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दलाई लामा को मिला पहला ग्रैमी अवार्ड, चीन सुलग गया

दलाई लामा को ग्रैमी अवार्ड मिलने पर चीन ने विरोध किया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दलाई लामा कोई धार्मिक नेता नहीं है बल्कि धर्म की आड़ में अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं.

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दलाई लामा को अवार्ड मिलने पर चीन ने विरोध जताया है (india today)

दलाई लामा को ग्रैमी अवार्ड क्या मिला चीन सुलग गया. उसने इसकी न सिर्फ कड़ी आलोचना की है, बल्कि दलाई लामा के लिए कहा है कि वो कोई धार्मिक नेता नहीं हैं बल्कि ‘अलगाववादी गतिविधियां चलाने वाले राजनीतिक निर्वासित’ हैं. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो इस बात का सख्त विरोध करता है कि कोई भी पक्ष इस अवॉर्ड को चीन-विरोधी गतिविधियों के लिए एक औजार के रूप में इस्तेमाल करे.

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बता दें कि दलाई लामा को रविवार, 1 फरवरी को लॉस एंजेलिस में हुए 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में 'Best Audio Book Narration and Storytelling Recording' कैटेगरी में अपना पहला ग्रैमी अवार्ड जीता. उन्हें यह अवॉर्ड उनके स्पोकन-वर्ड एल्बम ‘Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama’ के लिए मिला है. 

सोमवार, 2 फरवरी को दलाई लामा के पुरस्कार जीतने पर जब रिएक्शन मांगा गया तो चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि वो (दलाई लामा) धर्म के नाम पर अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं. उन्होंने आगे कहा,

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दलाई लामा सिर्फ एक धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं. वह एक राजनीतिक निर्वासित हैं, जो धर्म की आड़ में चीन-विरोधी अलगाववादी गतिविधियों में लगे हुए हैं.

लिन जियान ने आगे कहा कि बीजिंग इस बात का सख्त विरोध करता है कि कोई भी पक्ष इस अवॉर्ड को चीन विरोधी गतिविधियों के लिए एक औजार के रूप में इस्तेमाल करे.

बता दें कि दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च धार्मिक नेता हैं. उनका असली नाम तेनजिन ग्यात्सो है. साल 1959 में चीनी शासन के खिलाफ एक विफल विद्रोह के बाद वह तिब्बत से भागकर भारत के धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं. तिब्बत की आजादी के लिए उनके अहिंसक संघर्ष के लिए उन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 90 साल के दलाई लामा ने रविवार 1 फरवरी को अपना पहला ग्रैमी अवार्ड जीता, जिसमें उन्होंने कई मशहूर प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ा है. पुरस्कार मिलने पर दलाई लामा ने बेहद संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वो इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखते हैं.

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