एक और महान अम्पायर साइमन टॉफल उनके बारे में कहता है कि डेविड के मैदान पर होने से एक बात पक्की थी - खिलाड़ी खुश रहते थे. साइमन के साथ डेविड जिम में एक्स्ट्रा लैप करते थे और बदले में साइमन की आइस-क्रीम खा लेते थे. 27 अक्टूबर 2009. उमर 68. डेविड शेफ़र्ड की पारी उस दिन घोषित हुई. कैंसर की वजह से. कभी भी रैंकिंग जारी नहीं हुई मगर इस दुनिया में खेले जाने वाले क्रिकेट के खेल में डेविड शेफ़र्ड से बेहतर कोई भी अम्पायर नहीं हुआ. क्रिकेट की किताबों में कहीं भी स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट की परिभाषा नहीं है. अगर कोई पूछे तो यकीनन उसे डेविड शेफ़र्ड का नाम बतला दिया जाना चाहिए.

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