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धारा का ये वीडियो देखकर बचपन याद आ जाएगा, पिंकी प्रॉमिस

ये वीडियो बहुत अच्छा है, और सबसे अच्छा है इसमें यूज किए गए कलर. जिसके आप फैन हो जाओगे.

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फोटो - thelallantop
वो कौन सी चीज है, जिसके बगैर आप इंडिया को इमैजिन नहीं कर सकते? ढेर सारे लोग ढेर सारे जवाब देंगे, पर सच कहूं तो मैं त्योहारों के बिना इंडिया को इमैजिन नहीं कर सकता. इतनी वैरायटी है हमारे यहां कि बिना वजह खुश होने के ढेर सारे मौके मिल ही जाते हैं.
अर्चित जब दीवाली की मिठाई लेकर स्कूल पहुंचता है तो क्लास के बाकी बच्चे खुशी से फुदकने लगते हैं. ईद पर ऑफिस का हर साथी अकरम से बस सेंवइयों की जिद करता है. दशहरे पर जलता रावण देखकर जब सब खुश हो रहे होते हैं तो करीम चाचा भी घर में बैठकर मिठाई चख रहे होते हैं. आखिर, उनकी वजह से ही तो रावण जल पाया था. और होली का तो पूछिए ही मत. मन करता है कि हर किसी को गले लगाकर उसे पेटभर गुझिया खिलाई जाएं.
ये त्योहार ही हैं जब हमारा दिल फूलकर गुब्बारा हो जाता है. इतना बड़ा हो जाता है कि हम हर शिकायत भूलकर बस खुशियां बांटते हैं. इससे ज्यादा खुशी किसी और चीज में कहां होती है. और इसी खुशी को दोगुना कर देती हैं मिठाइयां और खाना. हम इंडियावालों को तो वैसे भी बस बहाना चाहिए खाने का. डकार लेने का कम्पिटीशन हो तो शायद पाकिस्तान ही हमारे आसपास टिकेगा. वहां भी अपनी जैसी नीयत वाले लोग रहते हैं न. लेकिन, हारने का तो सवाल ही नहीं उठता मियां. त्योहारों की इसी खुशी में डूबते हुए कुकिंग ऑइल ब्रांड धारा ने एक ऐड बनाया है. ऐड कैंपेन का नाम है, 'ये त्योहारों की धारा है'. इस ऐड में नवरात्र भी है, दीवाली भी है, ईद भी और होली भी. जिंगल में गुंथे एनिमेशन इतने खूबसूरत दिखते हैं कि एक बार तो जी नॉस्टैलजिक हो जाता है. देख लीजिए एक बार. https://www.youtube.com/watch?v=bYNIv0fYpiM ये ऐड जितना खूबसूरत है, उतना ही जरूरी भी. पिछले कुछ दिनों से मुल्क जो देख रहा है, उसे देखते हुए ये ऐड बड़ा जरूरी लगा. बड़े सही वक्त पर आया है. सभी बेसब्र होकर दशहरे और दीवाली का इंतजार कर रहे हैं. लोगों को खुश होने का मौका मिलेगा. दिल दुखाने वाली चीजें झाड़ू मारकर बाहर कर दी जाएंगी, जो बार-बार धूल के माफिक दिल पर जम जाती हैं. बेहतर होगा कि इसी खुशी में हिंदु-मुस्लिम औक भारत-पाकिस्तान जैसे सियासी लफ्ज़ भुलाकर भाईचारे और प्यार जैसे हर्फ याद कर लिए जाएं. कितना अच्छा होगा कि एक-दूसरे पर देशप्रेमी और देशद्रोही का ठप्पा लगाने के बजाय उन्हें गले लगा लिया जाए. 'डेड पोएट्स सोसायटी' में जॉन कीटिंग कहते हैं, 'Now we all have a great need for acceptance.' सभी प्यार चाहते हैं और कोई भी इतना बुरा नहीं होता है कि प्यार के बदले प्यार न दे सके. हम इंसानों के सॉफ्टवेयर नफरत और नाराजगी के वायरस बहुत देर तक नहीं झेल पाते. तो क्यों न आज ही एंटी-वायरस मार दिया जाए.

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