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निर्वान को बचा सकती थी 17.5 करोड़ की दवा, किसी ने माता-पिता को 11 करोड़ दे दिए!

लोगों ने माता-पिता के अकाउंट में साढ़े 5 करोड़ रुपए जमा करवा दिए थे. फिर जो डोनेशन आया उसे देखकर परिवार दंग रह गया.

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(फोटो: Facebook/NirvanFightsMA से साभार.)

स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी नाम की दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे है एक बच्चे के माता-पिता को किसी अंजान शख्स ने 11 करोड़ रुपए का डोनेशन दे दिया. इस बीमारी के इलाज की दवा का नाम जोलेंग्स्मा (Zolgensma) है. कीमत आंखों की पुतली फैला देने वाली है. 17.5 करोड़ रुपए! मिडिल क्लास लोगों के लिए इसे अफोर्ड कर पाना नामुमकिन है. इसी वजह से बच्चे के माता-पिता ने एक डोनेशन वेबसाइट पर अकाउंट बनाया और लोगों से मदद की गुहार लगाई. 19 फरवरी तक उस अकाउंट में 5.5 करोड़ रुपए जमा हो चुके थे. लेकिन 20 फरवरी को किसी ने 11 करोड़ रुपए दान किए. आपने सही पढ़ा, 11 करोड़ रुपए.

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निरवान के माता-पिता का संघर्ष.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, निरवान के पिता सारंग और मां अदिति मेनन पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. निरवान उनकी इकलौती संतान है. परिवार मूल रूप से केरल का रहने वाला है. काम के चलते मुंबई में रहते हैं. निरवान स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी टाइप-2 से ग्रस्त है. 7 जनवरी को उन्हें पता चला कि उन्हें निरवान का इलाज करवाना होगा. ये पता चलने के बाद दोनों काफी परेशान हो गए. रुपए जुटाने के लिए उन्होंने क्राउडफंडिंग प्लेटफार्म 'मिलाप' और 'इम्पैक्ट गुरु' पर अकाउंट बनाया. 

रिपोर्ट के मुताबिक 19 फरवरी, तक 72 हजार लोगों ने उनके पास कुल साढ़े पांच करोड़ रुपए जमा करवा दिए थे. लेकिन 20 फरवरी को ऐसा डोनेशन आया कि सारंग और अदिति हैरान रह गए. किसी ने उनके अकाउंट में 11 करोड़ रुपये जमा करा दिए. जब उन्होंने अकाउंट चेक किया तो अकाउंट में मौजूद राशि को देख कर यकीन नहीं हुआ. इसके लिए उन्होंने वेबसाइट सर्विस से कॉन्टैक्ट किया. कहीं कोई ग्लिच तो नहीं है. वेबसाइट वालों ने पुष्टि कर दी कि अमेरिका के किसी शख्स ने 11 करोड़ रुपए दान किए हैं. जिस भी शख्स ने ये 11 करोड़ रुपए दान किए उसने अपनी पहचान छुपाए रखी, किसी को नहीं बताया कि वो कौन है.  

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सारंग ने अब निरवान के इलाज के लिए मुंबई के हिंदुजा अस्पताल के डॉक्टरों से अमेरिका से दवा इंपोर्ट करवाने के लिए बात कर ली है. उन्होंने ये भी बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कांग्रेस सांसद हिबी ईडन से दवा पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी कम करने की अपील की है. इससे पहले वो 25 जनवरी को केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज से भी मिले थे. इस दौरान वीना जॉर्ज ने उन्हें अपनी तरफ से हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया था.

कितनी खतरनाक है ये बीमारी ?

ये एक दुर्लभ न्यूरोमस्कुलर बीमारी है. इसके चलते रोगी को चलने फिरने में दिक्कत आती हैं. इससे ग्रस्त लोग बैठ तो लेते हैं लेकिन बिना किसी सहायता के खड़े नहीं हो पाते, न ही चल-फिर पाते हैं. बीमारी के शिकार शख्स को सांस लेने और निगलने में काफी दिक्कतें आती हैं. दूरगामी परिणाम ये होता है कि मरीज की उम्र कम हो जाती है. आमतौर पर इस बीमारी के लक्षण 6 महीने से 18 महीने बीच दिखना शुरू होते हैं.

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