याद रखिएगा अजमेर दरगाह के ये वही दीवान हैं, जिनने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अजमेर दरगाह पर जियारत करवाने से मना कर दिया था. उनने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि पाकिस्तान वाले हमारे सैनिकों के सिर काट ले गए थे.अभी 10 अप्रैल को अजमेर में कश्मीर में शांति को लेकर एक अन्तर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस हुई थी, वहीं दीवान आबेदीन ने घोषणा की थी कि वो खुद तिरंगा झण्डा फहराने के लिए श्रीनगर जाएंगे. दीवान सैयद जेनुल आबेदीन ने जो कहा उसका मतलब ये था कि चलो ये सही है कि इस बारे में बात हो रही है, पर ये बहस का टॉपिक थोड़े है. मैं तो कश्मीर वाले भाई-बहनों से भी अपील करूंगा कि वो तिरंगे का सम्मान करने हमारे साथ आएं. दीवान साहब के बाद अजमेर दरगाह के गद्दीनशीन और प्रमुख खादिम पीर नसीम मियां चिश्ती भी उनके सपोर्ट में आ गए. उनने कहा ये बड़ी अच्छी बात है, मैं और मेरे लोग भी श्रीनगर जाएंगे, तिरंगा फहराएंगे. ये तो बड़ा बुरा है कि आप अपने देश के अंदर ही अपना झंडा नहीं फहरा पाते हैं. मैं तो दीवान सैयद साहब के साथ जाउंगा और कश्मीर में अलग-अलग जगह 1000 झंडे फहराऊंगा.
तुम कितने डंडे मारोगे, हर घर से झंडा निकलेगा
दरगाह के दीवान और खादिम ने फैसला लिया है, कश्मीर जाएंगे, हजारों तिरंगे फहराएंगे.
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Source- Wikipedia
एनआईटी श्रीनगर का हाल पता है न आपको? कहते हैं वेस्टइंडीज और इंडिया के मैच में इंडिया के हारने पर कुछ लोग बड़े खुश हुए थे. सैमुअल्स के फैन नहीं थे वो, वजह कुछ और ही थी. तो उसके बाद लड़कों ने वहां तिरंगा फहराया, पुलिस आई, लाठियां चलीं, एनआईटी को वहां से शिफ्ट करने की बात चली. NIT श्रीनगर में हुआ क्या है, यहां देखें अब फिर तिरंगा फहराने की बात चल रही है. अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के दीवान सैयद जैनुएल आबेदीन अली खान और दरगाह के खादिम पीर नसीम मियां चिश्ती कश्मीर में झंडा फहराएंगे. उनने बाक़ी लोगों से भी रिक्वेस्ट की है कि उनके साथ झंडा फहराने आगे आएं.
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